
Haryana News: हरियाणा की 17 मार्च 2026 की अब तक की बड़ी खबरें, जानिए सीएम ने विधानसभा में क्या कहा?
अगली पीढ़ी की चिंता में हम नॉन स्टॉप 4 गुणी गति से काम कर रहे हैं: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
बजट सत्र में विपक्षियों द्वारा उठाए गए सवालों का मुख्यमंत्री ने दिया जवाब
नई दिल्ली,17 मार्च – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सच्चा नेतृत्व वहीं होता है जो केवल आज की राजनीति नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का भी ख्याल रखता है। पेश किए गए बजट में हमारा लक्ष्य है वर्ष 2047 से पहले विकसित हरियाणा बने। जो बच्चे वर्ष 2026-27 में पैदा होंगे, वर्ष 2047 में वे 21 साल के होंगे तथा विकसित हरियाणा में होंगे। यह हमारा संकल्प है। और उसी अगली पीढ़ी की चिंता में हम नॉन स्टॉप 4 गुणी गति से काम कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या कभी कांग्रेस के किसी वित्त मंत्री ने किसी भी बजट में आने वाले दो साल की भी बात की?
मुख्यमंत्री हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र में अपनी बात रख रहे थे। उन्होंने इस बीच विपक्ष के बजट को शब्दों और आंकड़ों का मकड़जाल के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने वर्ष 2047 तक एक विकसित हरियाणा की परिकल्पना की है। इसलिए हमारे सभी बजट प्रावधान केवल तात्कालिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि हरियाणा की आने वाली पीढ़ियों के सशक्त व सुनहरे भविष्य के लिए हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्षी नेता फाइव स्टार होटल और एयर कंडीशन स्थानों पर ही जाते है। लगता है ये चौपालों का महत्व और रास्तों को भूल गये हैं इसलिए उनके रखरखाव के लिए पंचायतों को पैसे देने के उनके ऐतिहासिक प्रस्ताव पर आपत्ति कर रहे हैं।
बेरोजगारी पर पर उठाए सवालों पर भी दिया जवाब
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने विपक्षियों द्वारा प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ने के संबंध में लगाए गए आरोपों पर कहा कि विपक्षियों को बजट में नौकरी शब्द ही नहीं दिखाई दिया। बजट में कुल 15 बार नौकरी व रोजगार शब्द का उपयोग हुआ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विपक्षी नेता ने सी.एम.आई.ई. रिपोर्ट का जो आंकड़ा बताया है, ऐसा कोई आंकड़ा संस्था की वेबसाइट पर उपलब्ध ही नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार के “सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय” द्वारा अक्तूबर से दिसम्बर 2025 तक की अवधि के करवाये गये नवीनतम आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के अनुसार संपूर्ण हरियाणा में बेरोजगारी दर 5.0 प्रतिशत बताई गई है जो कि पड़ोसी राज्यों पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में बेरोजगारी की दर 7.2 प्रतिशत, पंजाब में 7 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रदेश में बेरोजगारी हटाने के ठोस प्रयास किए हैं। वर्ष 2014 से अब तक 1 लाख 72 हजार 774 युवाओं को योग्यता के आधार सरकारी नौकरियां दी गई हैं।
प्रति व्यक्ति आय पर भी दिया जवाब:
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष के नेताओं द्वारा राज्य की प्रति व्यक्ति आय को लेकर उठाए गए सवालों पर भी जवाब दिया गया। उन्होंने कहा कि विपक्षियों ने कहा कि प्रति व्यक्ति आय 3 लाख 95 हजार रुपये बताई जा रही है। वहीं, परिवार पहचान पत्र के आंकड़ों के अनुसार बड़ी संख्या में परिवारों की आय 1 लाख 80 हजार रुपये से कम है। उन्होंने कहा कि इन दोनों बातों को एक-दूसरे से जोड़कर प्रस्तुत करना अर्थशास्त्र की उतनी भी समझ न होना दर्शाता है, जो आजकल एक 12वीं कक्षा के विद्यार्थी को भी होती है।मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया के किसी भी देश, चाहे वह अमेरिका हो या न्यूजीलैंड या देश के किसी भी प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय निकालने का एक और केवल एक ही तरीका है कि उस राज्य या देश की GDP को उसकी कुल जनसंख्या से विभाजित किया जाए। जो आंकड़ा आए, वह उस राज्य या देश की प्रति व्यक्ति आय कही जाती है। इसी मानक पद्धति के आधार पर हरियाणा की प्रति व्यक्ति आय लगभग 3 लाख 95 हजार रुपये है। यह कोई मनमाना आंकड़ा नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष स्वयं अपने आंकड़ों में एकरूपता नहीं रख पा रहा है। कोई कहता है कि 51 लाख से अधिक परिवारों की आय 1 लाख 80 हजार रुपये से कम है। कोई कहता है कि 60 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे है।
लाडो लक्ष्मी का बजट पर भी दिया जवाब:
विपक्षी नेताओं द्वारा दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के बजट को कम होने संबंधित लगाए गए आरोपों पर भी मुख्यमंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्षियों के अनुसार प्रदेश में 18 से 60 वर्ष की आयु की महिलाओं की संख्या 82 लाख 50 हजार है। इनके लिए 2,100 रुपये प्रति माह दिया जाए, तो बजट लगभग सालाना 20 हजार करोड़ रुपये बनता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिना लाडो लक्ष्मी योजना के भी 18 से 60 वर्ष आयु की 34 लाख 27 हजार 993 महिलाएं 3200 रुपये सहायता या तो वृद्धावस्था सम्मान भत्ता या विधवा पेंशन या अविवाहित पेंशन या दिव्यांग इत्यादि ले रही हैं। इनके घर हम 100 बार भी जाएंगे, तो यह लाडो लक्ष्मी का लाभ नहीं लेंगी, क्योंकि वे 3200 रुपये का लाभ क्यों छोड़ेंगी? इन 34 लाख महिलाओं के लिए विपक्षी नेतागण क्यों बजट प्रावधान रखना चाहते हैं ?
