
INLD NEWS: यह बजट दिखावे मात्र का बजट है जिसके नाम बड़े और दर्शन छोटे हैं: अभय सिंह चौटाला
इस बजट में न तो आम आदमी के लिए महंगाई दूर करने की, न ही युवाओं के लिए बेरोजगारी दूर करने की और न ही किसानों को उसकी फसलों पर एमएसपी देने की कोई योजना बनाई गई है
चंडीगढ़, 2 मार्च। इनेलो के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव चौ. अभय सिंह चौटाला ने प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए बजट को केवल मात्र आंकड़ों की बाजीगरी बताते हुए कहा कि प्रदेश का कुल बजट 2 लाख 23 हजार 658 करोड़ रूपए रखा गया है जो कि पिछले वर्ष के मुकाबले 18 हजार करोड़ रूपए बढ़ाया गया है जबकि कर्ज में जो प्रस्तावित बढ़ोतरी है वो 40 हजार करोड़ रूपए है। इस वर्ष कर्ज की राशि लगभग 4 लाख 30 हजार करोड़ रूपए पार कर जाएगी। बीजेपी सरकार पिछले ग्यारह सालों से प्रदेश के उपर लगातार भारी कर्ज बढ़ाती जा रही है। आज स्थिति यह हो गई है कि प्रदेश में पैदा होने वाला हर बच्चा अपने सिर पर लगभग सवा लाख रूपए से अधिक का कर्ज लेकर पैदा होता है। सरकार प्रदेश के उपर चढ़े कर्ज पर स्वेत पत्र जारी करे। कुल बजट की लगभग 30 प्रतिशत राशि जो कि भारी भरकम 65,670 करोड़ रूपए बनती है वो कर्ज और ब्याज अदायगी में चली जाएगी। इसके अलावा कुल बजट से अगर कर्मचारियों की वेतन तथा पेंशन का खर्च निकाल दें तो नाम मात्र धनराशि प्रदेश के विकास कार्यों के लिए बचेगी। उन्होंने कहा कि बजट में बड़ी बड़ी डींगे हांकी गई हैं। एक ट्रिलियन जीडीपी का आंकड़ा हासिल करने की बात करना प्रदेश के लोगों की आंखों में धूल झोंकना है। प्रदेश में बढ़ती बेरोजगारी इस बात की सूचक है कि मांग तथा खपत में बराबर गिरावट आएगी।

जिन मदों में बढ़ोतरी की गई है वो उंट के मुंह में जीरे के समान है। आर्थिक सेवाओं के मद में जो प्रावधान रखा गया है वो राशि 0.52 प्रतिशत कम है जिससे ग्रामीण विकास व पंचायत सेवाओं में कोई सुधार नहीं आएगा। ऊर्जा के मद में 26 प्रतिशत की कटौती की गई है, इससे भी सरकार की प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र में विकास गति को मजबूत करने की मंशा पर सवालिया निशान खड़ा करता है।
हर साल एसवाईएल का बजट भी रखा जाता था लेकिन इस बार पंजाब के चुनावों को देखते हुए उसे भी खत्म कर दिया गया है। इसे हरियाणा के लोग भूलेंगे नहीं क्योंकि एसवाईएल हरियाणा के लोगों की जीवन रेखा है।
इस बजट में किसानों की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। प्रस्तावित बजट में किसानों की स्थिति सुधारने की दशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। किसानों को राहत देने के लिए कर्ज माफी की कोई बात नहीं की गई और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य की कोई बात रखी गई है। कुल मिला कर यह बजट दिखावे मात्र का बजट है जिसके नाम बड़े और दर्शन छोटे हैं।







