HARYANA
Narnaund News: नारनौंद में उपमंडलीय न्यायालय का हुआ शुभारंभ, 21 करोड़ से अधिक की धनराशि से उपमंडलीय न्यायिक परिसर का होगा निर्माण
Narnaund News: नारनौंद में उपमंडलीय न्यायालय का हुआ शुभारंभ, 21 करोड़ से अधिक की धनराशि से उपमंडलीय न्यायिक परिसर का होगा निर्माण

Narnaund News: दीपक गिरधर, ब्यूरो चीफ, नारनौंद। देश के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि हांसी में शीघ्र ही सेशन डिवीजन स्थापित की जाएगी। हांसी को प्रदेश का 23वां जिला बनाने के बाद यहां हांसी वासियों के लिए एक और सुविधा होगी। आमजन को न्याय पहुंचाने की दिशा में यह डिवीजन महत्वपूर्ण साबित होगी।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत नारनौंद स्थित उपमंडल न्यायिक परिसर में नारनौंद उपमंडल न्यायालय के शुभारंभ तथा उपमंडल न्यायिक परिसर के शिलान्यास के उपरांत उपस्थित न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं तथा गणमान्य नागरिकों को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि नारनौंद में उपमंडलीय न्यायालय की स्थापना होना हर्ष का विषय है। उन्होंने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे न्याय को हर गरीब व्यक्ति के द्वार तक लेकर जाएंगे। संविधान में सभी को एक समान रूप से न्याय प्राप्त करने का अधिकार दिया है। न्यायपालिका द्वारा गरीब लोगों तक सुलभ न्याय देने के लिए कार्य किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं को आह्वान करते हुए कहा कि न्याय के प्रति आस्था को और अधिक मजबूत रखते हुए समय पर न्याय पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अधिवक्ता न्याय के सजग प्रहरी के तौर पर कार्य करते हुए बार के एथिक्स को याद रखें। विकास के साथ तकनीकी युग में अधिवक्ता स्वयं को तकनीकी ज्ञान से युक्त करें तथा न्यायपालिका में हो रहे विकास से स्वयं का अपडेट रखें।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक अधिकारी व अधिवक्ता सकारात्मक सोच के साथ लंबित मामलों को निपटाए।
गौरतलब है कि उपमंडलीय न्यायिक परिसर पर 21 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च की जाएगी। इस न्यायिक न्यायालय परिसर का निर्माण 7255.30 वर्ग मीटर अथवा 1.79 एकड़ में किया जाएगा। न्यायिक न्यायालय परिसर में भू-तल, प्रथम तल तथा द्वितीय तल पर विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। भू-तल पर न्यायालय कक्ष, साक्षी कक्ष व अन्य कक्ष, प्रथम तल पर फैमिली कोर्ट, मध्यस्था कक्ष आदि तथा द्वितीय तल पर ममटी एवं मशीन रूम का निर्माण होगा।
नारनौंद बार एसोसिएशन की ओर से मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू व हरियाणा के जनस्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हरसिमरन सिंह सेठी, हिसार डिवीजन की प्रशासनिक न्यायाधीश अलका सरीन, हिसार की जिला एवं सत्र न्यायाधीश अलका मलिक, सहकारिता मंत्री डॉ अरविंद शर्मा, सफीदों विधायक रामकुमार गौतम, स्थानीय विधायक जस्सी पेटवाड़, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जरनल चंद्रशेखर, हांसी के उपायुक्त राहुल नरवाल, पुलिस अधीक्षक अमित यशवर्धन, एसडीएम विकास यादव, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गगनदीप मित्तल, सीजेएम अशोक कुमार, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश, उपाध्यक्ष सुशील शर्मा, सचिव सुनिल पनिहार, संयुक्त सचिव जितेंद्र खरब, लाईब्रेरियन अमन ढांडा सहित हांसी व नारनौंद बार एसोसिएशन के अधिवक्ता व सबंधित न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत नारनौंद स्थित उपमंडल न्यायिक परिसर में नारनौंद उपमंडल न्यायालय के शुभारंभ तथा उपमंडल न्यायिक परिसर के शिलान्यास के उपरांत उपस्थित न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं तथा गणमान्य नागरिकों को बतौर मुख्यातिथि संबोधित कर रहे थे। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि नारनौंद में उपमंडलीय न्यायालय की स्थापना होना हर्ष का विषय है। उन्होंने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे न्याय को हर गरीब व्यक्ति के द्वार तक लेकर जाएंगे। संविधान में सभी को एक समान रूप से न्याय प्राप्त करने का अधिकार दिया है। न्यायपालिका द्वारा गरीब लोगों तक सुलभ न्याय देने के लिए कार्य किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने न्यायिक अधिकारियों एवं अधिवक्ताओं को आह्वान करते हुए कहा कि न्याय के प्रति आस्था को और अधिक मजबूत रखते हुए समय पर न्याय पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अधिवक्ता न्याय के सजग प्रहरी के तौर पर कार्य करते हुए बार के एथिक्स को याद रखें। विकास के साथ तकनीकी युग में अधिवक्ता स्वयं को तकनीकी ज्ञान से युक्त करें तथा न्यायपालिका में हो रहे विकास से स्वयं का अपडेट रखें।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक अधिकारी व अधिवक्ता सकारात्मक सोच के साथ लंबित मामलों को निपटाए।
गौरतलब है कि उपमंडलीय न्यायिक परिसर पर 21 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि खर्च की जाएगी। इस न्यायिक न्यायालय परिसर का निर्माण 7255.30 वर्ग मीटर अथवा 1.79 एकड़ में किया जाएगा। न्यायिक न्यायालय परिसर में भू-तल, प्रथम तल तथा द्वितीय तल पर विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। भू-तल पर न्यायालय कक्ष, साक्षी कक्ष व अन्य कक्ष, प्रथम तल पर फैमिली कोर्ट, मध्यस्था कक्ष आदि तथा द्वितीय तल पर ममटी एवं मशीन रूम का निर्माण होगा।
नारनौंद बार एसोसिएशन की ओर से मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू व हरियाणा के जनस्वास्थ्य मंत्री रणबीर गंगवा को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हरसिमरन सिंह सेठी, हिसार डिवीजन की प्रशासनिक न्यायाधीश अलका सरीन, हिसार की जिला एवं सत्र न्यायाधीश अलका मलिक, सहकारिता मंत्री डॉ अरविंद शर्मा, सफीदों विधायक रामकुमार गौतम, स्थानीय विधायक जस्सी पेटवाड़, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जरनल चंद्रशेखर, हांसी के उपायुक्त राहुल नरवाल, पुलिस अधीक्षक अमित यशवर्धन, एसडीएम विकास यादव, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गगनदीप मित्तल, सीजेएम अशोक कुमार, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश, उपाध्यक्ष सुशील शर्मा, सचिव सुनिल पनिहार, संयुक्त सचिव जितेंद्र खरब, लाईब्रेरियन अमन ढांडा सहित हांसी व नारनौंद बार एसोसिएशन के अधिवक्ता व सबंधित न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।

CJI बनने के बाद जस्टिस सूर्यकांत पैतृक गांव पेटवाड़ पहुंचे। दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन खुली जीप में सवार होकर नारनौंद में पैतृक गांव पेटवाड़ पहुंचे। यहां उनके सम्मान में एक समारोह रखा गया था। उनके साथ कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, कैबिनेट मंत्री अरविंद शर्मा, कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा, हरियाणा के शिक्षा मंत्री, नारनौंद से कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़,सफीदो से विधायक रामकुमार गौतम भी भी मौजूद रहे। यहां CJI ने कहा- “मुझे अपने इंग्लिश के टीचर मदनखेड़ी गांव निवासी मास्टर प्रेम सिंह जी आज भी याद हैं। उन्होंने कुछ बच्चों को चुना ताकि मैट्रिक (10वीं) एग्जाम में गांव का रिजल्ट अच्छा आए। हम धान की पराली बिछाकर स्कूल के बड़े कमरे में सोते थे और रात 11-12 बजे तक मास्टर जी हमें पढ़ाते थे। यह केवल पढ़ाई नहीं थी, यह एक मां-बाप जैसी तपस्या थी।