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने लाडो लक्ष्मी योजना का लाभ लेने के लिए इसके पोर्टल पर पंजीकरण की व्यवस्था की है। जो महिलाएं पंजीकरण करवाती हैं, उनकी पात्रता की जांच की जाती है। पात्र पाने पर उन्हें 2,100 रुपये मासिक लाभ दिया जाता है। अब तक 9 लाख 56 हजार 95 महिलाएं पात्र पाई गई हैं। इनके बैंक खातों में अब तक 5 किस्तों में 834 करोड़ 77 लाख रुपये की राशि जारी की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार की गारंटी है कि 6 हजार 500 करोड रुपये का किया गया प्रावधान यदि कम पड़ जाएगा तो सप्लीमेंट्री बजट में जितनी भी जरूरत होगी, वह पूरी कर दी जाएगी।
अपराध संबंधित लगाए गए आरोपों पर भी दिया जवाब:
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस विधायक दल के नेता श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा अपराध को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल अधूरी जानकारी प्रस्तुत करके प्रदेश की छवि को धूमिल करने का प्रयास करना सदन की गरिमा के अनुकूल नहीं होता। एन.सी.आर.बी. द्वारा जो आंकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं, वे केवल वार्षिक अपराधों की संख्या से संबंधित होते हैं। एन.सी.आर.बी. कहीं भी यह नहीं बताता कि कोई राज्य ‘सबसे खतरनाक’ है या ‘सबसे सुरक्षित’। इसलिए यह कहना कि हरियाणा देश के 10 सबसे खतरनाक राज्यों में शामिल है, पूरी तरह भ्रामक और अनुचित है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हरियाणा को सुरक्षित, मजबूत और कानून के राज वाला प्रदेश बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। आंकड़े भी यही बता रहे हैं कि पिछले वर्षों में अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
शिक्षा पर कुल बजट का 8 प्रतिशत खर्च – मुख्यमंत्री
शिक्षा भविष्य निर्माण का सबसे बड़ा साधन
नई दिल्ली, 17 मार्च- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए केवल स्कूल शिक्षा विभाग के लिए ही 18 हजार 717 करोड़ 89 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जो राज्य के कुल बजट 2 लाख 23 हजार 658 करोड़ 17 लाख रुपये का लगभग 8.37 प्रतिशत है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सदन में बजट पर चर्चा के दौरान सदस्य श्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और श्री आफताब अहमद द्वारा उठाए गए प्रश्न पर जवाब दे रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षा पर जी.डी.पी. का लगभग 6 प्रतिशत व्यय होना चाहिए। जबकि, राज्य के बजट में यह लगभग 1.9 प्रतिशत बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा पर जी.डी.पी. के 6 प्रतिशत खर्च का लक्ष्य कोई नया प्रावधान नहीं है। यह लक्ष्य सर्वप्रथम कोठारी आयोग की सिफारिशों के आधार पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1968 में रखा गया था। बाद में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 तथा 1992 की समीक्षा में भी इसे दोहराया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के भाग-प्ट की मद 26.1 और 26.2 में भी यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा में निवेश बढ़ाकर जी.डी.पी. के 6 प्रतिशत तक पहुंचने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर प्रयास करेंगी। यह लक्ष्य केवल किसी एक राज्य का नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए संयुक्त रूप से केंद्र और राज्यों के कुल सार्वजनिक व्यय का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि यदि इसे जी.एस.डी.पी. के प्रतिशत में देखा जाए, तो यह 1.37 प्रतिशत बनता है। लेकिन, शिक्षा बजट में केवल स्कूल शिक्षा विभाग ही नहीं, बल्कि उच्चतर शिक्षा तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग का बजट भी शामिल किया जाता है। जब इन सभी मदों को सम्मिलित किया जाता है, तब शिक्षा पर कुल व्यय की वास्तविक स्थिति सामने आती है। इन्हें मिलाकर यह जी.एस. डी.पी. का 1.67 प्रतिशत तथा राज्य के कुल बजट का 10.25 प्रतिशत बनता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा को भविष्य के निर्माण का सबसे बड़ा साधन मानती है। पिछले वर्षों में प्रदेश में विद्यालयों के बुनियादी ढांचे का सुदृढीकरण, डिजिटल शिक्षा का विस्तार, नए कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों की स्थापना तथा शिक्षकों की भर्ती और प्रशिक्षण जैसे अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसलिए विपक्ष शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर भ्रम फैलाने का प्रयास न करें।
हर नागरिक को बेहतर जन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से किया जा रहा काम -मुख्यमंत्री
