
Haryana News: हरियाणा की 12 मार्च 2026 की बड़ी खबरें, पढ़िए एक क्लिक में
हरियाणा में बढ़ी कारोबारी सुगमता
मुख्य सचिव ने की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता
चंडीगढ़, 12 मार्च- हरियाणा सरकार ने उद्योगों, उद्यमियों और आम नागरिकों पर नियामकीय बोझ कम करने तथा कारोबार को और सुगम बनाने की दिशा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
इसी कड़ी में मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां अनुपालन में कमी एवं डीरेगुलेशन फेज-2 को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भूमि विनियमों, उद्योग, बिजली, पर्यावरण, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े सुधारों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने और निर्धारित समय-सीमा में सुधारों को लागू करने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि पारदर्शी, पूर्वानुमेय और निवेशक-अनुकूल नियामकीय परिवेश सृजित करने आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अनावश्यक अनुपालनों को कम करने और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने से सेवा वितरण में सुधार होगा और हरियाणा के तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास भी मजबूत होगा।
बैठक में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए एक बहुउद्देशीय विधायक लाने के प्रस्ताव की भी समीक्षा की गई, जिसका उद्देश्य राज्य में व्यवसायों से जुड़े विभिन्न नियामकीय प्रावधानों को एकीकृत करना और तर्कसंगत बनाना है। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव फिलहाल उद्योग विभाग के विचाराधीन है और अंतिम रूप दिए जाने के बाद इससे प्रक्रियाएं सरल होंगी, अनावश्यक अनुपालन समाप्त होंगे और राज्य में कारोबार का वातावरण और बेहतर होगा।
मुख्य सचिव ने विभागों को प्रक्रियाओं को सरल बनाने, दस्तावेजों की आवश्यकता कम करने और प्रशासनिक कार्यों में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सुधारों में तेजी लाने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि अनुमतियों की प्रक्रिया को सरल बनाने और अनावश्यक लाइसेंस समाप्त करने के लिए कई पहल की जा रही हैं। साथ ही एकीकृत ऑनलाइन प्रणालियों के माध्यम से अनुमतियों की डिजिटल प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है।
बैठक में नगर एवं ग्राम आयोजना क्षेत्र में प्रस्तावित सुधारों की भी समीक्षा की गई। इसमें भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को सरल बनाने तथा विकास योजनाओं के अनुरूप भूमि के मांग-आधारित उपयोग को बढ़ावा देने के उपाय शामिल हैं। भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया को भी अधिक सरल और पारदर्शी बनाने पर विचार किया गया। अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन केंद्र (एचईपीसी) पहले से ही निवेशकों के लिए एकल संपर्क केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है, जहां विभिन्न व्यवसायिक अनुमतियां एक ही स्थान से प्राप्त की जा सकती हैं।
बैठक में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए कार्य परिवेश को बेहतर बनाने से संबंधित पहलों की भी समीक्षा की गई। इनमें स्व-घोषणा आधारित अनुमतियों को बढ़ावा देना, कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए निरीक्षण आवश्यकताओं को कम करना तथा बिजली कनेक्शन जैसी सुविधाएं प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाना शामिल है।
बैठक में औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि उपयोग को अधिक प्रभावी बनाने और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। इनमें औद्योगिक प्लॉटों के उपयोग में अधिक लचीलापन, औद्योगिक श्रमिकों के लिए आवास को बढ़ावा देना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से अवसंरचना विकास को प्रोत्साहित करना शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार औद्योगिक क्षेत्रों में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, अग्नि सुरक्षा प्रणाली और अन्य आवश्यक सुविधाओं को भी मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रही है।
मुख्य सचिव ने कहा कि विभागों को तकनीक आधारित समाधान अपनाने और आधुनिक नियामकीय ढांचे को लागू करने की आवश्यकता है, ताकि राष्ट्रीय और वैश्विक सर्वोत्तम मानकों के अनुरूप प्रशासनिक सुधार सुनिश्चित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नवाचार, उद्यमिता और निवेश को प्रोत्साहित करने वाला कारोबारी वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है और कम्प्लायंस रिडक्शन तथा डीरेगुलेशन पहल इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बैठक में पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल, नगर एवं ग्राम आयोजना तथा शहरी संपदा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. सिंह, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ.अमित कुमार अग्रवाल तथा विभाग के महानिदेशक श्री यश गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
