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Haryana News: हरियाणा विधानसभा में प्राकृतिक खेती पर विशेष व्याख्यान, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगा संदेश

Haryana News: हरियाणा विधानसभा में प्राकृतिक खेती पर विशेष व्याख्यान, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगा संदेश

Haryana News: हरियाणा विधानसभा में प्राकृतिक खेती पर विशेष व्याख्यान, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगा संदेश

अध्यक्ष हरविंदर कल्याण ने प्राकृतिक खेती को समय की मांग बताया

नई दिल्ली 18 मार्च — हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष श्री हरविंदर कल्याण ने कहा कि विधानसभा के लिए यह एक विशेष अवसर है कि गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्व सदन में उपस्थित होकर प्राकृतिक खेती जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आचार्य देवव्रत का प्राकृतिक खेती के प्रति न केवल गहरा जुड़ाव है, बल्कि इस दिशा में उनका योगदान भी अत्यंत उल्लेखनीय रहा है। वे वर्षों से देशभर में प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं और किसानों को प्रकृति के सिद्धांतों के अनुरूप खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

श्री हरविंदर कल्याण ने कहा कि हरियाणा एक कृषि प्रधान प्रदेश है, ऐसे में प्राकृतिक खेती का महत्व और भी बढ़ जाता है। राज्य के कई क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है और धान-गेहूं आधारित खेती के कारण जल संसाधनों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अब समय की मांग है कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से मिट्टी, जल, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए एक संतुलित कृषि प्रणाली विकसित की जाए।

उन्होंने अपने गुजरात प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी के साथ उनकी विस्तृत चर्चा हुई। आचार्य देवव्रत द्वारा प्रस्तुत प्राकृतिक खेती के मॉडल और डॉक्यूमेंट्री को देखकर इस विषय की उपयोगिता को करीब से समझने का अवसर मिला। इसी दौरान उन्होंने राज्यपाल को हरियाणा विधानसभा में आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया।

श्री कल्याण ने कहा कि आज के व्याख्यान से सभी विधायकों को प्राकृतिक खेती के बारे में गहन जानकारी प्राप्त हुई है। कई सदस्यों ने रुचि के साथ अपने प्रश्न भी रखे, जिनका राज्यपाल महोदय ने विस्तार से उत्तर दिया।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से यह संदेश किसानों तक पहुंचेगा और वे समय की मांग के अनुरूप खेती में बदलाव लाते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। इससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्राकृतिक खेती को एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि इसका संबंध केवल खान-पान से ही नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य से भी है। उन्होंने चिंता जताई कि रासायनिक खेती के कारण बीमारियां बढ़ रही हैं और अब समय है कि प्रकृति के करीब लौटते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है, ताकि खेती लाभदायक बन सके और किसान इसे अपनाने के लिए प्रेरित हों।

प्राकृतिक खेती मानव कल्याण का विषय, दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपनाने की आवश्यकता : आचार्य देवव्रत

किसानों की आय, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए प्राकृतिक खेती जरूरी

नई दिल्ली 18 मार्च — गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्राकृतिक खेती पर विशेष व्याख्यान देते हुए कहा कि यह विषय केवल कृषि तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने सभी दलों के जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण विषय को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मानव कल्याण के दृष्टिकोण से सदन में उठाया गया।

उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा प्राकृतिक कृषि मिशन को आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे प्रदेश के लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि गुजरात में वर्तमान में लगभग 8 लाख किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं और इस दिशा में राज्य सरकार के साथ-साथ विपक्ष का भी सकारात्मक सहयोग मिल रहा है।

राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र में प्रधानाचार्य रहते हुए उन्होंने स्वयं रासायनिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर कदम बढ़ाया। एक घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कीटनाशक के संपर्क में आने से एक कर्मचारी के बेहोश हो जाने की घटना ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि रासायनिक खेती से उत्पन्न खाद्य पदार्थ मानव स्वास्थ्य के लिए कितने हानिकारक हो सकते हैं।

रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर चेतावनी, प्राकृतिक खेती को बताया समाधान

उन्होंने स्पष्ट किया कि जैविक (ऑर्गेनिक) और प्राकृतिक खेती में मूलभूत अंतर है। जैविक खेती में भारी मात्रा में गोबर की खाद की आवश्यकता होती है, जबकि प्राकृतिक खेती सूक्ष्म जीवाणुओं पर आधारित होती है और इसमें लागत बहुत कम आती है। उन्होंने कहा कि इस पद्धति में उत्पादन पूरी तरह संभव है और यह किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी सिद्ध हो रही है।
राज्यपाल ने चेतावनी दी कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है और देश की भूमि का ऑर्गेनिक कार्बन स्तर गंभीर रूप से कम हो गया है, जिससे भूमि बंजर होने की स्थिति में पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए न तो शुद्ध भोजन उपलब्ध रहेगा और न ही पीने योग्य पानी।

उन्होंने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है, जल स्रोत दूषित हो रहे हैं और कैंसर, हृदय रोग तथा किडनी फेलियर जैसी बीमारियों में वृद्धि देखी जा रही है।

प्राकृतिक खेती को समाधान बताते हुए उन्होंने कहा कि यह देशी गाय आधारित, कम लागत वाली और पर्यावरण के अनुकूल पद्धति है। इसमें गोबर, गोमूत्र, गुड़ और बेसन जैसे साधारण तत्वों से सूक्ष्म जीवाणुओं की वृद्धि कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जाती है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से न केवल उत्पादन में सुधार संभव है, बल्कि किसान अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं। गुजरात में कई किसान एक एकड़ भूमि से लाखों रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं।