नई दिल्ली 17 मार्च – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार प्रदेश के हर नागरिक को बेहतर जन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। कैथल में सीवरेज नेटवर्क के व्यापक सुधार हेतु पिछले 11 वर्षों में 145 किलोमीटर लम्बी नई सीवरेज लाइनें तथा 122 किलोमीटर लम्बी पेयजल पाइप लाइनें बिछाई गई हैं।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सदन में बजट पर चर्चा के दौरान सदस्य आदित्य सुरजेवाला द्वारा उठाए गए प्रश्न पर जवाब दे रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शायद सदस्य ने बजट भाषण को ध्यानपूर्वक पढ़ने का कष्ट ही नहीं किया। यदि वे बजट भाषण के पैरा नंबर 31, 32, 80, 81 और 85 के भाग-5 को देख लेते, तो उन्हें स्पष्ट रूप से दिखाई देता कि सरकार ने जनस्वास्थ्य के विषय में न केवल विस्तृत जानकारी दी है, बल्कि भविष्य की ठोस रूपरेखा भी प्रस्तुत की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सदस्य ने कैथल की कालोनियों में विकास के लिए पैसे नहीं देने और वहां गंदा पानी जमा होने की बात भी कही है। इनकी यह बात बिल्कुल गलत है।
उन्होंने कहा कि कैथल शहर में 20 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि के विस्तृत अनुमान को प्रशासनिक स्वीकृति 18 दिसम्बर, 2025 को प्रदान की जा चुकी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत कैथल की नव-अनुमोदित कॉलोनियों में 55 किलोमीटर लम्बा नया सीवरेज नेटवर्क बिछाया जाएगा और जहां आवश्यकता है, वहां पुराने सीवरेज पाइपों को बदलने का कार्य भी किया जाएगा। इन कालोनियों में 90 किलोमीटर लम्बी नई पेयजल पाइप लाइनें भी बिछाई जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक सड़कों पर जलभराव का प्रश्न है, वर्तमान में सड़कों पर जलभराव की ऐसी कोई स्थिति नहीं है। जैसे ही सीवरेज जाम या रुकने की कोई भी शिकायत प्राप्त होती है, विभाग द्वारा उस पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।
श्रम विभाग के 3 श्रम निरीक्षकों व एक पटवारी को किया निलंबित- मुख्यमंत्री
जांच हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन
नई दिल्ली, 17 मार्च – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि श्रम विभाग के 3 श्रम निरीक्षकों व एक पटवारी को निलंबित किया जा चुका है। इसके अलावा 6 ग्राम सचिवों, एक कनिष्ठ अभियंता एवं एक पंचायत अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रक्रियाधीन हैं।.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सदन में बजट पर चर्चा के दौरान सदस्य डा. रघुबीर कादियान द्वारा उठाए गए प्रश्न पर जवाब दे रहे थे। समिति की रिपोर्ट में और भी कोई दोषी पाएंगे तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. कादियान ने खुद ही यह मामला श्रम मंत्री द्वारा पकड़ने की बात कही है। जब मंत्री ने मामला पकड़ कर कार्रवाई की तो फिर सरकार पर घोटाले का आरोप लगाना कहां तक जायज है।. यह विषय हरियाणा भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की 21 अप्रैल, 2025 को हुई बैठक में सामने आया। बैठक के दौरान पता चला कि निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण हेतु जमा की गई 90 दिन की कार्य पर्चियों के सत्यापन में कुछ गंभीर विसंगतियां हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने इस मामले को छिपाने की बजाए, इस पर तुरंत त्वरित कार्रवाई करने का निर्णय लिया। किसी भी दोषी अधिकारी या व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले का पता चलते ही, सभी सदस्यीय समिति बनाकर कार्य पर्चियों के पुनः जिला उपायुक्तों को तीन सत्यापन न करने के निर्देश निर्देश दिए। सभी 22 जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार कल 21 लाख 78 हजार 523 कार्य पर्चियों की जांच की गई। प्रारंभिक जांच में पाए गए तथ्यों पर कार्रवाई जारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अनियमितताओं को रोकने के लिए पेंशन, मृत्यु, दुर्घटना सहायता और एन.सी.आर. में ग्रेप एण्ड तृतीय व चतुर्थ भत्ते जैसी आवश्यक योजनाओं को छोड़कर अन्य सभी कल्याणकारी योजनाओं के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसकी जांच के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है, जो जल्द ही एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले की जांच में जिन श्रमिकों की कार्य पर्ची सही पाई जाएगी, उन सभी श्रमिकों को लाभ जारी कर दिया जाएगा। सरकार जीरो टॉलरेंस भ्रष्टाचार की नीति पर कायम थी कायम हैं और कायम रहेेगी। सरकार ने इस विषय का पता लगाया है और इसके दोषियों पर कड़ी कार्यवाही करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
