
Haryana NEWS: मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्ष को दिया करारा जवाब
कहा: राज्यपाल का अभिभाषण ‘विकसित हरियाणा’ के भविष्य का रोडमैप
वंदे मातरम् पर रखी अपनी बात, विपक्ष पर उठाये सवाल
विपक्ष ने सरकार की आलोचना करने के लिए केवल रटी-रटाई बातें बोली: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
चंडीगढ़,27 फरवरी- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कांग्रेस को जमकर घेरा। उन्होंने बताया कि राज्यपाल द्वारा 20 फरवरी को दिया गया अभिभाषण राज्य की दशा व दिशा को व्यक्त करने वाला है। यह अभिभाषण हरियाणा के भविष्य की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। एक ऐसे हरियाणा की, जो विकास, सुशासन, सामाजिक न्याय और समावेशी प्रगति के मार्ग पर दृढ़तापूर्वक अग्रसर है।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभिभाषण ‘विकसित हरियाणा’ के स्पष्ट रोडमैप को दिखाता है, और वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को भी दिखाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की यही खूबसूरती है कि यहां असहमति को भी सम्मान मिलता है, लेकिन स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह भी आवश्यक है कि सरकार के जनकल्याण व विकास कार्यों की सराहना भी की जानी चाहिए।
उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विपक्ष ने सरकार की आलोचना करने के लिए केवल रटी-रटाई बातें बोली हैं, कोई तथ्यात्मक बात नहीं रखी। सरकार के कल्याणकारी कार्यों से प्रदेश की जनता प्रभावित हुई और हमें लगातार तीसरी बार जनसेवा का मौका दिया।

वंदे मातरम् पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बड़े गर्व की बात है कि इस बार के बजट अधिवेशन की शुरुआत वंदे मातरम् गीत से हुई। विपक्षी सदस्यों द्वारा वंदे मातरम् गीत पर की गई टीका-टिप्पणी पर मुखर होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् हमारे राष्ट्र की आत्मा है, हमारी सांस्कृतिक चेतना है और हमारी स्वतंत्रता की तपस्वी यात्रा का स्मरण है। यह हमारे संघर्ष और स्वाभिमान की 150 वर्ष की लंबी गाथा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज हम ऐसे कालखंड में खड़े हैं, जब राष्ट्र अपने इतिहास के कई गौरवशाली अध्यायों को एक साथ स्मरण कर रहा है। हाल ही में, संविधान के 75 गौरवपूर्ण वर्ष पूरे हुए हैं। देश सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती मना रहा है, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मना रहा है और श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष को श्रद्धापूर्वक नमन कर चुका है। इन सभी स्मृतियों के बीच वंदे मातरम् के 150 वर्ष हमें यह याद दिलाते हैं कि भारत की आत्मा केवल राजनीतिक स्वतंत्रता से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्वाभिमान से भी बनी है।
उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् गीत 7 नवंबर, 1875 को सार्वजनिक हुआ। इसके बाद वंदे मातरम् राष्ट्रभक्ति, त्याग और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया, जिसने हमारे आजादी के आंदोलन का रास्ता प्रशस्त किया। वर्ष 1907 में कलकत्ता में वंदे मातरम् नाम का अंग्रेज़ी अखबार शुरू हुआ, जिसके संपादक महर्षि अरविंद थे। उस समय ब्रिटिश सरकार ने उसे सबसे खतरनाक राष्ट्रवादी पत्र माना और श्री अरविंद पर राजद्रोह का मुकदमा चलाते हुए उन्हें सज़ा दी। वर्ष 1896 में गुरुदेव टैगोर ने पहली बार कांग्रेस के अधिवेशन में वंदे मातरम् को सार्वजनिक रूप से गाया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1905 में वाराणसी अधिवेशन में महान कवयित्री सरला देवी चौधरानी ने पूर्ण वंदे मातरम् का गान किया। गुलामी के कालखंड के दौरान जब वर्ष 1936 के बर्लिन ओलंपिक में हमारी हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता, तब भी भावपूर्ण तरीके से वंदे मातरम् का गान किया गया। 15 अगस्त, 1947 को जब देश आजाद हुआ, तब सुबह साढ़े 6 बजे सरदार पटेल के आग्रह पर पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने आकाशवाणी से अपने मधुर स्वर में वंदे मातरम् का गान कर देश को भावुक कर दिया।
मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा की अंतिम बैठक में वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के बराबर सम्मान देते हुए राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् की यात्रा जितनी गौरवपूर्ण है, उतनी ही संघर्षपूर्ण भी रही है। जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष पूरे हुए, तब भारत गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। जब इसके 100 वर्ष पूरे हुए, तब देश आपातकाल की जंजीरों में बंधा हुआ था और लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा था। यह इतिहास का दुर्भाग्यपूर्ण संयोग है कि जिस मंत्र ने देश को स्वतंत्रता की ऊर्जा दी, उसी के 100 वर्ष पूरे होने पर देश ने लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का एक काला अध्याय देखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज, जब वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, यह अवसर उस गौरव को पुनः स्थापित करने का है। उस चेतना को फिर से जागृत करने का है और यह संकल्प दोहराने का है कि भारत कभी भी अपने मूल्यों से समझौता नहीं करेगा। यदि वंदे मातरम् की भावना न होती, तो आज हम जनप्रतिनिधि के रूप में इस सदन में न बैठे होते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन में वंदे मातरम् की उस भावना को स्मरण करना अत्यंत आवश्यक है, जिसे स्वयं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने शब्द दिए थे। दक्षिण अफ्रीका से प्रकाशित साप्ताहिक पत्रिका ‘इंडियन ओपिनियन’ में 2 दिसंबर, 1905 को गांधी जी ने लिखा था कि ‘बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् पूरे बंगाल में स्वदेशी आंदोलन की आत्मा बन चुका है।’ लाखों लोग एक स्वर में सभाओं में इस गीत को गा रहे हैं, इससे लग रहा है कि वंदे मातरम् हमारा राष्ट्रीय गान बन गया हो।
मुख्यमंत्री ने सदन में मुस्लिम लीग और कांग्रेस द्वारा उस दौर में वंदे मातरम् को लेकर की गई टीका-टिप्पणियों पर भी अपने विचार रखे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े ही दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि इतना महान और पवित्र गीत होते हुए भी, दुर्भाग्यवश, पिछली सदी में इसके साथ अन्याय हुआ। तुष्टीकरण की राजनीति के दबाव में वंदे मातरम् को विवादों में घसीटा गया। इसके भाव को तोड़ने का प्रयास किया गया। यह इतिहास का एक कटु सत्य है, जिसे नई पीढ़ी को जानना बहुत जरूरी है, ताकि भविष्य में राष्ट्र की आत्मा के साथ ऐसा अन्याय फिर कभी न हो।
वृद्धावस्था पेंशन पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का विपक्ष पर तीखा हमला
झूठ और भ्रम की राजनीति बेनकाब, पेंशन काटने का आरोप निराधार: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
कांग्रेस कार्यकाल पर उठाये सवाल, कहा: अपात्रों को पेंशन, बड़ा घोटाला
चंडीगढ़, 27 फरवरी- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने वृद्धावस्था पेंशन को लेकर विपक्ष द्वारा रखी गई बातों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्षी बुजुर्गों की पेंशन काटने जैसे संवेदनशील विषय पर झूठ और भ्रम फैलाकर सस्ती राजनीति चमकाने में लगे हैं। सरकार किसी की पेंशन छीनने नहीं, बल्कि हर पात्र व्यक्ति तक उसका हक पहुंचाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि विपक्षियों का क्या झूठ बोलकर राजनीति करना ही एकमात्र एजेंडा रह गया है?
