
Equinox 2026: 21 मार्च को धरती पर होगा अद्भुत नजारा, दिन और रात होंगे बिल्कुल बराबर; जानें इसके पीछे का विज्ञान
वसंत संपात (Vernal Equinox) के साथ ही होगा ग्रीष्म ऋतु का आगमन, सूर्य की सीधी किरणें भूमध्य रेखा पर पड़ने से बदलेगा समय का चक्र।
नई दिल्ली/जयपुर: खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए 21 मार्च का दिन बेहद खास होने वाला है। इस दिन पूरी दुनिया में दिन और रात की अवधि एक समान यानी 12-12 घंटे की होगी। ज्योतिष और विज्ञान दोनों ही दृष्टिकोण से इस घटना को ‘वसंत संपात’ (Vernal Equinox) कहा जाता है।
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान के निदेशक और विख्यात ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, यह स्थिति तब बनती है जब सूर्य अपनी कक्षा में चलते हुए भूमध्य रेखा (Equator) पर लंबवत (Perpendicular) चमकता है।
क्यों होते हैं दिन और रात बराबर?
पृथ्वी अपने अक्ष (Axis) पर 23.5^\circ झुकी हुई है और सूर्य के चारों ओर एक अंडाकार मार्ग में परिक्रमा करती है। इस झुकाव के कारण ही साल भर दिन और रात की लंबाई में अंतर आता है। लेकिन साल में दो मौके ऐसे आते हैं जब पृथ्वी का झुकाव न तो सूर्य की ओर होता है और न ही उससे दूर।
* 21 मार्च: इसे वसंत संपात कहते हैं। इसके बाद से उत्तरी गोलार्ध में दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।
* 23 सितंबर: इसे शरद संपात कहते हैं। इसके बाद से ठंड का अहसास बढ़ने लगता है और रातें लंबी होने लगती हैं।

साल की 4 सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय तिथियां
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि कैलेंडर के 365 दिनों में 4 दिन अपनी विशिष्ट स्थिति के कारण पहचाने जाते हैं:
| तिथि | घटना का नाम | विशेषता |
|—|—|—|
| 21 मार्च | वसंत संपात | दिन और रात बराबर (12-12 घंटे) |
| 21 जून | ग्रीष्म संक्रांति | साल का सबसे बड़ा दिन |
| 23 सितंबर | शरद संपात | दिन और रात पुनः बराबर |
| 22 दिसंबर | शीत संक्रांति | साल का सबसे छोटा दिन |
खगोलीय बदलाव का मौसम पर असर
21 मार्च के बाद सूर्य उत्तरायण की अपनी यात्रा के मध्य बिंदु पर होता है। इसके बाद से ही गर्मी का मौसम (ग्रीष्म ऋतु) विधिवत रूप से शुरू हो जाता है। 21 मार्च से 23 सितंबर तक पृथ्वी अपने उत्तरायण पक्ष को 187 दिनों में पूरा करती है, जबकि दक्षिणायन पक्ष को गति तीव्र होने के कारण केवल 178 दिनों में पूरा कर लेती है।
विशेष तथ्य: इक्विनॉक्स के दौरान सूर्य ठीक पूर्व (East) में उगता है और ठीक पश्चिम (West) में अस्त होता है। इस स्थिति में दोपहर के समय छाया (Shadow) की लंबाई भी न्यूनतम होती है।
पृथ्वी की गति का रहस्य
यदि पृथ्वी अपने अक्ष पर नहीं घूमती, तो सूर्य की ओर वाला हिस्सा हमेशा जलता रहता और दूसरा हिस्सा हमेशा अंधेरे और बर्फ में डूबा रहता। पृथ्वी की अपनी धुरी पर घूमने की गति ही जीवन के लिए अनुकूल दिन-रात का चक्र बनाती है। साथ ही, 3 जनवरी को पृथ्वी सूर्य के सबसे करीब होती है, जबकि 4 जुलाई को यह सबसे दूर होती है।







