
Palwal News: मुकेश बघेल, ब्यूरो चीफ, पलवल।हिन्दुओं की शक्ति 120 करोड़ लोगों में : सुरेश भैया जी
सब हेड : नदियों, भूमि और पर्यावरण का संरक्षण करना हमारा दायित्व
हथीन : भारत की भूमि संतों और तीर्थों की भूमि है जो विश्व को संस्कार देने वाली है। विश्व सम्मान तब करेगा जब भारत के लोग इस प्रकार का जीवन आचरण करेंगे और विश्व को शांति व मार्गदर्शक प्रदान करने वाला बनेगा। संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश भैया जी जोशी रविवार को हथीन अनाजमंडी में आयोजित हिन्दू सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी जाति, मत, पंथ और संप्रदाय के हम होंगे, लेकिन फिर भी हम सब हिन्दू हैं। हम सबके पूजनीय देवी देवता एक हैं, हम सभी के तीर्थ क्षेत्र एक हैं, हम सबके महापुरुष एक हैं, हम सबके धर्म ग्रंथ एक हैं। तो जब एक हैं तो इन जाति बिरादरियों के भेदभाव को समाप्त करके हम सब को गर्व से कहना है कि हम हिन्दू हैं। जब कहते हैं कि हम हिन्दू तो 120 करोड़ होते हैं और जब हम अपनी जाति – बिरादरियों का नाम लेते हैं तो आठ – दस करोड़ बच जाते हैं। हिन्दुओं की शक्ति 120 करोड़ लोगों में हैं जातियों में नहीं है। हम हिन्दू हैं इस गर्व को लेकर साथ चलेंगें। हिन्दु ही सभ्यता, संस्कृति, जीवन के मूल्य, ईमानदारी और सबको साथ लेकर चलते हैं क्योंकि प्राणी मात्र में ईश्वर को देखते हैं, जिसका हमें गर्व है। अगर बिखरे हुए रहेंगे तो हमारी अच्छी बातें भी कोई सुनने वाला नहीं है। क्योंकि दुर्बलों के वचन कितने ही श्रेष्ठ क्यों न हो उसका कोई सम्मान नही होता है। हिन्दू सम्मेलन की सार्थकता इसी में हैं कि हम किसी भी भेदभाव को महत्त्व नहीं देंगे। क्योंकि भेदभाव के कारण ही कभी हमें पाकिस्तान, चीन और अन्य देश ललकारते हैं और हम डर जाते हैं। आज भी असुरी शक्तियां हैं। हम भारत के लोग दैवीय शक्तियों के प्रतिनिधि करते हैं और असुरों से लड़ाई करनी पड़ेगी। हम किसी को मारने के लिए नहीं जाएंगे। यदि कोई हम पर आक्रमण करता है तो हम अपना सामर्थ और शक्ति दिखा देंगे, तभी तो भारत सुरक्षित रहेगा। इतनी बड़ी भारत की शक्ति है, हमारी श्रेष्ठा है कि हम सभी में ईश्वर को देखते हैं। क्योंकि हम जब मिलते हैं तो एक दूसरे के ह्रदय में स्थापित राम को प्रणाम करते हैं। हम कहते हैं कि विश्व सारा एक परिवार है। विश्व और दुनिया सारी एक, यदि यह सिद्ध करना है तो इससे पहले हम सब एक हैं भारत को ऐसी शक्ति खड़ी करनी पड़ेगी, तब इसकी सार्थकता सिद्ध होगी। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी और राजस्थान से लेकर मणिपुर की पहाड़ियों तक सब लोग वंदेमातरम् और भारत माता की जय करते हैं। यह सब एक हैं जो सब मिलकर एक ही माता को प्रणाम करते हैं और सभी भाई हैं। भारत में पञ्च महाभूतों का वर्णन किया गया है, इन्हें हम भगवान मानते हैं और भारतीय इनकी पूजा करता है। प्रकृति के प्रति हम श्रद्धा का भाव रखते हैं। हमें नदियों, भूमि और पर्यावरण का संरक्षण हमारा दायित्व है। वर्तमान में देशभक्त बनने की आवश्यकता है और अपने देश में बनने वाली वस्तुओं का उपयोग करना है। हमें अपनी भारतीय भाषा को आगे बढ़ाना है। युवाओं को नशे से दूर रहने का संकल्प लेना चाहिए। इस सम्मेलन में हम सब संकल्प लेकर जायेंगें तभी श्रेष्ठ भारत बनेगा और भारत को विश्व के सम्मान के स्थान पर बिठाएं, शक्तिशाली बनायें और न्याय पूर्ण जीवन जीने वाला बनायें और विश्व को साथ लेकर चलना यह भारत ही कर सकता है। सभी लड़ाईयां और हिंसा का आचरण समाप्त होगा ऐसे शांति से संपन्न विश्व का निर्माण भारत को करना है।

मुख्य अतिथि डॉ राधारमन महाराज ने कहा कि हिन्दुओं को अब एक होना होगा। हमें हिंदुत्व के आदर्शों को मानना होगा और संगठित होंगें। भारत धर्म प्रधान देश है। क्योंकि इसी भारत की धरती पर भगवानों ने अवतार लिया है, अन्य किसी देश में नहीं। भारत को हिन्दू की उच्च पराकाष्ठ पर बैठाना है। संघ संस्थापक डॉ केशवराव हेडगेवार के परिश्रम और संकल्प का ही नतीजा जो आज गलियों और गांवों में स्वयंसेवको के दर्शन होते हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके हुआ। कार्यक्रम के अध्यक्ष अमरदास महाराज ने मुख्य वक्ता को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में भारी संख्या में क्षेत्र के विशिष्ठ जन, महिला शक्ति, युवा और बच्चे उपस्थित रहे।







