
Haryana News: हरियाणा में जाट मुख्यमंत्री न बनना भी शुभ अवसर!, जाट नेता हवा सिंह सांगवान का फेसबुक पोस्ट वायरल
हम सभी जानते हैं की प्रथम नवंबर 1966 को हरियाणा बना था, जो इससे पहले पंजाब का हिस्सा था। जब से हरियाणा बना है, इस राज्य में अधिकतर अवधि में जाट ही मुख्यमंत्री रहे हैं, उदाहरण के लिए चौधरी बंसीलाल चौधरी देवीलाल चौधरी भजनलाल चौधरी हुकम सिंह चौधरी ओम प्रकाश चौटाला व चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा। चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बाद हरियाणा में भाजपा की सरकार आई और मोदी जी ने अपनी दादागिरी के तहत एक गैर हरियाणवी श्री मनोहर लाल खट्टर को हरियाणा राज्य का मुख्यमंत्री बनवाया। और वर्तमान में फिर से मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जोकि एक हरियाणवी हैं हरियाणा के मुख्यमंत्री बने।

तब कुछ लोगों ने जाटों को दिल भर कर बदनाम किया था कि जाट मुख्यमंत्री केवल जाटों को ही नौकरी देते हैं। यह प्रचार हरियाणा में कई सालों तक चलता रहा और इस प्रचार का असर स्वयं जाटों पर भी इतना पड़ा कि वह समझने लग गए थे कि उनका ही राज है और वह चिट्टियां बनाकर हमेशा नौकरियों के लिए घूमते रहते थे और सोचते थे कि उन्हीं का राज है और उन्हीं को नौकरी मिलेगी। लेकिन इस बात में रत्ती भर सच्चाई थी। यदि वास्तव में इसका और गहनता से अध्ययन किया जाए तो जाटों के राज में जाट अधिक निकम्में हो गए थे और जाटों को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। अभी लगभग एक वर्ष से इस विषय पर मैंने अधिक से अधिक अध्ययन और चिंतन किया तो सच्चाई यह मिली कि पहले जाट सत्ता के नशे में रहते थे, आज वह वास्तविक धरातल पर खड़े हैं और जबरदस्त तरक्की कर रहे हैं। आपको याद होगा कि जब पहली बार जाट मुख्यमंत्री नहीं रहा और श्री मनोहर लाल खट्टर मुख्यमंत्री बने थे, तब सबसे ज्यादा जाट HCS नियुक्त हुए थे। जिस पर लोगों को बहुत ही अचंभा हुआ था। और यह खबर उस समय केअखबारों की सुर्खियों में छाई रहती थी कि ऐसी कौन सी गलती हुई है कि जाट मुख्यमंत्री नहीं होने पर भी इतने ज्यादा जाटों का HCS में चयन हो रहा है!
जब इस सच्चाई को अंदर से जानने की कोशिश की तो मैने पाया है कि जाटों ने जाट मुख्यमंत्री काल में 40% की वृद्धि से तरक्की की थी तो अब वर्तमान में जाट 60% की वृद्धि से तरक्की कर रहे हैं। मेरा गांव चरखी दादरी जिले में पड़ता है, और इस क्षेत्र में हमारी 99% रिश्तेदारियां है। बाढ़डा के पास एक गांव है, जिसे हम हमेशा उस क्षेत्र का सबसे पिछड़ा हुआ गांव मानते रहे हैं। उस गांव के बीच से मुझे सैकड़ो बार जाने का अवसर मिला है। क्योंकि उस गांव से दो किलोमीटर आगे मेरी रिश्तेदारी है। जिस गांव में कभी लोग ग्रेजुएट नहीं होते थे, आज उसी गांव में 14 लड़के लड़कियां एमबीबीएस कर रहे हैं। चरखी दादरी, जो कि कभी महेंद्रगढ़ की तहसील हुआ करती थी, आज जिला है। कभी यह इलाका सबसे पिछड़ा इलाका माना जाता था।1966 से पहले तो इसे पंजाब का काला पानी भी कहते थे। लेकिन वर्तमान में एनडीए आईआईटी आईआईएम एमबीबीएस इत्यादि में जाने वाले में हरियाणा के सब जिलों से अधिक इस जिले के बच्चे मिलते हैं। यह सच्चाई मेरी इस बात का प्रमाण है कि जाटों को ये समझ में आ गई है कि हमने खुद ही अपना रास्ता निकालना होगा। मैं यह बात दावे से कह सकता हूं कि यदि इसी प्रकार कुछ साल और हरियाणा में जाट मुख्यमंत्री नहीं बना तो जाट दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की करेगा। और साइंस की इस लोकोक्ति को कि, “A sound mind lives in a sound body”, जाटों ने इसे सिद्ध कर दिया है और आने वाले समय में इस सच्चाई को जाट कौम और तस्दीक कर देगी।
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