महापुरुषों की जयंती मनाने और खनन के मामले में मुख्यमंत्री ने विपक्ष को दिया करारा ज़वाब
नई दिल्ली , 17 मार्च – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने बजट -सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा महापुरुषों की जयंती मनाने में किए गए खर्च पर कैग की रिपोर्ट में आपत्ति दर्ज करने और खनन के मामले में प्रसाद की रिपोर्ट पर उठाए गए सवालों पर करारा ज़वाब दिया।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सदन के सदस्य डॉ. रघुबीर कादियान द्वारा प्रदेश में महापुरुषों की जयंतियों के आयोजन पर किए गए खर्च को लेकर कैग द्वारा आपत्ति दर्ज करवाने के आरोप का भी कड़ा जवाब दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज को उसके इतिहास, उसकी परंपराओं और उसके महापुरुषों से मार्गदर्शन मिलता है। इसी के आधार पर समाज अपने भविष्य को तय करता है। यही कारण है कि हमने वर्ष 2022 में संत-महापुरुष विचार सम्मान एवं प्रसार योजना शुरू की। इस योजना के तहत वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 21 महापुरुषों की जयंतियां राज्य स्तर पर पूरे सम्मान और गरिमा के साथ मनाई गई। इन जयंतियों पर 10 करोड़ 72 लाख रुपये की राशि खर्च हुई है। इन आयोजनों का उद्देश्य समाज को उन महापुरुषों के विचारों, उनके संघर्ष और उनके आदर्शों से प्रेरित करना था, जिन्होंने देश और समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उन्होंने महापुरुषों के नाम गिनाते हुए बताया कि प्रजापति जयंती, गुरु गोरखनाथ जी, भगवान विश्वकर्मा जयंती, महर्षि वाल्मीकि जी, धन्ना भगत, महाराणा प्रताप जयंती, भगवान परशुराम, महेश्वरी अहिल्या बाई होल्कर, संत कबीर जयंती, बाबा मखन शाह व बाबा लक्खी शाह बंजारा, गोस्वामी तुलसीदास जी, विभाजन विभीषिका दिवस, अग्रसेन जयंती, दादा कुशाल सिंह दहिया, शूरसैनी जयंती, सेन भगत जयंती, गुरु ब्रह्मानंद जयंती, वीर बाल दिवस, गुरु रविदास जयंती, महर्षि कश्यप जयंती, पंडित जसराज जयंती पूरी श्रद्धा एवं सम्मान पूर्वक मनाई गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम महापुरुषों को सम्मान देते हैं तो वह किसी एक दल या विचारधारा का विषय नहीं होता। बल्कि, वह पूरे समाज की साझा विरासत का सम्मान होता है। आज प्रदेश के युवा और नई पीढ़ी इन कार्यक्रमों के माध्यम से अपने महान नायकों के जीवन से प्रेरणा ले रही है। इसलिए, इसे अनावश्यक खर्च या घोटाले का नाम देना उन महापुरुषों का भी अनादर है।
उन्होंने डॉ कादियान से सवाल किया कि यदि वे चाहते हैं कि इनमें से किसी की जयंती पर वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार को 50 लाख रुपये औसत से कम खर्चने चाहिए तो उनके नाम बता दें।
उन्होंने डॉ रघुबीर कादियान के आरोप को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और वास्तविकता से परे बताते हुए कहा कि सरकार के समक्ष कैग की ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं आई है, जिसमें महापुरुषों की जयंतियों के आयोजन पर खर्च को लेकर किसी प्रकार की अनियमितता या आपत्ति दर्ज की गई हो।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के सदस्यों से कहा कि यदि उनके विचार में उपरोक्त 21 महापुरुषों के अलावा कोई ऐसा महापुरुष रह गया है, जिनकी जयंती को मनाया जाना चाहिए, तो वे नाम बताएं ,उसकी जयंती को पूरे आदर और गरिमा के साथ मनाया जाएगा।
उन्होंने सदन के एक अन्य सदस्य द्वारा भगवान परशुराम जी के नाम से स्मृति स्थल बनाने की मांग पर जानकारी दी कि राज्य सरकार ने रोहतक, सेक्टर-26 में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के माध्यम से 4 एकड़ भूमि पर भगवान परशुराम जी के नाम से पार्क एवं स्मृति स्थल विकसित करने का निर्णय ले लिया है।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने सदन के सदस्य भारत भूषण बतरा द्वारा खनन से संबंधित उठाए गए मुद्दे पर कहा कि डाडम खान के मई 2022 में निलंबित किए जाने के बाद कोई हादसे की सूचना नहीं है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व , न्यायालय में दायर मामले OA No- 169/2020 (Kuldeep Vs State of Haryana) के संदर्भ में माननीय न्यायाधिकरण के निर्देशों के बाद सरकार द्वारा एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सेवानिवृत्त माननीय जस्टिस श्री प्रीतमपाल जी की अध्यक्षता में 20 जुलाई, 2021 को 6 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। इसके उपरांत, 1 जनवरी, 2022 को डाडम खान में हादसे में 6 लोगों की जान जाने की सूचना मिलने पर एन.जी.टी. द्वारा स्वयं संज्ञान लेते हुए 8 सदस्यीय समिति का गठन किया गया।