क्रमांक: 2026
हरियाणा में यमुना प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में तेजी
हर नाले के लिए गठित होंगी अलग-अलग समितियां
चंडीगढ़, 12 मार्च- हरियाणा ने यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इस संबंध में आज यहां मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अपशिष्ट जल उपचार, औद्योगिक अनुपालन और सीवरेज अवसंरचना में हुए महत्वपूर्ण सुधारों की जानकारी दी गई।
बैठक में बताया गया कि यमुना में मिलने वाले 11 प्रमुख नालों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 1632 एमएलडी अपशिष्ट जल प्रवाहित होता है, जिसमें से करीब 1000 एमएलडी जल का उपचार किया जा रहा है। यह नदी के पुनर्जीवन के प्रति राज्य की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अलावा, प्रदूषण के स्तर में निरंतर कमी सुनिश्चित करने के लिए सभी नालों में जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी भी की जा रही है।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने निर्देश दिए कि हर नाले के लिए मंडल आयुक्तों की अध्यक्षता में अलग-अलग समितियों का गठन किया जाए, जिनमें संबंधित सभी विभागों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। ये समितियां हर 15 दिन में बैठक कर अपनी रिपोर्ट हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष को प्रस्तुत करेंगी।
बैठक में बताया गया कि यमुना कैचमेंट क्षेत्र में सीवेज उपचार क्षमता के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर कार्य शुरू किया है। वर्तमान में हरियाणा में 91 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) कार्यरत हैं, जिनकी कुल क्षमता 1543 एमएलडी है। इसके अतिरिक्त, 88 एमएलडी क्षमता के 3 एसटीपी निर्माणाधीन हैं, जिन्हें मार्च 2027 तक पूरा किए जाने की संभावना है। वहीं 227 एमएलडी क्षमता के 9 एसटीपी का उन्नयन किया जा रहा है और 510 एमएलडी क्षमता के 9 नए एसटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव है।
औद्योगिक अपशिष्ट जल प्रबंधन में भी सुधार हुआ है। राज्य में 184.5 एमएलडी क्षमता के 17 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) पहले से संचालित हैं। दो सीईटीपी का उन्नयन किया जा रहा है और 146 एमएलडी क्षमता के 8 नए सीईटीपी प्रस्तावित हैं। क्षेत्र की लगभग सभी प्रमुख औद्योगिक इकाइयों को अब सीईटीपी से जोड़ा जा चुका है या उन्होंने अपने-अपने एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कर लिए हैं, जिससे पर्यावरण मानकों का लगभग पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित हुआ है।
बैठक में विभिन्न नालों के लिए तैयार की गई कार्ययोजना की भी समीक्षा की गई। इनमें धनौरा एस्केप, ड्रेन नंबर-2, ड्रेन नंबर-6, मुंगेशपुर ड्रेन, केसीबी ड्रेन, ड्रेन नंबर-8, लेग-1, लेग-2, लेग-3, बुढ़िया नाला और गौंची ड्रेन शामिल हैं। इन नालों से बिना उपचारित जल को यमुना में जाने से रोकने के लिए बड़े स्तर पर सीवर टैपिंग का कार्य किया जा रहा है। साथ ही यमुनानगर में 77 एमएलडी क्षमता का एसटीपी, रोहतक में प्रस्तावित 60 एमएलडी का एसटीपी और गुरुग्राम में प्रस्तावित 100 एमएलडी का एसटीपी स्थापित होने से आने वाले वर्षों में प्रदूषण भार को और कम करने में सहायता मिलेगी। रोहतक, फरीदाबाद और गुरुग्राम के प्रमुख एसटीपी के उन्नयन का कार्य भी प्रगति पर है।
यमुना कैचमेंट क्षेत्र में आने वाले 34 शहरों में सीवरेज नेटवर्क का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है। प्रस्तावित 1632 किलोमीटर सीवर लाइन में से 1626.6 किलोमीटर लाइन बिछाई जा चुकी है, जबकि फरीदाबाद में शेष 5.4 किलोमीटर का कार्य 31 दिसंबर, 2026 तक पूरा होने की संभावना है।
उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग पर भी राज्य सरकार विशेष जोर दे रही है। उपचारित जल से सिंचाई के तीन प्रोजेक्ट पूरे किए जा चुके हैं, जबकि ऐसे छह अन्य प्रोजेक्ट वर्तमान में प्रगति पर हैं। इससे ताजे जल स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
घरेलू गैस की कोई किल्लत नहीं, अफवाह फैलाकर कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई – राज्य मंत्री राजेश नागर
