
Haryana News: हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस पार्टी के भीतर मची अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है। बादली विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने अपनी ही पार्टी के ‘मठाधीशों’ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा है कि जब तक राहुल गांधी खुद को पार्टी से बड़ा समझने वाले नेताओं पर चाबुक नहीं चलाते, तब तक कांग्रेस के हालात नहीं सुधरेंगे।
सियासी गलियारों में उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हैं, जिस पर उन्होंने खुद एक बड़ा हिंट देते हुए कहा है कि वह 5 मई को अपने जन्मदिन पर कोई ‘बड़ा फैसला’ ले सकते हैं।
यहाँ पढ़िए विधायक कुलदीप वत्स के बयानों से जुड़ी अहम बातें:
5 मई को करेंगे सियासी धमाका? खट्टर और सैनी से नजदीकियों पर बेबाक जवाब
जब कुलदीप वत्स से उनके भाजपा नेताओं के संपर्क में होने और पार्टी छोड़ने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया। वत्स ने माना कि वह प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर के संपर्क में हैं। हालांकि, उन्होंने इसे अपने हलके (विधानसभा क्षेत्र) के विकास कार्यों से जोड़ा। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री राजा होता है और हलके के काम के लिए मैं उनके पास ही जाऊंगा।”
राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सीएम सैनी उनके भतीजों को आशीर्वाद देने भी पहुंचे थे। इस पर वत्स ने कहा कि सीएम को उन्होंने खुद शादी का कार्ड दिया था और उनका आना उनका बड़प्पन है।

‘मुझे खरीद सके, ऐसा कोई नोट नहीं छपा’
राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 5 विधायकों की क्रॉस वोटिंग और 4 वोट कैंसिल होने के कारण पार्टी की भारी फजीहत हुई थी। इस दौरान कुलदीप वत्स पर भी जानबूझकर वोट खराब करने के आरोप लगे थे। इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए वत्स ने कहा, “मेरे ऊपर किसी का दबाव नहीं था। मुझे खरीद सके, ऐसा नोट अब तक नहीं छपा है। मैंने अपना जमीर नहीं बेचा है।”
उन्होंने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि जिन विधायकों ने पार्टी के खिलाफ जाकर वोट किया, उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया। उन्होंने दावा किया कि कुछ विधायक पैसों के लिए नहीं बिके हैं, बल्कि उनके पीछे कोई बड़ा नाम है जो यह सब करवा रहा है।
हुड्डा ‘पिता’ समान, लेकिन दिल्ली में बैठे ‘बड़े नेताओं’ से नाराजगी
कांग्रेस के भीतर उनकी नाराजगी किससे है, इस सवाल पर वत्स ने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन निशाना सीधे दिल्ली में बैठे पार्टी के शीर्ष नेताओं पर साधा।
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भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर भरोसा: उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा या सांसद दीपेंद्र हुड्डा से कोई नाराजगी नहीं है। वत्स ने कहा, “हुड्डा साहब मेरे पिता समान हैं और वही मेरे नेता हैं। उन्होंने खुद मेरा वोट देखा था।”
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सिस्टम से हताशा: वत्स ने कहा कि वह कांग्रेस के ‘सिस्टम’ से दुखी हैं। दिल्ली में बैठे कुछ बड़े नेता, जिन्हें पार्टी ने सब कुछ दिया है, वही कांग्रेस की फजीहत करवा रहे हैं।
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राहुल गांधी से मांग: उन्होंने राहुल गांधी से अपील की है कि केवल छोटे नेताओं पर ही नहीं, बल्कि उन बड़े चेहरों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए जो खुद को कांग्रेस से ऊपर मानने लगे हैं।
क्यों उठी थी बगावत की चर्चा?
राज्यसभा चुनाव से पहले लगभग 10 दिनों तक कुलदीप वत्स पार्टी की गतिविधियों से पूरी तरह गायब थे।
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वह 9 मार्च को चंडीगढ़ में बुलाई गई CLP की बैठक में नहीं पहुंचे।
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जब 13 मार्च को 31 विधायकों को हिमाचल प्रदेश ले जाया गया, तब भी वह नदारद रहे।
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वोटिंग से ठीक पहले 16 मार्च को भी वह हुड्डा के आवास पर नहीं गए थे, जिसके बाद दीपेंद्र हुड्डा खुद उन्हें अपनी गाड़ी में बिठाकर विधानसभा लेकर आए थे।
फिलहाल, कुलदीप वत्स का कहना है कि वह आज कांग्रेस में हैं और पूरे प्रदेश का भ्रमण कर रहे हैं। अब सबकी नजरें 5 मई पर टिकी हैं कि क्या वत्स कांग्रेस में रहकर ही अपनी लड़ाई लड़ेंगे या फिर हरियाणा की राजनीति में कोई नया भूचाल लाएंगे।



