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Viral News: गामा पहलवान की डाइट का रहस्य: 6 देसी मुर्गे और 10 लीटर दूध कैसे पचाते थे रुस्तम-ए-ज़मां?

Viral News: गामा पहलवान की डाइट का रहस्य: 6 देसी मुर्गे और 10 लीटर दूध कैसे पचाते थे रुस्तम-ए-ज़मां?

Viral News: कुश्ती की दुनिया में ‘गामा पहलवान’ एक ऐसा नाम है, जो ताक़त, अजेयता और एक किंवदंती का पर्याय बन गया है. अमृतसर के जब्बोवाल गांव में 22 मई 1878 को जन्मे ग़ुलाम मोहम्मद बख्श बट, जिन्हें दुनिया ‘गामा पहलवान’ के नाम से जानती है, ने अपने पूरे करियर में एक भी कुश्ती नहीं हारी. 5 फीट 7 इंच लंबे और 133 किलो वज़न वाले गामा पहलवान की ताक़त का लोहा पूरी दुनिया मानती थी, लेकिन उनकी ताक़त का राज़ सिर्फ़ उनकी ट्रेनिंग में नहीं, बल्कि उनकी हैरान कर देने वाली डाइट में भी छिपा था.

क्या थी गामा पहलवान की डाइट?

कहा जाता है कि गामा पहलवान की रोज़ाना की डाइट सुनकर आज भी लोग दांतों तले उंगली दबा लेते हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, वे रोज़ाना लगभग 6 देसी मुर्गे, 7.5 से 10 लीटर दूध, 300 ग्राम बादाम की ठंडाई और घी का सेवन करते थे. यह डाइट आम इंसान के लिए असंभव लग सकती है, लेकिन गामा पहलवान के लिए यह उनकी रोज़ाना की ट्रेनिंग का एक हिस्सा थी.

इतनी भारी-भरकम डाइट कैसे पचाते थे गामा?

यह सवाल हर किसी के ज़हन में आता है कि आखिर गामा पहलवान इतना सारा प्रोटीन और कैलोरी कैसे पचा लेते थे? इसका जवाब सिर्फ़ जादुई नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भी है.

1. सालों की कड़ी मेहनत और बॉडी साइंस:

गामा पहलवान बचपन से ही कुश्ती और पहलवानी की ट्रेनिंग ले रहे थे. सालों की कड़ी मेहनत और वर्कआउट ने उनके शरीर को इस तरह ढाल दिया था कि वह इतनी भारी-भरकम डाइट को पचा सके.

2. हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग और तेज़ मेटाबॉलिज्म:

गामा पहलवान रोज़ाना 5-9 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग करते थे, जिसमें दौड़, दंड-बैठक (बैठक) और अखाड़े में कुश्ती शामिल थी. रिपोर्ट्स के अनुसार, वे रोज़ाना 5000 बैठक और 3000 दंड लगाते थे. इतनी कड़ी मेहनत से उनका मेटाबॉलिज्म बेहद तेज़ हो गया था, जिससे उनका शरीर खाने को जल्दी पचाकर ऊर्जा में बदल देता था.

3. डाइजेस्टिव सिस्टम की क्षमता:

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में पब्लिश हुई एक स्टडी के मुताबिक, हाई प्रोटीन और हाई कैलोरी डाइट जब पूरे दिन में कई बार बांटकर खाई जाए और साथ में काफी अधिक फिजिकल एक्टिविटी की जाए तो डाइजेस्टिव सिस्टम की एंजाइम एक्टिविटी और गैस्ट्रिक कैपेसिटी भी बढ़ सकती है. गामा पहलवान के मामले में भी यही हुआ होगा.

4. मसल्स रिकवरी:

इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ स्पोर्ट न्यूट्रिशन (ISSN) के अनुसार, ज़्यादा मेहनत करने वाले लोगों को मसल्स की रिकवरी के लिए ज़्यादा प्रोटीन की ज़रूरत होती है. गामा की डाइट में भरपूर प्रोटीन था, जो उनकी मसल्स को रिपेयर और मज़बूत बनाने में मदद करता था.

5. प्राकृतिक और अनप्रोसेस्ड चीज़ें:

गामा पहलवान देसी मुर्गा, दूध, घी और बादाम जैसी प्राकृतिक और अनप्रोसेस्ड चीज़ों का सेवन करते थे, जो धीरे-धीरे एनर्जी, अमीनो एसिड और फैट देती थीं. यह पूरे दिन मसल रिपेयर, ताक़त और रिकवरी में फ्यूल की तरह काम करता था.

एक और किंवदंती:

बताया जाता है कि 23 दिसंबर 1902 को सयाजीबाग, बड़ौदा में रखे एक 1200 किलो के पत्थर को गामा पहलवान ने उठा लिया था, जो आज भी वहां रखा हुआ है. यह घटना उनकी अदम्य ताक़त का एक और प्रमाण है.

गामा पहलवान की ताक़त और उनकी डाइट एक ऐसी कहानी है, जो आज भी लोगों को हैरान और प्रेरित करती है. यह साबित करता है कि कड़ी मेहनत, समर्पण और सही खान-पान से नामुमकिन को भी मुमकिन बनाया जा सकता है.

विकास मलिक

विकास मलिक 18 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। विकास मलिक ने इंडिया न्यूज, इंडिया न्यूज़ हरियाणा, साधना न्यूज, एमएचवन न्यूज, खबरें अभी तक, न्यूज नेशन, लीविंग इंडिया न्यूज़ समेत कई बड़े चैनल्स में काम किया है। विकास मलिक अभी जिओ हॉटस्टार में हरियाणावी कमेंट्री में बतौर प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं और साथ में अपनी खुद की वेबसाइट चला रहे है। इनकी कंटेंट से लेकर खेल और राजनीति के साथ हरियाणा पर गहरी पकड़ है।

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