उन्होंने बताया कि इसके बाद इस मामले की छानबीन के लिए 18 जनवरी, 2022 को श्री एस.एस. प्रसाद की अध्यक्षता में समिति गठित की गई। समिति ने संबंधित विभागों के रिकॉर्ड, फील्ड निरीक्षण, तकनीकी तथ्यों और विशेषज्ञ राय के आधार पर अपनी रिपोर्ट दी।
प्रसाद कमेटी द्वारा 16 सितंबर, 2022 को अपनी रिपोर्ट में कुल 5 प्रमुख सिफारिशें की गई हैं। इनमें- खनन योजना के अनुसार पट्टाधारी को कम से कम 70° का ढाल बनाए रखना था तथा 10 मीटर चौड़ाई एवं 10 मीटर ऊंचाई की बेंच बनानी थी। निदेशक, खान एवं भूविज्ञान हरियाणा द्वारा की गई कन्टूर मैपिंग के अनुसार ढाल 75° से 80° के बीच पाई गई तथा पट्टाधारी द्वारा 10 मीटर चौड़ाई एवं 10 मीटर ऊंचाई की बेंच भी नहीं बनाई गई। इन शर्तों का उल्लंघन कर अधिक खनिज निकाला गया। समिति ने अतिरिक्त खनिज का आकलन कर पट्टाधारी पर दण्ड लगाने की बात कही है।
उन्होंने बताया कि इस विषय में, विभाग द्वारा गठित समिति ने 21 जुलाई, 2022 को स्थल का निरीक्षण कर 6 लाख 67 हजार 537 मीट्रिक टन अवैध उत्खनन का आकलन किया। अवैध खनन क्षेत्र 6019.5 वर्ग गज पाया गया। उपायुक्त भिवानी द्वारा 6732 वर्ग गज क्षेत्र में अतिक्रमण की सूचना दी गई। इसमें 712.5 वर्ग गज का अंतर सुलझाया जाना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि विभाग द्वारा 5.45 हेक्टेयर क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील बताया गया। इसमें खनन डी.जी. खान सुरक्षा, गाजियाबाद द्वारा सुझाए गए सुधार कार्यों के बाद ही किया जाए। उन्होंने बताया कि विस्फोटक गतिविधियों से कंपन उत्पन्न होता है, जिससे ढीले पत्थरों में अस्थिरता आती है। इस विषय की भी आगे जांच आवश्यक है। पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए एक सुदृढ निगरानी तंत्र स्थापित करना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि उक्त पांच बिंदुओं में से 3 बिंदु पर्यावरण मंजूरी तथा 2 बिंदु अवैध खनन से संबंधित हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस संबंध में संबंधित फर्म को एन.जी.टी. द्वारा रिटायर्ड जस्टिस श्री प्रीतम पाल जी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट 25 मार्च, 2022 तथा दूसरी 8 सदस्य समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट 1 अप्रैल, 2022 के आधार पर पहले ही कारण बताओ नोटिस दिए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उक्त खनन के मामले में सरकार ने पूरी पारदर्शिता और गंभीरता से जांच प्रक्रिया को पूरा करवाया है।
विकास को तीन गुना गति देगा हरियाणा का बजट : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
कांग्रेस शासनकाल में लिए गए अधूरे फैसलों से गुरुग्राम की शहरी अवसंरचना प्रभावित
गुरुग्राम में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के निर्माण में कांग्रेस सरकार की अनदेखी से आज भी जूझ रही हैं सैकड़ों कॉलोनियां
नई दिल्ली, 17 मार्च — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में बजट 2026-27 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार का यह बजट हरियाणा को विकसित राज्य बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश की जनता की जरूरतों के अनुसार कार्य कर रही है और आगे भी विकास की इसी गति को बनाए रखेगी।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल विरोध करने के लिए विरोध करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास हमेशा काम करने वालों पर ही होता है। यह बजट किसी को निराश नहीं करेगा और प्रदेश के विकास को तीन गुना गति देने का कार्य करेगा।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने गुरुग्राम में 24 मीटर चौड़ी सड़कों के निर्माण को लेकर कांग्रेस शासनकाल के निर्णयों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बजट चर्चा के दौरान विपक्षी विधायक द्वारा गुरुग्राम के सेक्टर-58 से सेक्टर-115 के बीच सैकड़ों कॉलोनियों को 24 मीटर चौड़ी सड़कों से कनेक्टिविटी न होने का मुद्दा उठाया गया, लेकिन उनके द्वारा दिए गए तर्क तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2007 से 2014 के बीच गुरुग्राम में सेक्टर 58 से 115 तक लगभग 7 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में 547 कॉलोनियों को केवल 4 करम चौड़े राजस्व रास्तों के आधार पर लाइसेंस दे दिए गए। इन कॉलोनियों के बीच प्रस्तावित 24 मीटर चौड़ी सड़कों के लिए भूमि तो लाइसेंसी से ली गई, लेकिन दो लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों के बीच आने वाली भूमि को न तो एचएसवीपी द्वारा अधिग्रहित किया गया और न ही भूमि अधिग्रहण की लागत को बिल्डरों से देय ईडीसी की राशि में शामिल किया गया।