राज्यपाल ने सभी विधायकों और जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करें और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें। उन्होंने कहा कि बिना प्रशिक्षण के इस पद्धति को अपनाना कठिन है, इसलिए विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ही इसे लागू किया जाना चाहिए।

सदन में चर्चा और विधायकों की सहभागिता

इस अवसर पर सदन में उपस्थित विभिन्न विधायकों ने प्राकृतिक खेती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए, जिनका आचार्य देवव्रत ने विस्तार से उत्तर दिया। चर्चा के दौरान विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव साझा किए और बताया कि किस प्रकार किसान पारंपरिक खेती से धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। कई सदस्यों ने उत्पादन, लागत, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़े पहलुओं पर जिज्ञासा व्यक्त की, जिनका राज्यपाल ने अपने अनुभव और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर समाधान प्रस्तुत किया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि सभी मिलकर इस दिशा में कार्य करें, तो प्राकृतिक खेती के माध्यम से देश न केवल स्वास्थ्य संकट से उबर सकता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त बन सकता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।

मुख्यमंत्री का जनप्रतिनिधियों से आह्वान, प्राकृतिक खेती का विषय दलगत राजनीति से ऊपर

हम सभी का दायित्व किसानों को इसके लिए करें जागरूक

हरियाणा विधानसभा में प्राकृतिक खेती पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम

आचार्य देवव्रत के प्रयासों से प्राकृतिक खेती को मिल रही नई दिशा — मुख्यमंत्री

नई दिल्ली, 18 मार्च — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सभी जनप्रतिनिधियों का आह्वान करते हुए कहा कि कुछ विषय ऐसे होते हैं, जो दलगत राजनीति से ऊपर होते हैं, इसलिए हम सभी का यह दायित्व बनता है कि प्राकृतिक खेती को अपने जीवन में तो उतारे ही, उसके साथ ही किसानों को भी इसके बारे जागरूक करें।

मुख्यमंत्री बुधवार को हरियाणा विधानसभा में आयोजित प्राकृतिक खेती पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती पर अपना व्याख्यान दिया।

श्री नायब सिंह सैनी ने राज्यपाल आचार्य देवव्रत का स्वागत करते हुए कहा कि वे भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और प्राकृतिक जीवन शैली के सशक्त प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा, शिक्षा और विशेष रूप से प्राकृतिक खेती के प्रसार के लिए समर्पित किया है। आचार्य देवव्रत जी देश के कोने-कोने में जाकर किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज के समय में किसान पेस्टिसाइड, यूरिया और रासायनिक खाद को अत्यधिक मात्रा में उपयोग कर रहे हैं, जिससे वातावरण भी प्रदूषित होता है और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा एक कृषि प्रधान प्रदेश है और प्राकृतिक खेती का मॉडल किसानों के लिए एक नई दिशा प्रस्तुत करता है। आचार्य देवव्रत के प्रयासों से गुरुकुल, कुरुक्षेत्र में 180 एकड़ भूमि में बना प्राकृतिक कृषि फार्म हरियाणा के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती का एक अनूठा उदाहरण है। इस फार्म में न कोई कीटनाशक प्रयोग किया जाता है और न ही कोई रासायनिक खाद। केवल गाय के गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत, घनामृत और बीजामृत का ही प्रयोग किया जाता है। खेती की यह पद्धति अल्प बजट पर आधारित है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा में प्राकृतिक खेती योजना वर्ष 2022 में शुरू की थी। इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा एक प्राकृतिक खेती पोर्टल शुरू किया गया है। इस पोर्टल पर प्रदेश में 31 हजार 873 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए 19 हजार 723 किसानों ने अपना सत्यापन करवाया है। अब तक 12 हजार से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा हमेटी, जींद ने राज्य के सभी सरपंचों को एक दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दिया गया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना में प्राकृतिक खेती उत्पाद की ब्रांडिंग व पैकेजिंग पर प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। देसी गाय की खरीद पर 30 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती है। इस योजना के तहत 2 हजार 500 किसानों को 4 ड्रम प्रति किसान की दर से 75 लाख रुपये तथा 523 देसी गाय की खरीद के लिए 1 करोड़ 30 लाख रुपये की अनुदान राशि दी गई।

बजट 2026-27 में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए पहल

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि उन्होंने बजट 2026-27 में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल की हैं। किसानों को जैविक खेती प्रमाणीकरण के लिए ‘हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी’ को एक प्रमाणीकरण संस्था बनाया जाएगा। एपीडा से प्रमाणित किसानों को अगले 5 वर्षों तक 10 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष अनुदान दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हरियाणा विधानसभा में राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी का प्राकृतिक खेती पर मार्गदर्शन प्राप्त होने से निश्चित तौर पर हरियाणा के किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ेंगे।

विकास मलिक

विकास मलिक 18 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। विकास मलिक ने इंडिया न्यूज, इंडिया न्यूज़ हरियाणा, साधना न्यूज, एमएचवन न्यूज, खबरें अभी तक, न्यूज नेशन, लीविंग इंडिया न्यूज़ समेत कई बड़े चैनल्स में काम किया है। विकास मलिक अभी जिओ हॉटस्टार में हरियाणावी कमेंट्री में बतौर प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं और साथ में अपनी खुद की वेबसाइट चला रहे है। इनकी कंटेंट से लेकर खेल और राजनीति के साथ हरियाणा पर गहरी पकड़ है।

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