चंडीगढ़

नाबार्ड की ओर से हरियाणा को वर्ष 2024-25 में 2.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरण की संभावना

चंडीगढ़, 5 मार्च- हरियाणा में कृषि, एमएसएमई, शिक्षा, आवास, निर्यात और नवीनीकरण ऊर्जा जैसे प्राथमिकता क्षेत्रों के विकास हेतु राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा राज्य के लिए वर्ष 2024-25 के लिए 2,27,821 करोड़ रुपये के ऋण वितरण की संभावनाओं के साथ स्टेट फोकस पेपर तैयार किया गया है, जोकि गत वर्ष की तुलना में 32.76 प्रतिशत अधिक है। इसमें कृषि क्षेत्र के लिए 1.02 लाख करोड़ रुपये के ऋण का अनुमान शामिल है।

 

यह जानकारी आज यहां हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री जेपी दलाल ने नाबार्ड द्वारा आयोजित स्टेट क्रेडिट सेमिनार में स्टेट फोकस पेपर-2024-25 का विमोचन करने उपरांत दी। स्टेट फोकस पेपर के अनुसार, 31 दिसंबर, 2023 तक हरियाणा की ऋण भुगतान में कैश डिपॉजिट की दर 84 प्रतिशत है, जबकि यह दर राष्ट्रीय स्तर पर 60 प्रतिशत निर्धारित है। वर्ष 2023-24 के दौरान हरियाणा में कृषि क्षेत्र ने 8.1 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है, जो देश में सबसे अधिक में से एक है। देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हरियाणा भौगोलिक दृष्टि से छोटा राज्य होने के बावजूद लगभग 4 प्रतिशत का योगदान देता है।

 

छोटे व सीमांत किसानों और गरीबों के लिए ऋण उपलब्ध करवाएं बैंक

 

अपने संबोधन में श्री जेपी दलाल ने कहा कि नाबार्ड बैंकों को निर्देश दे कि वे गांव में रह रहे छोटे व सीमांत किसानों और गरीबों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुविधाजनक तरीके से उनकी आवश्यकतानुसार ऋण उपलब्ध करवाएं। उन्होंने नाबार्ड के अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अगले वर्ष का फोकस पेपर तैयार करते समय इस बात का भी उल्लेख करें कि ग्रामीण क्षेत्र में कितने उद्यमी तैयार किए गए हैं।

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उन्होंने कहा कि हमें फसल विविधीकरण व प्रसंस्करण पर जोर देना होगा और इसके लिए बैंक ऋण उपलब्ध करवाएं, ताकि किसान आर्थिक दृष्टि से समृद्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि कुछ निजी बैंक किसानों को भूमि के नाम पर ऋण उपलब्ध करवाते हैं, जबकि बैंकों को प्रोजेक्ट पर ऋण देना चाहिए, तभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आत्मनिर्भर आएगी। इसके अलावा, पशुपालन जो कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्त्रोत भी है, उसे बढ़ावा देने हेतु बैंकों को भेड़, बकरी, गाय, भैंस और मत्स्य पालन के लिए ऋण उपलब्ध करवाना चाहिए। इसी प्रकार, नाबार्ड को ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि के अलावा पॉली हाउस, मशरूम, फूलों की खेती के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों तथा पशु नस्ल सुधार जैसे कार्यक्रमों को भी अपनी योजनाओं में शामिल करने की जरूरत है।

 

श्री जेपी दलाल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निरंतर जोर दिया जा रहा है और पैक्स को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। अब पैक्स में केवल कृषि उर्वरक ही नहीं, बल्कि व्यापक बहुआयामी गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वर्ष 2047 में विकसित भारत से पहले विकसित हरियाणा धरातल पर नजर आएगा। उन्होंने राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के चेयरमैन से आग्रह किया कि वे जिला स्तर पर विशेष शिविर लगाकर छोटे ऋण लेने वाले लोगों की शिकायतों का निवारण करें, ताकि उनकी बैंकों के प्रति भाव बदले।

 

सेमिनार में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक डॉ राजेश प्रसाद, भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से उप महाप्रबंधक श्रीमती सविता वर्मा ने भी संबोधित किया और स्टेट फोकस पेपर- 2024-25 के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला। सेमिनार में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने स्वयं सहायता समूह व किसान उत्पादक समूहों के सदस्यों को उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित भी किया।

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कार्यक्रम के उपरांत मीडिया से बातचीत करते हुए श्री जेपी दलाल ने कहा कि आज के सेमिनार में किस-किस क्षेत्र में पूंजी को बढ़ावा दिया जाए, समावेशी विकास कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इन सब विषयों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए परंपरागत कृषि की बजाय पुष्प खेती, मत्स्य पालन व विविधीकरण की दिशा में बढ़ना होगा और इसके लिए किसानों को ट्रेनिंग दी जाए व बैंकों द्वारा ऋण उपलब्ध करवाया जाए। इतना ही नहीं, किसानों के उत्पाद को कच्चे माल के रूप में न बेचकर ऐसी नीतियां बनानी होंगी, जिससे प्रोसेसिंग यूनिट लगे, वैल्यू एडिशन हो, ताकि उत्पाद अच्छी कीमतों पर बिकें।

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