उन्होंने बताया कि इन अधूरी 24 मीटर चौड़ी सड़कों का क्षेत्रफल लगभग 1150 एकड़ के आसपास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सवाल यह है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उस समय यह आवश्यक निर्णय क्यों नहीं लिया। इसी वजह से कॉलोनियां तो विकसित होती चली गईं, लेकिन उन्हें जोड़ने वाला 24 मीटर चौड़ी सड़कों का नेटवर्क आज तक अधूरा बना हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय सही निर्णय न लेने के कारण केवल यातायात व्यवस्था ही प्रभावित नहीं हुई, बल्कि शहरी अवसंरचना का विकास भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। जब 24 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़कों का विकास नहीं हुआ, तो स्थानीय प्राधिकरणों के लिए जल आपूर्ति, सीवरेज, वर्षा जल निकासी और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं को समन्वित रूप से उपलब्ध कराना भी बेहद कठिन हो गया।
उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने, सीवरेज नेटवर्क स्थापित करने और ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने में भी बाधाएं आईं, क्योंकि जिस सड़क नेटवर्क के आधार पर यह आधारभूत ढांचा तैयार किया जाना था, वही अधूरा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थिति इस बात का प्रमाण है कि उस समय गुरुग्राम के विस्तार को लेकर समग्र और दूरदर्शी योजना का अभाव था।
सदन से कांग्रेस के वॉकआउट पर मुख्यमंत्री का तंज, बोले— विपक्ष गैर जिम्मेदार
कांग्रेस की यही फितरत कि आरोप लगाओ और भाग जाओ
विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं, रचनात्मक सुझाव देने की बजाय वॉकआउट की राजनीति कर रही कांग्रेस
नई दिल्ली, 17 मार्च — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आज प्रदेश की जनता देख रही है जिस प्रकार कांग्रेस के विधायक सदन में झूठ बोलकर सदन से वॉक आउट कर जाते हैं। कांग्रेस की फितरत रही है कि आरोप लगाओ और भाग जाओ। उन्होंने शायराना अंदाज में कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो अपने आप को नहीं संभाल सकते वो घर को क्या संभालेंगे। हम पर झूठे आरोप लगाकर वह भाग जाते हैं। विपक्ष का यह रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बजट अनुमान 2026—27 पर चर्चा के उपरांत जवाब दे रहे थे।
कांग्रेस विधायकों द्वारा सदन से वॉकआउट करने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी सदस्य पता नहीं किस चश्मे से बजट को देख रहे हैं। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। केवल अखबारों की सुर्खियों में बने रहने के लिए बजट पर निराधार टिप्पणियां कर रहे हैं। विपक्ष ने बजट को गंभीरता से नहीं पढ़ा उन्हें यही नहीं पता कि बजट में विकास के लिए क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं तो वे प्रदेश की समस्याओं पर कैसे चर्चा कर सकते थे। जो सड़क पर आरोप लगाते हैं, उन्हीं आरोपों को सदन में बोल देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के 2 करोड़ 80 लाख लोग इस महान सदन की तरफ आशा भरी नजर से देखते हैं, परंतु विपक्ष का यह गैरजिम्मेदाराना रवैया हरियाणा प्रदेश के लोग देख रहे हैं। विपक्ष को रचनात्मक सुझाव नहीं देने है, बल्कि झूठ बोलकर के सदन से भाग जाना है, यही विपक्ष की सोच है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कांग्रेस की भूमिका चिंताजनक है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, केवल हाजिरी लगवानी है, विरोध करना है और झूठ फैलाना है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि— जो खुद चल नहीं पाते रास्तों पर, अक्सर वही मंजिलों पर सवाल करते हैं।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष की मजबूरी है, क्योंकि विपक्ष को खुद सरकार के खिलाफ खड़ा हुआ दिखाई देना पड़ता है। पर काश, वे जनहित में कोई रचनात्मक सुझाव भी देते, कम से कम उनके हलके के लोग तो उन्हें हल्के में न लेते।
5 हजार सुझावों से बना जनहितकारी बजट, विपक्ष कर रहा निराधार आलोचना
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. रघुबीर कादियान को बजट भाषण बहुत लंबा लगा, इन्होंने कहा कि बजट स्पीच 3 घंटे 9 मिनट की थी, यह विधानसभा का एक रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. रघुबीर कादियान सबसे सीनियर सदस्य हैं। इस सदन के अध्यक्ष भी रहे हैं। वे बताएं कि क्या बजट अभिभाषण को समय सीमा तय करने के लिए कोई फार्मूला है या क्या कांग्रेस के कार्यकाल में इसकी कोई समय सीमा तय की गई थी। इसे घंटों व मिनटों में तोलकर ऐसे अपमानित न करें। श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मेरा यह दूसरा बजट प्रदेश के सभी हितधारकों के सुझावों को मिलाकर बनाया गया था।
राज्यसभा चुनाव पर मुख्यमंत्री ने कहा — निर्दलीय उम्मीदवार ने हमसे समर्थन मांगा तो विपक्ष को इसमें क्या आपत्ति?
