
Haryana news: मुकेश बघेल ब्यूरो चीफ, पलवल। स्कूली शिक्षा में स्किल एजुकेशन, नवाचार और औद्योगिक समन्वय से उसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाया जाएगा। इसी उद्देश्य से बृहस्पतिवार को श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय में एजुकेशन कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। इस प्रज्ञा परिसंवाद में शिक्षाविद, प्रशासक, औद्योगिक लीडर और क्षेत्र के 100 से भी अधिक स्कूलों के प्रिंसिपल ने हिस्सा लिया। पॉलिसी डॉक्यूमेंट तैयार करने के लिए पांच तकनीकी सत्रों का भी आयोजन किया गया। यह डॉक्युमेंट हरियाणा सरकार को सौंपा जाएगा। कॉन्क्लेव की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रोफेसर दिनेश कुमार ने कहा कि इससे हरियाणा के स्कूलों में श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय की तर्ज पर दोहरी शिक्षा प्रणाली का मार्ग प्रशस्त होगा। यह कॉन्क्लेव स्कूली शिक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन के लिहाज से मील का पत्थर साबित होगा। कुलगुरु प्रोफेसर दिनेश कुमार ने कहा कि जब तक स्किल एजुकेशन स्कूली स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार लागू नहीं होगी और उसमें उद्योग का समन्वय नहीं होगा, तो उच्च स्तरीय शिक्षा में अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आएँगे। उन्होंने जापान सहित कई देशों के उदाहरण भी दिए।

मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय शिक्षण मंडल के संगठन मंत्री बी आर शंकरानंद ने कहा कि मनुष्य के विकास में कौशल और मूल्य, दोनों का समन्वय आवश्यक है। यह स्कूली शिक्षा के माध्यम से ही सम्भव हो सकता है। बी आर शंकरानंद ने कौशल को सरलता के साथ व्यापक बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मूल्य आध्यात्मिक ज्ञान है और कौशल भौतिक विज्ञान, विद्यार्थियों को इसे लोकहित में विकसित करने की प्रेरणा दी जनि चाहिए, तभी 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य अर्जित होगा।
विशिष्ट अतिथि पलवल के जिला उपयुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि बेरोजगारी दूर करने के लिए कौशल सबसे ज्यादा जरूरी है। एक तरफ युवा बेरोजगार हैं और दूसरी तरफ स्किल्ड लोग नहीं मिल रहे। स्कूल स्तरीय शिक्षा में स्किल का घटक शामिल कर इससे निजात पाई जा सकती है।
गुरुग्राम के एडीसी सोनू भट्ट ने स्कूलों में विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपना धर्म निभाएं और विद्यार्थियों को स्किल और नवाचार से सुसज्जित कर उसे इंडस्ट्री का एक्सपोजर दिलाएं।
फरीदाबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार भाटिया ने कहा कि एक स्किल जीवन को पार कर देती है। स्किल के विकास के लिए उन्होंने ट्रेनर को भी प्रशिक्षित करने का परामर्श दिया। साथ ही श्री भाटिया ने इसमें इंडस्ट्री के सहयोग का भरोसा भी दिलाया। एनएचआरडीएन के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम सिंह ने स्कूली विद्यार्थियों को उनकी रुचियों और क्षमताओं के अनुरूप स्किल सिखाने का आह्वान किया।
एसवीएसयू की कुलसचिव प्रोफेसर ज्योति राणा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि स्कूली शिक्षा में कौशल और उद्योग के समन्वय की यह नीति एनईपी-2020 के अनुसार होगी। इस कॉन्क्लेव के मंथन से कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आएंगे, उन्हें ड्राफ्ट में सम्मिलित किया जाएगा। अकादमिक अधिष्ठाता प्रोफेसर विक्रम सिंह ने स्किल एजुकेशन के मॉडल पर प्रकाश डाला। एसवीएसयू ट्रांजिट कैंपस की निदेशक प्रोफेसर सुजाता शाही ने समापन समारोह में मुख्यातिथि के रूप में कहा कि इस कॉन्क्लेव से स्कूल स्तर पर स्किल एजुकेशन के प्रारूप में स्पष्टता आ गई है। इस पहल के लिए उन्होंने इरा को बधाई दी।
इंडस्ट्रीज रिलेशन्स एन्ड अलुमनी अफेयर्स डिपार्टमेंट की निदेशक चंचल भारद्वाज ने कॉन्क्लेव की प्रस्तावना बताते हुए कहा कि करिकुलम एन्ड स्किल इंटीग्रेशन, इंडस्ट्री पार्टनरशिप मॉडल, टीचर कैपेसिटी एन्ड इंफ्रा, पॉलिसी, गवर्नेंस एन्ड फंडिंग तथा स्टूडेंट गाइडेंस सहित पांच तकनीकी सत्र आयोजित किए गए हैं। इन्हीं के आधार पर ड्राफ्ट तैयार होगा। एसवीएसयू सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल सतेंद्र सौरोत ने सभी का आभार ज्ञापित किया।
इस अवसर पर एससीईआरटी के उप निदेशक अशोक बघेल, गुरुग्राम की जिला शिक्षा अधिकारी कैप्टन इंदु बोगन, भारतीय शिक्षण मंडल के पदाधिकारी गणपति और उत्कर्ष पटेल, एफआईए के निदेशक दीपक जैन, अंशुल नन्दा, कन्सेन्ट्रिक्स से नरेश मागो, संदीप भाटला, सम्राट चौहान,लक्ष्मण सिंह, अभिमन्यु सिहाग, सहित काफी संख्या में प्रिंसिपल, औद्योगिक साझीदार और शिक्षाविद उपस्थित थे।
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