मुख्यमंत्री शुक्रवार को विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान राज्यपाल अभिभाषण पर विपक्षियों द्वारा रखी गई बात पर जवाब दे रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी सरकार पारदर्शी सिस्टम लेकर आई है। जो लूट कांग्रेस के समय चलती थी, उसे उनकी सरकार ने रोका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 1 लाख 30 हजार मामलों में कुछ गलतियां मिलीं, जो उम्र, आय इत्यादि से संबंधित थीं। इनकी पेंशन बंद नहीं की गई है। बल्कि, इन कमियों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इतिहास भी याद रखना चाहिए। 1992 में कांग्रेस सरकार ने पहली बार 10 हजार रुपये की आय सीमा रखी और उस समय पेंशन 100 रुपये थी। वर्षों तक उन्होंने सीमा नहीं बदली। वर्ष 1992 से लेकर वर्ष 2009 तक कांग्रेस व इनेलो की सरकारों ने ना तो आय सीमा हटाई और ना ही कभी बढ़ाई गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की बीजेपी सरकार ने वर्ष 2023 में आय सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये की और लाभार्थियों की संख्या 17 लाख 98 हजार तक पहुंचाई। आज 20 लाख से ज्यादा बुजुर्ग पेंशन ले रहे हैं। अगर पेंशन काटी गई होती, तो यह संख्या कैसे बढ़ती? इस सवाल का जवाब कौन देगा?
उन्होंने कहा कि आज हमारी सरकार ने 11 साल में पेंशन को 1,000 से बढ़ाकर 3,200 रुपये मासिक किया है। यह सबसे बड़ी 2,200 रुपये की बढ़ोतरी है। यह बुजुर्गों के सम्मान का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के समय में 50 हजार से अधिक अपात्र लोगों को पेंशन देने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय में वर्ष 2011 में वृद्धावस्था पेंशन घोटाला सामने आया था। उसके अनुसार 50 हजार से अधिक ऐसे लोगों की पेंशन जारी की गई, जो या तो अपात्र थे या स्वर्गवासी हो चुके थे। उन्होंने कहा कि उस समय 16 जिलों में 15 लाख 98 हजार 126 लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही थी। जब पेंशन लेने वालों को बैंक खाते खुलवाने के लिए कहा गया, तो केवल 11 लाख 44 हजार 98 लोगों ने ही खाते खुलवाए।
उन्होंने कहा कि विपक्षियों के समय में सिस्टम पूरी तरह जंग खा चुका था। अपात्रों को पेंशन मिल रही थी तथा पात्र लोग पेंशन बनवाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे थे। बीजेपी सरकार ने सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन सहित सभी सामाजिक सुरक्षा पेंशन को पारदर्शी ढंग से पात्र लोगों तक पहुंचाने का काम किया है। विपक्षी दलों के समय में तो अपात्र लोग लाभ ले जाते थे और पात्र लोग वंचित रह जाते थे। प्रदेश की वर्तमान सरकार सेवा, संवेदना और सत्य की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र बुजुर्ग पेंशन से वंचित नहीं रहेगा। लेकिन जो लोग झूठ की दुकान चलाकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं, उन्हें जनता की अदालत में जवाब देना होगा।
मुद्दाविहीन विपक्ष झूठे आरोपों से सदन को कर रहा गुमराह – मुख्यमंत्री
विपक्ष द्वारा 5000 करोड़ धान घोटाले का दावा तथ्यहीन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार की नीतियां किसान केंद्रित हैं, सरकार किसान के एक एक दाने को एमएसपी पर खरीद रही — मुख्यमंत्री
चंडीगढ़ 27 फरवरी- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा में धान खरीद के 5000 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष बिना तथ्यों के सदन को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी के पास कोई प्रमाण है तो वह सदन के पटल पर रखे।
मुख्यमंत्री ने विधायक श्री अशोक अरोड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 5000 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा पूरी तरह तथ्यहीन है। धान की खरीद भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार अधिकृत सरकारी एजेंसियों के माध्यम से की जाती है और इसकी निगरानी सुदृढ़ तंत्र से सुनिश्चित की जाती है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के समय तो सब जानते हैं कि कितने बड़े—बड़े घोटाले होते थे। इनके समय में व्यवस्था सही नहीं थी, जिससे किसानों को नुकसान होता था। जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने व्यवस्था में बदलाव किया है, जिससे किसानों को भी अपनी आय का पता लगने लगा है। पहले तो किसानों को यही पता नहीं होता था कि उसकी आय कितनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने धान खरीद प्रणाली