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायकों द्वारा राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करने के संबंध में कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रत्याशी श्री संजय भाटिया को जीता कर दिल्ली भेजने का काम किया है। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है। हमने निर्दलीय उम्मीदवार को स्पोर्ट किया। विपक्ष भी अपना उम्मीदवार खड़ा कर लेते, क्यों नहीं खड़ा किया। निर्दलीय उम्मीदवार हमारे पास वोट मांगने के लिए आया तो हमने उसे स्पोर्ट किया, इसमें विपक्ष को आपत्ति क्या है। डॉ रघुबीर कादियान ने आज भी चुनाव जीत कर भी चुनावी प्रक्रिया को कांड बताया, वोट चोरी की बात की। जबकि सच्चाई यह है कि न वोट चोरी होती है, न ईवीएम में मोरी होती है, लोकतंत्र की यही तो खूबी है जनाब, जगा देती है अंतरआत्मा, अगर वो सो रही होती है। इस प्रकार के आरोप लगाना यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्री-बजट बैठकों में किसानों की भागीदारी पर विपक्ष के आरोप गलत, किसान से लेकर उद्योग तक हर वर्ग की भागीदारी से तैयार हुआ बजट
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. रघुबीर कादियान द्वारा आरोप लगाया गया कि प्री-बजट परामर्श बैठक केवल बड़े उद्योगपतियों और व्यापारियों के साथ ही कीं। जबकि किसानों और किसान संगठनों से कोई संवाद नहीं किया गया। श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह आरोप सरासर गलत है। गत 15 जनवरी को हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में प्री-बजट परामर्श बैठक मैंने की थी। इसमें 362 किसान, किसान संगठनों के प्रतिनिधियों, एफपीओ, प्रगतिशील किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि शोधकर्ताओं ने भाग लेकर अपने सुझाव दिए। इसके अतिरिक्त, गत 22 जनवरी को कुरुक्षेत्र में आयोजित प्री-बजट परामर्श बैठक में भी भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और किसानों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सुझाव रखे। इसलिए यह कहना कि सरकार केवल उद्योगपतियों से मिलकर बजट बना रही है, न केवल तथ्यहीन है बल्कि उन हजारों किसानों, किसान संगठनों और विशेषज्ञों के योगदान का भी अपमान है, जिन्होंने अपनी मेहनत और अनुभव से बहुमूल्य सुझाव दिए। यह बजट किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि किसान, मजदूर, युवा, महिला, उद्योग और समाज के हर वर्ग की भागीदारी से तैयार किया गया है।
नई दिल्ली 17 मार्च — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार ने बजट 2026—27 के प्रस्तावों में एस.वाई.एल. नहर के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, इसलिए विपक्ष का यह आरोप कि बजट में एस.वाई.एल. नहर का कहीं जिक्र नहीं है, पूरी तरह से निराधार है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बजट अनुमान 2026—27 पर चर्चा के उपरांत जवाब दे रहे थे।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के साथियों ने यह कहा कि वे तीन दिन से बजट भाषण पढ़ रहे हैं और उसमें एस.वाई.एल. नहर का कहीं जिक्र नहीं है। इन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा के गठन के लगभग 60 वर्षों के इतिहास में ऐसा कोई बजट नहीं रहा, जिसमें एस.वाई.एल. का उल्लेख न किया गया हो। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बजट 2026-27 के दस्तावेज खण्ड-III, जो कि पूंजीगत व्ययों का ब्यौरेवार अनुमान प्रस्तुत करता है, उसके पृष्ठ संख्या 204 पर स्पष्ट रूप से एस.वाई.एल. नहर का निर्माण के सब—हेड में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के वर्ष 2005 से 2014 तक के दस वर्षों के कार्यकाल के बजट भाषणों के रिकॉर्ड के अनुसार केवल दो वर्षों 2005-06 और 2006-07 के बजट भाषण में ही एस.वाई.एल. नहर का उल्लेख किया था। बाकी 8 बजट भाषणों में एस.वाई.एल. शब्द का कहीं भी प्रयोग नहीं हुआ था। इतना ही नहीं, 10 में से केवल 2 वर्षों अर्थात् 2013-14 और 2014-15 के बजट में एस.वाई.एल. के निर्माण के लिए मात्र 10 लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया था। बाकी आठ वर्षों में एक रुपये का भी प्रावधान इस सब—हेड के लिए नहीं किया था।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने तो वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक हर साल 100 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है। राज्यपाल द्वारा 20 फरवरी, 2026 को दिए गए अभिभाषण के पैरा नंबर-36 में भी एस.वाई.एल. के बारे में कहा गया है कि “मेरी सरकार के लिए हरियाणा के जल के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्रतिबद्धता है। हम सतलुज-यमुना लिंक नहर बनाने के लिए पूर्णतः वचनबद्ध हैं।
तीन दशक पुराने हरियाणा टेलीकॉम लिमिटेड से संबंधित विषय का कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया गया समाधान — मुख्यमंत्री
