
Haryana News: चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में प्रस्तावित कलेक्टर रेट में 15% से 75% तक की भारी बढ़ोतरी को जनविरोधी और असंवेदनशील फैसला बताया है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ पहले से ही महंगाई की मार झेल रही जनता परेशान है, वहीं दूसरी तरफ सरकार इस कठिन समय में राहत देने के बजाय कलेक्टर रेट में भारी वृद्धि कर आमजन की कमर तोड़ने का काम कर रही है। इससे जमीन, मकान और रजिस्ट्री से जुड़े सभी खर्चों में सीधा इजाफा होगा, जिसका असर आम आदमी और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा।

डॉ. गुप्ता ने यह भी सवाल उठाया कि 28 मार्च को दोपहर बाद जिलों की वेबसाइट पर प्रस्तावित रेट अपलोड किए गए और आपत्तियां व सुझाव देने के लिए 30 मार्च दोपहर 3 बजे तक का ही समय दिया गया है, जिसमें 29 मार्च को रविवार की छुट्टी भी शामिल है। ऐसे में आम जनता को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा, जो सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आम आदमी पार्टी मांग करती है कि जनता को कम से कम 30 दोनों का समय शिकायतें, सुझाव हुए आपत्ति के लिए दिया जाए और इसके साथ-साथ अखबारों व अन्य माध्यम से जनता को इन असामान्य बढ़ोतरी के बारे में जागरूक किया जाए। क्योंकि डेढ़ दिनों का समय सरकार की केवल खानापूर्ति है और असामान्य कलेक्टर रेट को भोली-भाली जनता पर चोरी छूपे थोपने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि जिला हिसार, अम्बाला व रेवाड़ी सहित हरियाणा के लगभग सभी जिलों में प्रशासन द्वारा आमजन से कलेक्टर रेट पर शिकायत और सुझाव मांगे गए हैं, सुशील गुप्ता ने कहा कि हरियाणा की भाजपा सरकार कलेक्टर रेट बढाने के लिए इतनी लालायित क्यों है। क्या जनहितों को नकारकर किसी बड़े मंत्री को नाजायज रुप से फायदा पहुंचाने की कोई मंशा तो नहीं है। अम्बाला कैंट में आवासीय प्लाट 1597% तक बढ़ाने का प्रस्ताव जनता की समझ से परे है। रेवाड़ी में कृषि भूमि और आवासीय भूमि के कलेक्टर रेट में 75% तक बढोत्तरी सरकार द्वारा जनता पर अनावश्यक रूप बोझ डालना है। इसके अलावा भी फरीदाबाद व गुरुग्राम में भी जमीन के कलेक्टर रेट में 75% तक बढोत्तरी की गई है।
आम आदमी पार्टी मांग करती है कि वर्तमान समय में हरियाणा के लोग एलपीजी गैस की भारी किल्लत, किसानों के लिए डीजल की भारी कमी के साथ-साथ कई जिलों में पेट्रोल पैम्पों पर तेल नहीं होने के अनिश्चित और भय के माहौल को देखते हुए सरकार इस फैसले पर तुरंत रोक लगाए और जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के बजाय राहत देने के उपाय करे। साथ ही, आपत्ति और सुझाव देने की समयसीमा बढ़ाई जाए ताकि अधिक से अधिक लोग अपनी राय दे सकें।
डॉ. सुशील गुप्ता ने अंत में कहा कि सरकार को अपना खजाना भरने के बजाय जनता के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए और इस जनविरोधी निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए
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