
Haryana News: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत, धर्म बदला तो खत्म एससी/एसटी का दर्जा : कटारिया
पवन चोपड़ा। चंडीगढ़ : देश के सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है की मुस्लिम और ईसाई धर्म अपनाने वाला शख्स अनुसूचित जाति के का सदस्य नहीं माना जाएगा । उसका एससी -एसटी का दर्जा समाप्त होगा। माननीय न्यायालय ने कहा कि 1950 के आदेश की धारा 3 के तहत लगाया गया यह प्रतिबंध पूरी तरह से लागू होता है धारा 3 में बताए गए धर्मों के अलावा किसी और धर्म में परिवर्तन करने पर, जन्म चाहे किसी भी परिवार में हुआ हो, अनुसूचित जाति/जनजाति का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाता है। भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार के पूर्व सदस्य सूरजभान कटारिया ने इस निर्णय का जोरदार स्वागत किया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति, जो धारा 3 में दिए धर्मों (हिंदू, सिख, बौद्ध) के अलावा किसी अन्य धर्म में चला गया था और दावा करता है कि उसने दोबारा हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म अपना लिया है तो ऐसे मामलों में तीन शर्तें पूरी होना आवश्यक हैं। सूरजभान कटारिया ने कहा की पूर्व की यूपीए सरकार एक साजिश के तहत अनुसूचित समाज के हकों को मारने की फिराक में थीं और यह सामाजिक लड़ाई लंबे समय से लड़ी जा रही थी जिसपर पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय सराहनीय है। देश के संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जातियों को रखा गया है. इसके तहत हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अलावा किसी भी दूसरे धर्म को मानने वाले व्यक्ति को एससी/एसटी का सदस्य नहीं माना जा सकता है। साल 1950 में राष्ट्रपति के आदेश में भी कहा गया था कि हिंदू, सिख एवं बौद्ध धर्म के सदस्यों को ही अनुसूचित जाति की सूची का सदस्य माना जा सकता है।
Back to top button







