
Sukhna Lake: सुखना कैचमेंट एरिया में अवैध निर्माण पर ‘दोहरी मार’, रिहायशी इलाकों में अवैध निर्माण पर चलेगा पीला पंजा ?
केंद्र के कड़े नियमों के बाद हाई कोर्ट ने बिजली कनेक्शन पर राहत देने से किया इनकार
सुखना कैचमेंट एरिया में हुए अवैध निर्माण पर जल्द आ सकता है बड़ा निर्णय
केंन्द्र सरकार और कोर्ट के आदेश का आसपास के रिहायशी इलाकों में अवैध निर्माण पर चलेगा पीला पंजा ?
चंडीगढ़ | सुखना वाइल्डलाइफ सेंचुरी के इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) और कैचमेंट एरिया में स्थित अवैध बस्तियों पर अब तक का सबसे बड़ा कानूनी और प्रशासनिक संकट मंडरा रहा है।
केंद्र सरकार के ताज़ा निर्देशों और न्यायपालिका के सख्त रुख ने सुखना एन्क्लेव, ट्रिब्यून कॉलोनी, कांसल, कैंबवाला, नयागांव और सकेतड़ी जैसे इलाकों में ‘पीले पंजे’ की आहट तेज कर दी है।
हाई कोर्ट का ताज़ा आदेश:
बिजली कनेक्शन पर राहत नहीं
हाल ही में निवासियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जगमोहन बंसल की अदालत ने रिहायशी मकानों में बिजली कनेक्शन देने के मामले में कोई भी सीधा आदेश देने से इनकार कर दिया है।याचिकाकर्ताओं ने ‘जीवन के अधिकार’ (Article 21) के तहत बिजली जैसी मूलभूत सुविधा की मांग की थी। लेकिन कोर्ट ने कहा कि चूंकि मामला पहले से ही डिवीजन बेंच के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए इस स्तर पर कोई हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने सभी याचिकाओं का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ताओं को डिवीजन बेंच जानें को बोला|
* बिजली निगम (PSPCL) की मजबूरी: निगम ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट के पुराने अंतरिम आदेशों के कारण वे इस क्षेत्र में बिजली, पानी या सीवरेज जैसी सुविधाएं देने में असमर्थ हैं और इस पर अब हाल ही के 18मार्च 2026 के सिंगल बेंच के आदेश के कारण और करारा झटका लग गया है हालांकि, निगम ने हाईकोर्ट से कांसल निवासियों के लिए ‘अस्थायी कनेक्शन’ की अनुमति मांगी थी जो मैंने हाईकोर्ट ख़ारिज कर दी है।

केंद्र सरकार का 1 किलोमीटर का ‘सुरक्षा घेरा’
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने 3 दिसंबर 2025 को पंजाब सरकार को कड़ा निर्देश दिया है कि अभयारण्य के चारों ओर कम से कम 1 किलोमीटर का इको-सेंसिटिव ज़ोन (ESZ) अधिसूचित किया जाए। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि यह कदम हाई कोर्ट के 2 मार्च 2020 के आदेश के अनुरूप है। इस फैसले से उन हजारों मकानों पर सीधा खतरा पैदा हो गया है जो अब तक 100 मीटर के पुराने प्रस्ताव की आड़ में सुरक्षित महसूस कर रहे थे।
लिविंग एंटिटी आदेश (2020): हाई कोर्ट ने सुखना झील को ‘जीवित इकाई’ घोषित कर 2011 के बाद के सभी निर्माणों को गिराने का आदेश दिया था। और उचित मुआवज़ा देने को बोला था ।
एक बार फिर से अरावली (खोरी कॉलोनी) जैसे आदेश आ सकते हैं। जिसमें अवैध निर्माणों को गिराने की वीडियोग्राफी जमा कराने के भी आदेश दिए गए थे ।जून-जुलाई 2021 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली क्षेत्र में 10,000 अवैध मकानों को ढहाने के आदेश ने यह साफ कर दिया था कि वन भूमि और संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध निर्माणों को अब लंबे समय तक संरक्षण नहीं मिल सकता।

चीफ जस्टिस की सख्त टिप्पणी: बिल्डर माफिया में खलबली
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सीधे तौर पर पूछा है, “झील को और कितना सुखाओगे?” कोर्ट ने राजनीतिक संरक्षण और बिल्डर माफिया की मिलीभगत पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट के इस रुख से न केवल निर्माणों पर, बल्कि अवैध रजिस्ट्री करने वाले अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है।निवासियों में दहशत का माहौल प्रशासनिक सख्ती के चलते अब विवादित क्षेत्रों में नई सरकारी सुविधाएं पूरी तरह बंद हैं। भू-माफियाओं के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई लगाने वाले मध्यमवर्गीय परिवार अब भारी नुकसान की आशंका से ग्रस्त हैं। कई लोग अपनी संपत्तियां बेचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कानूनी स्थिति को देखते हुए खरीददार नहीं मिल रहे हैं।