चंडीगढ़, 12 मार्च – हरियाणा के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति राज्य मंत्री श्री राजेश नागर ने कहा है कि राज्य में पेट्रोल, डीजल एवं घरेलू एलपीजी गैस की आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य है। मिडिल ईस्ट में उत्पन्न युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी जो शरारती एवं षड्यंत्रकारी तत्व अफवाह फैला रहे हैं, सरकार उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।
राज्यमंत्री श्री नागर ने कहा कि आमजन अफवाहों पर ध्यान न दे। भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा 9 मार्च, 2026 को जारी एक महत्वपूर्ण पत्र में प्राथमिक क्षेत्रों के लिए घरेलू एलपीजी गैस की आपूर्ति, उसके समुचित एवं समान वितरण तथा उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों के अनुपालन में हरियाणा सरकार ने तत्काल प्रभाव से सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।
वर्तमान में हरियाणा राज्य में पेट्रोल, डीजल एवं घरेलू एलपीजी गैस की आपूर्ति पूरी तरह सुचारू रूप से चल रही है। प्रमुख तेल कंपनियों – इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) एवं हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
इसके अतिरिक्त गैस की आपूर्ति निरंतर रूप से प्राप्त हो रही है, जिससे उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ रहा।
श्री नागर ने कहा कि विभाग पूरी सजगता के साथ केंद्र सरकार की निर्बाध सप्लाई चेन को मजबूत करने तथा उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्यरत है। विभाग के अधिकारी चौबीस घण्टे निगरानी कर रहे हैं, ताकि मांग और आपूर्ति के बीच पूर्ण तालमेल बना रहे।
उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य में रसोई गैस या पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। केवल कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति में अस्थायी रूप से कुछ बाधा उत्पन्न हुई है, उससे भी जल्द ही निजात पा ली जाएगी। यह अस्थायी बाधा वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित है फिर भी, ऑयल कंपनियां इस अस्थायी बाधा को भी दूर करने हेतु लगातार प्रयासरत हैं।
प्राथमिकता के आधार पर कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों एवं अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े प्रतिष्ठानों को सुनिश्चित की जा रही है। शेष वितरण को सामान्य करने के लिए विशेष टीमों का गठन किया गया है, और शीघ्र ही स्थिति पूरी तरह नियंत्रित हो जाएगी।
राज्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार का प्राथमिक उद्देश्य हर घर में रसोई गैस पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाना और सुनिश्चित करना है कि वाहनों के इंजन सुचारू रूप से चलते रहें। केंद्र सरकार के सहयोग से हमने राज्य स्तर पर मजबूत वितरण नेटवर्क विकसित किया है, जिसमें 5,000 से अधिक वितरक शामिल हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन लाखों सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं।
श्री नागर ने चोरी, कालाबाजारी या अनधिकृत वितरण पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य के सभी उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों तथा जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रकों को सख्त निर्देश दिए हैं। इन निर्देशों में विशेष अभियान चलाने, स्टॉक की दैनिक रिपोर्टिंग तथा उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित निपटारे का प्रावधान है। विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 1967 को सक्रिय रखा है, जहां उपभोक्ता अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।
मंत्री श्री नागर ने आमजन से अपील की कि एलपीजी गैस या पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति को लेकर सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। उन्होंने कहा कि नागरिक अनावश्यक घबराहट और भंडारण से बचें, क्योंकि इससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो सकती है।
सिधरावली हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों को मिली वित्तीय सहायता
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने गुरुग्राम में मृतकों के परिजनों को प्रदान किए 20-20 लाख रुपए के चेक, सभी पीड़ित परिवारों को यात्रा खर्च के लिए भी दिये 20-20 हजार रुपए
हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को बीओसी फंड और वर्कमेन कंपनसेशन एक्ट के तहत करीब 20 लाख रुपए तक की ओर मिलेगी वित्तीय मदद
केंद्रीय राज्य मंत्री ने हादसे के उपरांत त्वरित कार्रवाई करने व संवेदनशीलता के साथ पीड़ितों की मदद के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का भी जताया आभार