नई दिल्ली, 17 मार्च — हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को हरियाणा विधानसभा में बजट 2026-27 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष द्वारा उठाया गया हरियाणा टेलीकॉम लिमिटेड से संबंधित विषय लगभग तीन दशकों से लंबित एक औद्योगिक इकाई और उससे जुड़े वित्तीय दायित्वों का मामला है। सरकार ने इस पूरे प्रकरण में पारदर्शिता, कानूनी प्रक्रिया और राज्य के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वर्तमान राज्य सरकार ने किसी भी स्तर पर न तो नियमों से समझौता किया है और न ही राज्य के हितों की अनदेखी की है। लगभग तीन दशक पुराने इस विवाद को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाया गया और राज्य के हित में वर्ष 2000 से बकाया चली आ रही राशि को राज्य कोष में जमा करवाया।
श्री नायब सिंह सैनी ने सदन को बताया कि वर्ष 1994 और 1995 के दौरान रोहतक स्थित मैसर्स हरियाणा टेलिकॉम लिमिटेड को राज्य के उद्योग विभाग द्वारा 18 करोड़ 68 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण दिया गया था। इस ऋण को औद्योगिक इकाई द्वारा पांच वर्ष की अवधि के बाद वापस करना था। कंपनी द्वारा केवल 39 लाख रुपये की राशि वापस की गई थी। शेष 18 करोड़ 29 लाख रुपये की राशि वर्ष 2000 में वापस की जानी थी। लेकिन जून, 1999 में यह कंपनी दिवालिया घोषित हो गई और इसके बाद इसने सरकार को एक रुपये का ऋण भी वापिस नहीं किया।
उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में दिवालिया हुई कंपनी का एक और वित्तीय दायित्व जुड़ा हुआ था। मैसर्स परिवर्तन इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी नामक एक अन्य कंपनी को भी मैसर्स हरियाणा टेलिकॉम लिमिटेड से 7 करोड़ 92 लाख रुपये की राशि वसूल करनी थी। वर्ष 1998 में मैसर्स हरियाणा टेलिकॉम लिमिटेड ने अपनी 136 कनाल 8 मरला भूमि के संबंध में उद्योग विभाग, हरियाणा के साथ मॉर्गेज डीड निष्पादित की थी। इस मॉर्गेज में पहला चार्ज मैसर्स परिवर्तन इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी के पास था। जबकि, दूसरा चार्ज हरियाणा के उद्योग विभाग के पास था। जमीन गिरवी रखी प्राइवेट कंपनी को, सरकार ने दिया 18 करोड़ 68 लाख रुपये का ब्याज मुक्त लोन, पांच साल में सरकार को वापिस दिए सिर्फ 39 लाख रुपये। 1994 में तब कांग्रेस की सरकार थी। अपने 7 करोड़ 92 लाख रुपये की राशि की वसूली के लिए मैसर्स परिवर्तन इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी ने फरवरी 2020 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), चंडीगढ़ बेंच का दरवाजा खटखटाया। कोविड के दौरान एन.सी.एल.टी. चंडीगढ़ बेंच द्वारा समाधान आवेदकों से बोलियां आमंत्रित की गई। अप्रैल 2023 में श्री अभिमन्यु मेहलावत नामक बोलीदाता की 25 करोड़ 14 लाख रुपये की सर्वोच्च बोली को NCLT, चंडीगढ़ बेंच द्वारा स्वीकृत किया गया। हरियाणा के उद्योग विभाग ने भी इस प्रक्रिया में लगभग 77 करोड़ रुपये का दावा NCLT के समक्ष रखा गया था। इसमें 18 करोड़ 29 लाख रुपये मूलधन तथा 58 करोड़ 71 लाख रुपये पीनल इंटरेस्ट शामिल था।
उन्होंने कहा कि अप्रैल 2023 में पारित अपने आदेश में NCLT, चंडीगढ़ बेंच ने हरियाणा के उद्योग विभाग को वित्तीय लेनदार के रूप में स्वीकार नहीं किया। इसी कारण, विभाग द्वारा मांगे गए पीनल इंटरेस्ट को स्वीकार नहीं किया। परिणामस्वरूप, स्वीकृत बोली राशि 25 करोड़ 14 लाख में से उद्योग विभाग, हरियाणा को 18 करोड़ 56 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। हमने इस आदेश के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसे अप्रैल 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। इससे अधिक वर्तमान सरकार क्या कर सकती थी। कांग्रेस सरकार द्वारा पैदा की गई इस समस्या से जूझने के लिए। इसके बाद हमने कानूनी प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हुए आगे की कार्रवाई की। इसके पश्चात सितंबर 2025 में हरियाणा के एडवोकेट जनरल से कानूनी राय प्राप्त की गई। विभाग को 18 करोड़ 56 लाख रुपये की डिमांड ड्राफ्ट राशि स्वीकार करनी चाहिए और सफल बोलीदाता के पक्ष में नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी कर देना चाहिए। इस कानूनी सलाह के आधार पर वित्त विभाग, हरियाणा तथा राज्य सरकार की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद 18 करोड़ 56 लाख रुपये की राशि राज्य कोष में जमा कर दी गई। इस प्रकार लंबे समय से लंबित इस प्रकरण का समाधान किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 में सफल बोलीदाता के पक्ष में नो डयूज सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया ताकि, इस मामले को विधिवत रूप से समाप्त किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट है कि वर्तमान राज्य सरकार ने किसी भी स्तर पर न तो नियमों से समझौता किया है और न ही राज्य के हितों की अनदेखी की है। लगभग तीन दशक पुराने इस विवाद को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाया गया और राज्य के हित में वर्ष 2000 से बकाया चली आ रही राशि को राज्य कोष में जमा करवाया।







