
Haryana News: हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण को लेकर आज एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में समानांतर (Parallel) बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने संबंधी याचिका पर सुनवाई होगी।
यदि आयोग इस याचिका को स्वीकार करता है, तो इन दोनों जिलों में सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के साथ-साथ एक निजी कंपनी भी उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति कर सकेगी। इसे हरियाणा में बिजली क्षेत्र में निजीकरण की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
इस प्रस्ताव का हरियाणा पावर इंजीनियर एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि समानांतर वितरण लाइसेंस देने से सरकारी बिजली व्यवस्था कमजोर होगी, सार्वजनिक निवेश प्रभावित होगा और भविष्य में पूरे बिजली क्षेत्र के निजीकरण का रास्ता खुल सकता है। एसोसिएशन ने आयोग के समक्ष विस्तृत आपत्तियां दाखिल करते हुए मांग की है कि जनहित और उपभोक्ताओं के हितों को देखते हुए इस याचिका को खारिज किया जाए।
वहीं, हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (HVPNL) ने भी आयोग के समक्ष अपना विस्तृत जवाब दाखिल करते हुए याचिका का विरोध किया है। निगम ने अपने उत्तर में कहा है कि याचिकाकर्ता द्वारा मांगा गया वितरण लाइसेंस वैधानिक एवं नियामकीय प्रावधानों की कसौटी पर परखा जाना आवश्यक है तथा आयोग को बिजली अधिनियम, 2003, संबंधित नियमों और पूर्व न्यायिक निर्णयों के आलोक में ही निर्णय लेना चाहिए। निगम ने अपने जवाब में पूर्व के न्यायिक निर्णयों का भी हवाला दिया है।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ता कंपनी का दावा है कि समानांतर वितरण लाइसेंस मिलने से बिजली क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, आधुनिक तकनीक का उपयोग होगा, सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा और उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प उपलब्ध होंगे। कंपनी ने अपनी याचिका में गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में वितरण लाइसेंस प्रदान करने का अनुरोध किया है।
आज होने वाली सुनवाई पर बिजली विभाग, कर्मचारी संगठनों, उद्योग जगत और लाखों बिजली उपभोक्ताओं की निगाहें टिकी हुई हैं। आयोग का फैसला न केवल गुरुग्राम और नूंह बल्कि हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था के भविष्य और निजी क्षेत्र की भागीदारी की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
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