में व्यापक सुधार किए हैं। खेत स्तर से गेट पास की डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय किसानों को भुगतान के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था, कई बार एक-एक वर्ष तक राशि लंबित रहती थी, जबकि आज किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है और उन्हें अपनी आय की स्पष्ट जानकारी मिल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर फर्जी पर्ची, डुप्लीकेट प्रविष्टि या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता सामने आई है तो सरकार ने उसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से कहा कि इनके समय में जो फर्जीवाड़ा हुआ, उस पर तो कोई कार्रवाई की होगी, वही सदन को बताएं। उन्होंने कहा कि आज चिंता किसानों को नहीं हो रही है, बल्कि कांग्रेस को हो रही है। विपक्ष केवल आरोप लगाने के बजाय रचनात्मक सुझाव दें। सरकार हर सकारात्मक सुझाव पर विचार करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यह विषय महत्वपूर्ण है और सभी को मिलकर व्यवस्था को और मजबूत करना चाहिए ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम कर रही है। जहां-जहां शिकायतें प्राप्त हुई हैं, वहां जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विपक्ष के समय में तो फर्जीवाड़े होते रहते थे, कोई पकड़ में नहीं आता था
मुख्यमंत्री ने कहा कि धान की खरीद सरकारी एजेंसियों के माध्यम से भारत सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाती है और इस प्रक्रिया की निगरानी बहु-स्तरीय तंत्र के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है। सालों-साल यही व्यवस्था चलती रही है, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसमें बदलाव किया है। मंडी में धान की आवक से लेकर राइस मिलर्स से चावल की वापसी तक हर कदम पर चेक लगाया है। इस बदलाव को विपक्ष देखना ही नहीं चाहते। इनके समय में तो फर्जीवाड़े होते रहते थे, कोई पकड़ में नहीं आता था। लेकिन, वर्तमान राज्य सरकार ने नई व्यवस्था में कोई भी फर्जीवाड़ा होता है तो पकड़ में आ जाता है। उस पर कड़ी कार्रवाई भी होती है। सरकार सिस्टम में लगातार सुधार जारी रखे हुए हैं और इसे चाक-चौबंद बनाकर रहेंगे।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसान अपने खेत में धान लगाता है तो उसका पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर करता है। इसका सत्यापन करवाया जाता है। इससे यह पता चलता है कि कितने क्षेत्र में धान लगाया है और उपज का भी सही आकलन किया जाता है। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि पोर्टल पर सत्यापन की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। गत खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान राज्य की खरीद संस्थाओं द्वारा 3 लाख 1 हजार किसानों से 62 लाख 13 हजार मीट्रिक टन नान-बासमती धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई है। गत सीजन में, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के अनुसार, धान (गैर-बासमती) के लिए कुल 30 लाख 17 हजार 968 एकड़ क्षेत्र का सत्यापन किया गया। राज्य में अनुमानित उत्पादन 97 लाख 86 हजार मीट्रिक टन आंका गया। खरीद नीति पूरी तरह डेटा-आधारित है। मंडियों में जितनी फसल आई, उसी का वजन, सफाई और तुलाई के बाद वास्तविक खरीद दर्ज की गई।
धान खरीद में अनियमितताओं पर सख्ती, 12 एफआईआर दर्ज, 6.37 करोड़ की रिकवरी की
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन गेट पास और बैंक खातों में सीधा भुगतान जैसे प्रावधान लागू किए गए। कुछ मंडियों में अनियमितताओं की शिकायतें भी प्राप्त हुईं। इन मामलों में गंभीरता से जांच की है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर एवं नवंबर 2025 के दौरान सभी जिलों में संयुक्त कमेटियां गठित कर राइस मिलों में भंडारित धान की भौतिक जांच करवाई है। जहां-जहां प्रथम दृष्टया अनियमितता पाई गई, वहां संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों, आढ़तियों एवं राइस मिलरों के विरुद्ध कुल 12 एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई हैं। इन मामलों की जांच निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ की जा रही है तथा संलिप्त व्यक्तियों की गिरफ्तारियां भी की गई हैं। इसके अतिरिक्त खाद्य आपूर्ति विभाग, खरीद एजेंसियों एवं मार्केटिंग बोर्ड द्वारा 75 अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच आरंभ की गई है। इनमें से 28 को निलंबित किया जा चुका है। इनके अलावा, राइस मिलरों से 6 करोड़ 37 लाख रुपये की राशि की रिकवरी कर सरकारी खजाने में जमा करवाई जा चुकी है। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान सरकार किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करती है। संदिग्ध धान के उठान से जुड़े श्रम, ढुलाई एवं परिवहन ठेकेदारों की अदायगी पर भी रोक लगा दी गई है और उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सरकार के आंकड़े वास्तविक स्थिति पर आधारित, किसी प्रकार की कृत्रिम वृद्धि या हेराफेरी नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ सदस्यों द्वारा फसल आवक और खरीद के आंकड़ों में अंतर का मुद्दा उठाया गया है। किसी भी मंडी में आवक का आंकड़ा अनुमानित होता है, जबकि खरीद का आंकड़ा तुलाई के बाद वास्तविक वजन के आधार पर दर्ज होता है। उदाहरण के तौर पर, जिला अंबाला, फतेहाबाद, कैथल, करनाल और सिरसा में आवक एवं खरीद के आंकड़ों में कोई असामान्य अंतर नहीं पाया गया है। 30 से 50 प्रतिशत अंतर होने का आरोप निराधार एवं तथ्यहीन है। जिला महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी में खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान धान की आवक एवं खरीद शून्य रही। यह दर्शाता है कि सरकार के आंकड़े वास्तविक स्थिति पर आधारित हैं और किसी प्रकार की कृत्रिम वृद्धि या हेराफेरी नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा 10 प्रतिशत टूटे चावल की अनुमति के साथ सी.एम.आर. के लिए राज्य को 8 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था। यह लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया गया है और भारतीय खाद्य निगम को समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि दिसंबर, 2025 के सत्र में भी ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से यह विषय उठाया गया था। सरकार ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच और सुधारात्मक कदम उठाए। डबल इंजन सरकार प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सक्रिय शासन में विश्वास करती है।
ई-खरीद पोर्टल किया जा रहा अपग्रेड, जियो-टैगिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी से पारदर्शिता होगी सुनिश्चित
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ई-खरीद पोर्टल को अपग्रेड किया जा रहा है। आगामी रबी एवं खरीफ सीजन 2026-27 में जियो-टैगिंग आधारित गेट पास, वाहनों का ऑटोमैटिक नंबर प्लेट कैप्चर, मंडियों, गोदामों और राइस मिलों की जियो-फेंसिंग, प्रवेश एवं निकास द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही, किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन, तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से भौतिक जांच जैसे प्रावधान भी लागू किए जाएंगे। भौतिक जांच अब पूरी तरह जियो-फेंसिंग के अंतर्गत होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि नियुक्त कर्मचारी स्थल पर पहुंचकर ही निरीक्षण करें। इससे किसी भी प्रकार की कागजी खानापूर्ति की संभावना समाप्त हो जाएगी। हमने 11 दिसंबर, 2025 को प्रति एकड़ उपज सीमा में संशोधन भी किया है। ताकि, वास्तविक उत्पादन और खरीद के आंकड़ों में सामंजस्य स्थापित हो सके।
उन्होंने कहा कि बाजरा किसानों के हित में भी सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है। भावांतर भरपाई योजना के अंतर्गत 575 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों को लाभ देने का निर्णय लिया गया। लगभग 1 लाख 57 हजार किसानों से 6 लाख 23 हजार मीट्रिक टन बाजरे की खरीद की गई और 358 करोड़ 62 लाख रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में स्थानांतरित की जा रही है।
हरियाणा की पहल से खाद सब्सिडी में 700 करोड़ रुपये से ज़्यादा की हुई बचत
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल को खाद की बिक्री हेतु आईएफएमएस पोर्टल के साथ जोड़ा है। इससे डी.ए.पी. का उद्योगों में और यूरिया का प्रदेश से बाहर होने वाली बिक्री पर रोक लगी है। इससे पिछले 5 महीने से भी कम समय में देश की खाद सब्सिडी में 700 करोड़ रुपये से ज़्यादा की बचत हुई है। यह सिर्फ और सिर्फ़ एम.एफ़.एम.बी. पोर्टल के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अन्य सभी प्रदेशों से आग्रह कर रही है कि वे भी इस प्रकार की प्रणाली अपनाएं, ताकि उर्वरक सब्सिडी का लाभ सिर्फ पात्र किसानों को ही मिले। हरियाणा के अलावा अभी तक कोई और प्रदेश इस प्रकार की व्यवस्था लागू नहीं कर पाया है।