चण्डीगढ, 12 मार्च- केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने आज गुरुग्राम में सिधरावली गांव में सिग्नेचर ग्लोबल की निर्माणाधीन साइट पर बीते दिनों हुए हादसे में जान गंवाने वाले सात श्रमिकों के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए 20-20 लाख रुपए के चेक प्रदान किए। साथ ही सभी मृतकों के परिजनों को यात्रा खर्च के लिए 20-20 हजार रुपए की वित्तीय सहायता भी दी। केंद्रीय राज्य मंत्री ने गुरुवार को गुरुग्राम के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाऊस में मृतक श्रमिकों के परिजनों से मुलाकात की और दु:ख की घड़ी में ढांढस बंधाया।
केंद्रीय राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने हादसे को लेकर बुधवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी से बातचीत की थी। मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों की हर प्रकार से सहायता का आश्वासन दिया। साथ ही आश्वस्त किया कि हरियाणा सरकार दु:ख की इस घड़ी में पीड़ितों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री से बातचीत के उपरांत वे झारखंड के जमशेदपुर से सांसद श्री विद्युत बरन महतो के साथ बुधवार की देर शाम गुरुग्राम पहुंचे और मृतक श्रमिकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने हादसे के उपरांत त्वरित कार्रवाई करने व पीड़ित परिवारों की संवेदी भाव से मदद करने के लिए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का आभार भी जताया। इस अवसर पर उपायुक्त गुरुग्राम श्री अजय कुमार तथा सीपी श्री विकास अरोड़ा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि बीती 9 मार्च की शाम गुरुग्राम जिला के गांव सिधरावली में सिग्नेचर ग्लोबल कंपनी की साइट पर मिट्टी खिसकने से सात श्रमिकों नामत: शिवशंकर, परमेश्वर महतो, मंगल महतो, भागीरथ गोपे, संजीव गोपे, धनंजय गोपे निवासी झारखंड तथा सतीश निवासी राजस्थान की मौत हो गई जबकि चार अन्य श्रमिक घायल हुए। केंद्रीय राज्य मंत्री ने मृतकों के परिजनों को हरियाणा सरकार की सहायता व दुर्घटना को लेकर की जा रही कार्रवाई के बारे में भी जानकारी दी।
गुरुग्राम के उपायुक्त अजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि 20-20 लाख रुपए की सहायता के अतिरिक्त मृतकों के परिजनों को हरियाणा सरकार के भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (बीओसी) कल्याण फंड से 4 लाख रुपए तथा वर्कमेन कंपनसेशन एक्ट के तहत 15 लाख रुपए से अधिक की सहायता भी दी जाएगी। इस प्रकार प्रत्येक परिवार को कुल मिलाकर लगभग 40 लाख रुपए तक की वित्तीय सहायता मिल सकेगी। उन्होंने हादसे के उपरांत जिला प्रशासन व पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। हादसे के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रोजेक्ट मैनेजर दिनेश वीर और स्ट्रक्चर इंजीनियर विकास पांडेय को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
इस दौरान श्रम विभाग के कमिश्नर वर्कमेन कंपनसेशन एक्ट श्री अनिल शर्मा, एएलसी श्री कुशल कटारिया, मानेसर के एसडीएम श्री दर्शन यादव सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रकट की शोक संवेदनाएं
हैफेड के पूर्व चेयरमैन कैलाश भगत के पिता स्व. अमरनाथ भगत के निधन पर, पूर्व मंत्री कमलेश ढांडा के पिता स्व. जगत सिंह मलिक के निधन पर और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य संजय चौधरी की माता स्व. शकुंतला देवी के निधन पर जताया शोक
चंडीगढ़, 12 मार्च- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वीरवार को कैथल पहुंचकर शोक संवेदनाएं प्रकट की। सबसे पहले मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी हैफेड के पूर्व चेयरमैन कैलाश भगत के पिता स्व. अमरनाथ भगत के निधन पर शोक प्रकट करने उनके आवास पर पहुंचें। जहां उन्होंने परिवार से मुलाकात की और अपनी संवेदनाएं प्रकट की। विदित रहे कि अमरनाथ भगत वरिष्ठ भाजपा नेता थे जिनका गत आठ मार्च को निधन हो गया था।
इसके बाद मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी पूर्व मंत्री कमलेश ढांडा के आवास पर पहुंचें। जहां उनके पिता स्व. जगत सिंह मलिक के निधन पर शोक जताया।
इसके बाद मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य संजय चौधरी के घर पहुंचें। जहां उनकी माता स्व. शकुंतला देवी के निधन पर शोक जताया और संवेदनाएं प्रकट की। इस अवसर पर उनके साथ हरियाणा के पंचायत एवं विकास मंत्री श्री कृष्ण लाल पंवार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
अनिल कुमार दून पिहोवा मेला–2026 के लिए मेला प्रशासक नियुक्त
चंडीगढ़, 12 मार्च- हरियाणा सरकार ने एचसीएस अधिकारी श्री अनिल कुमार दून, जोकि पिहोवा के उपमंडल अधिकारी (नागरिक) हैं, को पिहोवा मेला–2026 के लिए मेला प्रशासक नियुक्त किया है। यह मेला 17 मार्च से 19 मार्च, 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