सीजेआई सूर्यकांत ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि जब भी ऐसे मंच पर आता हूं तो यह दुविधा स्वाभाविक है क्या यहां से क्या बोलूं ,क्या न बोलूं। गांव की मिट्टी से शुरू से जुड़ा हूं। इसी गाँव के स्कूल से एग्जाम पास किया, जैसा भी उस समय विकास की स्थिति रही, फिर भी गांव पढ़ाई के मामले में बहुत आगे था, जहां प्राथमिक स्कूल और छात्राओं के लिए भी स्कूल था। स्कूल में कई बार टीचर नहीं होते थे तो बहुत परेशानी होती थी, कई महीने तक ट्रांसफर हुए टीचर की जगह कोई दूसरे टीचर नहीं आते थे। हम नीचे बैठकर पढ़ते थे, स्कूल में गांव मदन हेड़ी के एक टीचर होते थे, जिन्होंने बच्चों को परखा। उन्होंने पूरी क्लास में से बच्चों को अलग छांटा और स्कूल में रात के समय भी रुकते थे। वे नीचे धान की पराली बिछा कर सोते थे, उन्हें इसके लिए कोई एक्स्ट्रा रुपए नहीं मिलते थे फिर भी वे हमे पढ़ाते थे।
ग्रामीणों ने सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत के सामने कई मांग रखी। बस स्टैंड के पास खाली पड़ी जमीन पर सामुदायिक स्वास्थ केंद्र बनाया जाए। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पेटवाड़ के जर्जर भवन को हटाकर नए भवन का निर्माण कराया जाए। गांव की खाली पड़ी पंचायती जमीन पर हर्बल पार्क बनवाया जाए। ई-लाइब्रेरी का निर्माण किया जाए।पंचायती भूमि पर गांव के लिए अलग से 33 केवी का सब स्टेशन स्थापित किया जाए। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सोलर पैनल लगाया जाए।गांव में सहकारी समिति के लिए खाद गोदाम बनाया जाए। जस्टिस सूर्यकांत ने सरकार की तरफ से पहुंचे कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा को कहा की गांव ये मांगे जल्द पूरी होनी चाहिए। जिस पर कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा की जल्द ही पेटवाड़ गांव की ये मागे पूरी होगी।
कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि भारत गांवों में बसता है और जब गांव जागता है, जब गांव की मिट्टी की खुशबू फैलती है, तभी जस्टिस सूर्यकांत जैसे व्यक्तित्व जन्म लेते हैं। जो एक दिन देश की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश बनते हैं। आज मैं इस गांव को भी धन्य मानता हूं, जिसकी गोद में जस्टिस सूर्यकांत जी जैसे सपूत ने जन्म लिया। आज जब भारत के मुख्य न्यायाधीश अपने गांव में लौटे हैं और गांव के लोग उनका स्वागत कर रहे हैं। तो मैं पूरे गांव का अभिनंदन करता हूं, सम्मान करता हूं और धन्यवाद देता हूं। कानून मंत्री ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि बड़ा आदमी बनकर कुछ लोग अपनी मिट्टी भूल जाते हैं, लेकिन जस्टिस साहब ने मुख्य न्यायाधीश बनने के बाद भी अपने गांव के स्कूल की फर्श देखी, अपने शिक्षकों से मिले, और पूछा इस स्कूल को बेहतर कैसे बनाया जाए? आज भी उन्होंने मुझसे कहा, अगर मेरे स्कूल के लिए कोई अच्छी योजना हो तो बताइए। मैंने उनसे कहा पीएम श्री स्कूल योजना इस गांव के लिए बिल्कुल उपयुक्त है। और मुझे पूरा विश्वास है यह स्कूल इस योजना में जरूर आएगा।