उन्होंने कहा कि एम.एफ़.एम.बी. और ई-ख़रीद के माध्यम से गत 12 सीजन में हमने फसल खरीद की 1 लाख 64 हजार करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डाली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संदेश है—किसान का हक किसी भी सूरत में मारा नहीं जाएगा। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी पद या स्तर पर क्यों न हो। उन्होंने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत है। सरकार की नीतियां किसान-केंद्रित हैं, प्रक्रिया पारदर्शी है और नीयत साफ है।
फसल खराबा मुआवजे के भुगतान से पहले पूर्ण सत्यापन आवश्यक : मुख्यमंत्री
विधायक सूची सरकार को दें, सत्यापन के बाद मुआवजा दे दिया जाएगा
चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि फसल खराबे के मुआवजे की राशि तीन या चार बार किसानों के खातों में भेजी गई, लेकिन वह वापस आ गई क्योंकि गलत खातों में पैसे नहीं डाले जा सकते।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान नूंह विधायक चौधरी आफताब अहमद द्वारा वर्ष 2022 से 2026 तक राज्य में फसल खराबा के लिए वितरित मुआवजे की वर्षवार एवं जिलावार जानकारी से संबंधित पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग तीन या चार बार फसल खराबे के पैसे किसानों के खातों में भेजे गए, लेकिन वे वापस आ गए क्योंकि गलत खातों में पैसे नहीं डाल सकते। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि विधायक भी अपने स्तर पर सत्यापन करवा लें और सरकार भी सत्यापन करवा रही है। इसके बाद दोबारा पटवारी से वेरीफाई करवा कर राशि जारी कर दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि पात्र किसानों को मुआवजा देने में सरकार पूरी पारदर्शिता बरत रही है तथा किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना को दूर करने के लिए आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
चण्डीगढ़,27 फरवरी – हरियाणा विधानसभा में बजट सत्र के दौरान आज हरियाणा विनियोग(संख्या 1) विधेयक,2026 चर्चा उपरांत पारित किया गया ।
हरियाणा विनियोग (संख्या 1) विधेयक, 2026
मार्च, 2026 के 31वें दिन को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सेवाओं के लिए हरियाणा राज्य की संचित निधि में से कुल 35,02,00,000 रुपये के भुगतान और विनियोग का प्राधिकार देने लिए हरियाणा विनियोग (संख्या 1) विधेयक, 2026 पारित किया गया है।
चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि नीलोखेड़ी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव सग्गा एवं समाना बाहु में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य जल्द से जल्द करवाया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के एक सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थी।
आरती सिंह राव ने बताया कि गांव सग्गा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन का निर्माण कार्य लगभग 38 प्रतिशत पूरा होने के बाद एजेंसी द्वारा रोक दिया गया था। लोक निर्माण विभाग द्वारा उक्त एजेंसी का अनुबंध 5 जुलाई 2023 को समाप्त कर दिया गया था। संशोधित प्रशासकीय स्वीकृति के उपरांत, निविदा प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी होने की उम्मीद है और पीएचसी भवन का शेष निर्माण कार्य छह महीने के भीतर पुनः आरंभ होने की संभावना है।
स्वास्थ्य मंत्री ने आगे गांव समाना बाहु में पीएचसी के रुके हुए निर्माण कार्य से संबंधित सवाल का जवाब देते हुए बताया कि संविदा एजेंसी ने 70 प्रतिशत कार्य पूरा करने के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया था और लोक निर्माण विभाग के साथ विवाद को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी थी। इस विभाग द्वारा एजेंसी का अनुबंध 20 जून 2024 को समाप्त कर दिया गया था। उन्होंने आश्वान दिया कि इस पीएचसी के भवन निर्माण कार्य पुनः आरंभ होने में लगभग छह महीने लगेंगे और उसके बाद इसे पूर्ण करने में लगभग 12 महीने का समय लगेगा।