नाबार्ड द्वारा ‘ग्रामीण भारत महोत्सव – प्रदर्शनी एवं बिक्री’ का आयोजन 13 से 22 मार्च तक चंडीगढ़ के सेक्टर—34 में
चंडीगढ़, 12 मार्च — नाबार्ड (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक) के हरियाणा क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा “ग्रामीण भारत महोत्सव – प्रदर्शनी एवं बिक्री” का आयोजन 13 से 22 मार्च 2026 तक चंडीगढ़ के सेक्टर-34 स्थित एग्ज़ीबिशन ग्राउंड में किया जाएगा। 10 दिवसीय प्रदर्शनी एवं बिक्री महोत्सव में भारत की समृद्ध ग्रामीण विरासत, पारंपरिक शिल्प और हथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। प्रदर्शनी प्रातः 10:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक लगाई जाएगी।
इस महोत्सव में देश के 20 राज्यों से आए कारीगरों, बुनकरों, स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं तथा किसानों द्वारा लगभग 40 स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉलों पर उत्पाद बिक्री के लिए भी उपलब्ध रहेंगे।
इस प्रदर्शनी में नागरिकों को विभिन्न प्रकार के ग्रामीण उत्पाद देखने और खरीदने का अवसर मिलेगा। इनमें मधुबनी एवं गोंड पेंटिंग्स, डोकरा कला, बांस एवं बेंत के उत्पाद, फुलकारी, पश्मीना, होम फर्निशिंग और सिल्क वस्त्र जैसे पारंपरिक शिल्प विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इसके अतिरिक्त जैविक मसाले, अचार और ड्राई फ्रूट्स जैसे उत्पाद भी उपलब्ध होंगें। विभिन्न प्रदेशों के पकवानों की स्टॉल भी लगाई जाएंगी।
नाबार्ड के प्रवक्ता ने बताया कि इस महोत्सव में बड़ी संख्या में नागरिक पहुंचकर ग्रामीण कारीगरों, बुनकरों और महिला उद्यमियों को न केवल प्रोत्साहित करें बल्कि हस्तनिर्मित उत्पादों को खरीदकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अपना योगदान दें।
स्वच्छता सरकार की जिम्मेदारी के साथ-साथ समाज के हर नागरिक का भी है नैतिक कर्तव्य-खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम
पलवल अनाज मंडी में स्वच्छता अभियान को मिली नई गति, खेल राज्य मंत्री श्री गौरव गौतम ने 250 कूड़ेदान किए वितरित
चंडीगढ़, 12 मार्च- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रदेश के खेल राज्य मंत्री श्री गौरव गौतम ने आज पलवल स्थित अनाज मंडी में आयोजित स्वच्छता अभियान के अंतर्गत कूड़ेदान वितरण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर लगभग 250 कूड़ेदान वितरित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य बाजार क्षेत्र को स्वच्छ, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
खेल राज्य मंत्री श्री गौरव गौतम ने अनाज मंडी के दुकानदारों और आढ़तियों को कूड़ेदान वितरित करते हुए उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सरकार की जिम्मेदारी के साथ-साथ समाज के हर नागरिक का भी नैतिक कर्तव्य है। यदि सभी लोग मिलकर अपने आसपास सफाई बनाए रखने का संकल्प लें, तो शहरों और बाजारों को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अनाज मंडी और सब्जी मंडी किसी भी शहर की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र होती हैं। यहां रोजाना हजारों लोग खरीदारी के लिए आते हैं, इसलिए इन स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने व्यापारियों से अपील की कि वे कचरा इधर-उधर फेंकने के बजाय कूड़ेदान में डालें और अपने ग्राहकों को भी स्वच्छता के प्रति प्रेरित करें।
खेल राज्य मंत्री ने कहा कि केंद्र और हरियाणा सरकार प्रदेश में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नगर निकायों के माध्यम से बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और आवासीय क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। स्वच्छता अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। स्वच्छ वातावरण न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है, बल्कि इससे शहर की छवि भी बेहतर बनती है। स्वच्छ और व्यवस्थित बाजारों में लोगों का विश्वास बढ़ता है और व्यापार को भी बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने कहा कि यदि मंडी के सभी व्यापारी और कर्मचारी मिलकर सफाई का ध्यान रखें, तो यह स्थान पूरे जिले के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकता है।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने घर, बाजार और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि पलवल को स्वच्छ और सुंदर शहर बनाया जा सके।
इस मौके पर एसडीएम ज्योति, डीएमसी मनीषा शर्मा व अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
एचसीएस अधिकारियों की एपीआर अब ऑनलाइन दर्ज होगी
