
Haryana Rajyasabha Election Result: राज्यसभा चुनाव में हरियाणा की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब सत्तारूढ़ बीजेपी के एक विधायक की गलती कांग्रेस के लिए जीत का रास्ता खोल गई। यह मामला राज्यसभा चुनाव के दौरान सामने आया, जिसने पूरे राजनीतिक समीकरण को बदल दिया।
क्या हुआ पूरा मामला?
फरीदाबाद NIT से बीजेपी विधायक सतीश फागना का वोट तकनीकी कारणों से अमान्य (रद्द) हो गया। यही एक गलती बीजेपी के लिए भारी पड़ गई और कांग्रेस उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित हो गई।
अब चुनाव का पूरा गणित समझिए
कुल विधायक: 90
वोटिंग करने वाले: 88 (इनेलो के 2 विधायक अनुपस्थित)
वैध वोट: 83
अमान्य वोट: 5
कोटा (जीत के लिए जरूरी वोट वैल्यू)
83 × 100 / 3 + 1 = 2767

किसे कितने वोट मिले?
✅ बीजेपी उम्मीदवार: संजय भाटिया
वोट: 39
कुल वैल्यू: 3900
सरप्लस वोट: 1133
कांग्रेस उम्मीदवार: करमवीर सिंह बौद्ध
वोट: 28
कुल वैल्यू: 2800
निर्दलीय (BJP समर्थित): सतीश नांदल
वोट: 16
कुल वैल्यू: 1600
कैसे पलटा खेल?
संजय भाटिया के 1133 सरप्लस वोट नांदल को ट्रांसफर हुए, लेकिन इसके बाद भी उनकी कुल वैल्यू सिर्फ 2733 ही बन पाई।
यह आंकड़ा कांग्रेस के 2800 से कम था।
नतीजा: कांग्रेस उम्मीदवार करमवीर सिंह बौद्ध जीत गए

बड़ा सवाल अगर सतीश फागना का वोट रद्द न होता, तो क्या नतीजा अलग होता?
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि एक वोट ने पूरा खेल बदल दिया और बीजेपी को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
हरियाणा राज्यसभा चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राजनीति में हर एक वोट की कीमत होती है। एक छोटी सी चूक भी सत्ता का समीकरण बदल सकती है।
कौन हैं सतीश फागना ?
एनआईटी में नए सूरमा सतीश कुमार फागना ने पहली बार कमल खिलाया है। सतीश कुमार फागना ने कुल 91992 वोट लेकर 33217 मतों से जीत हासिल की है।
उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज नीरज शर्मा तथा इनेलो-बसपा गठबंधन प्रत्याशी नगेंद्र भड़ाना को मात दी है। नीरज शर्मा 2019 से यहां से विधायक रहे हैं। वर्तमान में संघर्षशील नेता के रूप में उनकी अपनी अलग पहचान है।
2009 में उनके पिता पंडित शिवचरण लाल शर्मा निर्दलीय चुनाव जीत कर विधायक बने थे। तब हुड्डा सरकार में उन्हें श्रम मंत्री बनाया गया था। 2014 में एनआइटी से नगेंद्र भड़ाना विधायक थे। अब एनआईटी से भाजपा के सतीश कुमार फागना ने पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
सतीश कुमार का पूरा परिवार राजनीति में रहा है
सतीश कुमार फागना के पिता चौ. जिले सिंह वरिष्ठ उप महापौर रहे हैं। इनके भाई कविंद्र चौधरी भाजपा मंडल अध्यक्ष हैं और भाभी ममता चौधरी निवर्तमान पार्षद हैं। एनआईटी में ऐसा पहली बार हुआ है जबकि यहां के मतदाताओं ने भाजपा पर विश्वास जताया ।
इस सीट को जानें:
हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में फरीदाबाद एनआईटी भी शामिल है। यह क्षेत्र फरीदाबाद जिले का हिस्सा होने के साथ ही फरीदाबाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा भी है। फरीदाबाद जिले का दायरा बढ़ने पर चुनाव आयोग की सिफारिशों के बाद इस विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया। गठन के बाद 2009 में यहां पहली बार विधासभा सीट के चुनाव कराए गए। तब निर्दलीय प्रत्याशी पंडित शिव चरण लाल शर्मा ने कांग्रेस के कद्दावर प्रत्याशी को हरा दिया।
इसके बाद 2014 के चुनाव में यहां से आईएनएलडी के नेता नागेंद्र भड़ाना ने तत्कालीन विधायक पंडित शिव चरन लाल शर्मा को शिकस्त देकर विधायक बने। 2019 में इस सीट पर कांग्रेस के नीरज शर्मा विजयी रहे उन्होंने भाजपा के नागेंद्र भड़ाना को हराकर जीत हासिल की। इस क्षेत्र को फरीदाबाद न्यू इंडस्ट्रियल टाउनशिप के नाम से भी जाना जाता है। इस इलाके में बड़ी संख्या में विभिन्न कंपनियों के कारखाने हैं।