उन्होंने एक अन्य सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में बताया कि वैसे तो फरीदाबाद के सेक्टर -56 में 50 बैड के अस्पताल को बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, फिर भी इस मामले में दोबारा जांच करवा लेंगे , आवश्यकता होगी तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चंडीगढ़, 27 फरवरी— हरियाणा के लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश में सड़कों के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति हुई है। राज्यभर में सड़कों के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और फॉरलेन निर्माण के कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं, जिससे यातायात सुगम हुआ है और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले को बेहतर और सुरक्षित सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाए।
लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री श्री रणबीर गंगवा आज हरियाणा विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान विधायक मो. इलियास द्वारा पूछे गए एक प्रश्न का जवाब दे रहे थे।
श्री गंगवा ने बताया कि होडल से पटौदी को जोड़ने वाला मार्ग, जो दक्षिण हरियाणा का एक महत्वपूर्ण यातायात मार्ग है, उसे फॉरलेन बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इस परियोजना को दो भागों में क्रियान्वित किया जाएगा।
उन्होंने जानकारी दी कि पहले भाग में होडल से बिलासपुर चौक वाया नूंह 0.00 से 71.00 किलोमीटर तक सड़क को फॉरलेन बनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) के तहत 616.01 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इस कार्य के लिए लगभग 80 हेक्टेयर (197.6 एकड़) भूमि की आवश्यकता है, जो वन विभाग के पास प्रक्रियाधीन है। वन विभाग से मंजूरी तथा एनसीआरपीबी से ऋण स्वीकृत होने के बाद टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
उन्होंने आगे बताया कि दूसरे भाग में बिलासपुर चौक से कुलाना वाया पटौदी 71.00 से 96.00 किलोमीटर तक फॉरलेन बनाने के लिए 476.07 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है। यह प्रस्ताव भी वर्तमान में स्थायी वित्त समिति के पास विचाराधीन है। इस खंड के लिए लगभग 27 हेक्टेयर (66 एकड़) भूमि की आवश्यकता है। वन मंजूरी एवं एनसीआरपीबी से ऋण स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत टेंडर प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र ही फॉरलेन निर्माण कार्य शुरु किया जाएगा।
चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि राज्य में कपास उत्पादन प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत देशी कपास उगाने वाले किसानों को 3000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है।
श्री श्याम सिंह राणा आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के एक सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि खरीफ 2025 के दौरान कपास फसल के अंतर्गत 8 लाख 90 हजार एकड़ क्षेत्र का सत्यापन किया गया, जबकि “मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल” पर देशी कपास के अंतर्गत 16,801 एकड़ क्षेत्र का सत्यापन किया गया।
कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि हरियाणा में पंजीकृत एवं सत्यापित किसानों से “मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल” के माध्यम से निर्धारित उचित औसत गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होने की शर्त पर भारतीय कपास निगम द्वारा देशी कपास तथा बीटी कपास की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाती है। उन्होंने बताया कि अधिकांश समय देशी कपास के बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक रहते है, जिसके फलस्वरूप किसान अपनी उपज निजी व्यापारियों को बेचना अधिक उपयुक्त समझते हैं।
श्री राणा ने बताया कि राज्य सरकार फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर प्रयासरत है, ताकि अत्यधिक धान की खेती को कम किया जा सके। इस उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं एवं प्रोत्साहनों के माध्यम से कपास, मक्का, दलहन एवं अन्य कम जल-आवश्यक फसलों के लिए किसानों को 8000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त, कपास उत्पादन प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत देशी कपास उगाने वाले किसानों को 3000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है।