चंडीगढ़, 12 मार्च- हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) के अधिकारियों की वर्ष 2025–26 की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (पीएआर) राज्य के इंट्रानेट पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा इस संबंध में जारी एक पत्र के अनुसार एचसीएस अधिकारियों की पीएआर वेबसाइट http://intrahry.gov.in पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी और इसे 31 दिसंबर, 2026 तक अंतिम रूप देना अनिवार्य होगा।
सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों तथा बोर्डों और निगमों के प्रमुखों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
पत्र के अनुसार, अधिकारी एचआरएमएस पोर्टल पर उपलब्ध अपने पेयी कोड और पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से पोर्टल पर लॉगिन कर सकेंगे। सत्यापन के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर पर वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भेजा जाएगा। इसके अतिरिक्त डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) अथवा स्कैन किए गए हस्ताक्षर अपलोड कर भी प्रमाणीकरण किया जा सकेगा।
अधिकारियों को 31 मई तक अपना स्व-मूल्यांकन प्रस्तुत करना होगा। रिपोर्टिंग प्राधिकारी को 31 जुलाई तक मूल्यांकन पूरा करना होगा। रिव्यूइंग प्राधिकारी को 30 सितंबर तक समीक्षा करनी होगी, जबकि स्वीकार करने वाले प्राधिकारी द्वारा 31 दिसंबर, 2026 तक रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
40 वर्ष से अधिक आयु के एचसीएस अधिकारियों के लिए स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है और स्व-मूल्यांकन के साथ मेडिकल रिपोर्ट का सारांश भी अपलोड करना होगा।
पत्र के अनुसार कार्य निष्पादन का मूल्यांकन 1 से 10 के पैमाने पर संख्यात्मक ग्रेडिंग प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इसमें कार्य निष्पादन, व्यक्तिगत गुणों तथा कार्यात्मक दक्षताओं को शामिल किया जाएगा।
ऑनलाइन प्रणाली में यह व्यवस्था भी की गई है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर संबंधित प्राधिकारी द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है तो रिपोर्ट स्वतः अगले स्तर पर अग्रेषित हो जाएगी, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।
प्रदेश में 100 स्वास्थ्य संस्थान बने फर्स्ट रेफरल यूनिट : आरती सिंह राव
-एफआरयू के सुदृढ़ होने से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध होगा
– पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार होगा।
चंडीगढ़, 12 मार्च – हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य सरकार ने नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत प्रदेश में द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 100 स्वास्थ्य संस्थानों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में नामित किया है। इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि गंभीर मामलों में मरीजों को त्वरित उपचार मिल सके।
उन्होंने बताया कि इन एफआरयू को 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं प्रदान करने के लिए विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों पर प्रसूति सेवाएं, नवजात शिशु देखभाल तथा रक्त भंडारण जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे माताओं और नवजात शिशुओं से जुड़ी आपात स्थितियों में तुरंत और प्रभावी चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ये फर्स्ट रेफरल यूनिट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और तृतीयक अस्पतालों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करेंगी। सरकार द्वारा इन केंद्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, विशेषज्ञ चिकित्सा स्टाफ की तैनाती करने और रेफरल व्यवस्था को तेज व प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि इस पहल के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य हरियाणा में मातृ और नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाना है। इन एफआरयू के सुदृढ़ होने से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध होगा, जिससे पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार होगा।
प्रदेश में जिन 100 स्वास्थ्य संस्थानों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में नामित किया है उनमें अंबाला जिला के 5 संस्थान हैं। इनके अलावा, भिवानी के 4, चरखी दादरी के 2, फरीदाबाद के 5, फतेहाबाद के भी 5, गुरुग्राम के 4, हिसार के 5, झज्जर के 6, जींद के 6, कैथल के 4, करनाल के 6, कुरुक्षेत्र के 5, महेंद्रगढ़ के 4, नूंह के 5, पलवल के 4, पंचकूला के 4, पानीपत के 4, रेवाड़ी के 4, रोहतक के 4, सिरसा के 5, सोनीपत के 5 तथा यमुनानगर जिला के 4 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को एफआरयू के तौर पर नामित किया गया है।







