Kartikeya Sharma: राज्यसभा में सांसद कार्तिकेय शर्मा ने ‘क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर (रेज़िलिएंस, प्रोटेक्शन और अकाउंटेबिलिटी) विधेयक, 2026’ प्रस्तुत किया
Kartikeya Sharma: राज्यसभा में सांसद कार्तिकेय शर्मा ने ‘क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर (रेज़िलिएंस, प्रोटेक्शन और अकाउंटेबिलिटी) विधेयक, 2026’ प्रस्तुत किया

Kartikeya Sharma: देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, विश्वसनीयता और नागरिकों की जान की रक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम विधायी पहल करते हुए, राज्यसभा सांसद श्री कार्तिकेय शर्मा ने क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर (रेज़िलिएंस, प्रोटेक्शन और अकाउंटेबिलिटी) विधेयक, 2026 राज्यसभा में प्रस्तुत किया है।
यह विधेयक उन बार-बार सामने आने वाली घटनाओं की पृष्ठभूमि में लाया गया है, जहाँ पुल, सड़कें, इमारतें या अन्य सार्वजनिक संरचनाएँ विफल होती हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय होने से पहले ही मामला कागज़ी कार्यवाही और अनुबंधों में उलझकर समाप्त हो जाता है।
इस विधेयक का उद्देश्य स्पष्ट है –
यदि बुनियादी ढांचे की लापरवाही से जान जाती है, तो उसे महज़ तकनीकी चूक नहीं, बल्कि गंभीर अपराध माना जाए।
बुनियादी ढांचे की सुरक्षा: अब केवल अनुबंध नहीं, ज़िम्मेदारी
प्रस्तावित कानून देश के रणनीतिक और जीवन-संबंधी बुनियादी ढांचे की स्पष्ट पहचान और वर्गीकरण करता है, जैसे बाँध, एक्सप्रेसवे, बिजली ग्रिड, बंदरगाह, रक्षा और शहरी सेवाओं से जुड़ी परियोजनाएँ।
विधेयक के तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्माण, संचालन और रखरखाव से जुड़े सभी पक्ष – ठेकेदार, उप-ठेकेदार, कंसल्टेंट, वेंडर और टेक्नोलॉजी प्रदाता — अपनी जिम्मेदारी से बच न सकें।

तकनीक के ज़रिए निगरानी और समय से पहले चेतावनी
विधेयक में आधुनिक तकनीकी उपायों को अनिवार्य किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
डिजिटल ट्विन अनिवार्यता
प्रत्येक महत्वपूर्ण भौतिक बुनियादी ढांचे का एक डिजिटल मॉडल, जिससे उसकी संरचनात्मक स्थिति की रियल-टाइम निगरानी हो सके।
नेशनल रियल-टाइम मॉनिटरिंग डैशबोर्ड
एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म, जहाँ सभी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की स्थिति की निगरानी कर संभावित जोखिमों की पहले पहचान की जा सके।
इन उपायों का उद्देश्य दुर्घटना के बाद कार्रवाई नहीं, बल्कि दुर्घटना से पहले रोकथाम है।
जवाबदेही का स्पष्ट और सख़्त ढांचा
विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि यदि बुनियादी ढांचे की विफलता से जनहानि होती है और यह लापरवाही, खराब निर्माण या डिज़ाइन दोष के कारण होती है, तो उसे कॉरपोरेट मैनस्लॉटर माना जाएगा।
ऐसे मामलों में:
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दोषी पक्षों के लिए कठोर कारावास का प्रावधान
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वरिष्ठ प्रबंधन और निदेशक मंडल की व्यक्तिगत जिम्मेदारी
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गंभीर मामलों में व्यक्तिगत संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने की शक्ति
साथ ही, दोष दायित्व अवधि को 25 वर्ष तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है, ताकि परियोजना सौंपने के बाद भी जिम्मेदारी समाप्त न हो।
नागरिक सुरक्षा सर्वोपरि
श्री कार्तिकेय शर्मा ने कहा,
“बुनियादी ढांचा केवल कंक्रीट और स्टील नहीं है, यह करोड़ों नागरिकों की रोज़मर्रा की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। जब लापरवाही से जान जाती है, तो जवाबदेही तय होना ही चाहिए।”
यह विधेयक एक ऐसी प्रणाली स्थापित करने का प्रयास करता है, जहाँ सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता करने की कोई गुंजाइश न रहे और राष्ट्र की संपत्तियों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले।
भरोसेमंद ढांचा, मजबूत राष्ट्र
इस विधेयक के माध्यम से भारत में बुनियादी ढांचे के निर्माण की सोच को केवल तेज़ी से निर्माण से आगे बढ़ाकर गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही की दिशा में ले जाने का प्रयास किया गया है।
नागरिकों का भरोसा तभी बनेगा, जब जो बनाया जाए वह सुरक्षित हो, टिकाऊ हो और उसके लिए जिम्मेदार लोग उत्तरदायी हों।







