
Haryana news: चंडीगढ़, 14 अप्रैल । पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड को लेकर जारी केंद्र सरकार के नए गजट नोटिफिकेशन को पूरी तरह हरियाणा विरोधी करार दिया है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा जब पंजाब से अलग हुआ तो बाकायदा बोर्ड के नियम बनाए गए थे। इन नियमों में हरियाणा के हितों का ध्यान रखते हुए कई प्रावधान किए गए थे।
जैसे कि बोर्ड में सिंचाई का मेंबर हरियाणा से होगा, पावर का सदस्य पंजाब से होगा और अध्यक्ष हिमाचल का नहीं होगा। अब नए फैसले में कहा गया है कि किसी भी पद पर, किसी भी प्रदेश का सदस्य विराजमान हो सकता है। इससे हरियाणा के अधिकारों से खिलवाड़ की आशंका है। क्योंकि यह पहले भी हो चुका है।
हुड्डा ने कहा कि एक तरफ तो बीजेपी सरकार हरियाणा को एसवाईएल का पानी नहीं दिलवा रही और दूसरी तरफ भाखड़ा के पानी व मैनेजमेंट बोर्ड की नौकरियों में भी हरियाणा के हितों की लगातार अनदेखी हो रही है। सबसे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि प्रदेश की भाजपा सरकार इसपर मौन धारण किए बैठी है।

जब बीबीएमबी में हरियाणा के कोटे की भर्तियों को भी खत्म किया गया था, तब भी प्रदेश सरकार ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं करवाई थी।
एसवाईएल को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कई साल पहले सुप्रीम कोर्ट हरियाणा के पक्ष में फैसला सुना चुकी है। कई साल से हरियाणा और केंद्र दोनों जगह बीजेपी की सरकार है। बावजूद इसके हरियाणा को उसके हक का पानी दिलवाने के लिए दोनों ही सरकारी कोई कोशिश नहीं कर रही हैं। यह हरियाणा की जनता के साथ विश्वासघात है।
मंडियों में खरीद नहीं होने पर प्रतिक्रिया देते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि सरकार ने किसानों को पोर्टल और शर्तों के जाल में उलझा के रखा है। अपनी फसल बेचने के लिए किसान को पहले पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है, जबकि सीजन के टाइम पोर्टल हमेशा ठप हो जाता है। उसके बाद फिर गेट पास कटता, जो रेजिस्ट्रेशन ना होने की वजह से कट ही नहीं पाता। अगर कई-कई दिन की माथापच्ची के बाद ये काम हो जाता है तो उसके बाद बायोमेट्रिक, ट्रेक्टर नंबर, वेरिफिकेशन और गारंटर जैसी अनगिनत शर्तें किसानों से पूरी करवाई जाती हैं।
यानी सरकार ने किसानों को एमएसपी से वंचित करने का एक पूरा तंत्र तैयार कर रखा है। खरीद से ज्यादा सरकार की मंशा घोटाला करने की नजर आती है। क्योंकि पिछले सीजन में भी सरकार ने धान खरीद में घोटाला किया, फिर आलू खरीद में और अब गेहूं व सरसों में भी ऐसी ही साजिशें नजर आ रही हैं।
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