चंडीगढ़, 27 फरवरी- राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री विपुल गोयल ने सदन में बताया कि वर्ष 2022 से लेकर वर्ष 2026 तक फसल के नुकसान के लिए सरकार द्वारा मुआवजा वितरित कर दिया गया है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री विपुल गोयल शुक्रवार को सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों को हुए नुकसान के लिए वर्ष 2022-23 में करीब 494.05 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि स्वीकृत की गई थी जो उपायुक्तों को वितरण के लिए मैनुअल तरीक़े से स्वीकृत की गई थी। राज्य में वर्ष 2023-24 में फसल खराबा के लिए 720.29 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। रबी 2023 से मुआवज़ा राशि क्षतिपूर्ति पोर्टल के माध्यम से डीबीटी द्वारा सीधे लाभार्थियों को वितरित की जा रही है। वर्ष 2024-25 में फसल खराबा के लिए 265.57 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे और वर्ष 2025-26 में फसल खराबा के लिए 168.74 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुछ किसानों को त्रुटि के कारण, बैंक खाता उपलब्ध न करवाने या अन्य किसी कारण की वजह से राशि का वितरण नहीं किया जा सका। परंतु विभाग की तरफ से पटवारियों को निर्देश है कि त्रुटियों को जल्द ठीक करवाए ताकि राशि आवंटन किया जा सके।
डबवाली के स्टेडियम का किया जाएगा सुधारीकरण- खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम
चंडीगढ़, 27 फरवरी- हरियाणा के खेल राज्य मंत्री श्री गौरव गौतम ने कहा कि डबवाली शहर के स्टेडियम के सुधारीकरण के लिए जिला खेल अधिकारी ने एक करोड़ रुपये का अनुमान (estimate) बनाकर भेजा है, जिसे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) को भेज दिया है और जल्द ही स्टेडियम का सुधारीकरण करवाया जाएगा।
खेल मंत्री श्री गौरव गौतम शुक्रवार को बजट सत्र के दौरान सदन के एक सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिला सिरसा में शहीद भगत सिंह खेल परिसर और चौधरी दलबीर सिह इंडोर स्टेडियम हैं। डबवाली में श्री गुरु गोबिन्द सिंह खेल परिसर और चौटाला में चौधरी साहिब राम स्टेडियम उप मंडल स्तरीय खेल स्टेडियम हैं।
उन्होंने कहा कि जिला सिरसा में एक रिहायशी व 50 खेल नर्सिरयां हैं। सिरसा में 21 प्रशिक्षक और कनिष्ठ प्रशिक्षक हैं। सिरसा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में एक सुविधा केंद्र भी है।
चण्डीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा 08 सितम्बर, 1993 को अन्य पिछड़े वर्गों (ओ०बी०सी०) को क्रीमी लेयर से बाहर करने के लिए मानदंड तय किए थे। आय और संपत्ति की सीमा में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं, जबकि दूसरे मानदंडों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आदमपुर के विधायक श्री चन्द्र प्रकाश द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
श्री बेदी ने कहा कि वर्ष 2017 में, भारत सरकार ने क्रीमी लेयर की आय सीमा को बदलकर 8 लाख रूपये प्रति वर्ष कर दिया। इसके अनुसार, हरियाणा सरकार द्वारा भी 16 जुलाई,2024 की अधिसूचना के माध्यम से आय सीमा 8 लाख रूपये प्रतिवर्ष तय कर दी गई है।
उन्होंने सदन को अवगत करवाया कि केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश सरकार द्वारा अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को सभी प्रकार के लाभ दिए जा रहे हैं।
चंडीगढ़, 27 फरवरी- हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रीमती श्रुति चौधरी ने विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया कि प्रदेश में प्रत्येक मानसून सत्र से पूर्व नदियों की वार्षिक डी-सिल्टिंग की कोई निर्धारित परंपरा नहीं है।
उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में लगातार भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति के कारण नदियों में बड़े पैमाने पर गाद जमा हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए टांगरी और मारकंडा नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ाने तथा बाढ़ के खतरे को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2025 के दौरान विशेष विकासात्मक गतिविधि के रूप में डी-सिल्टिंग का कार्य किया गया। 30 जून 2025 से पहले टांगरी नदी से लगभग 5.50 लाख घन मीटर तथा मारकंडा नदी से लगभग 37,500 घन मीटर मिट्टी निकाली गई।
इसके अतिरिक्त, मानसून 2026 से पूर्व टांगरी, मारकंडा और बेगना नदियों से क्रमशः लगभग 53.85 लाख घन मीटर, 10.94 लाख घन मीटर और 0.60 लाख घन मीटर गाद निकालने का प्रस्ताव है। इन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
चंडीगढ़ , 27 फरवरी – हरियाणा की चिकित्सा शिक्षा एंव अनुसंधान मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि पुण्डरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव धेरड़ू में गुरु ब्रह्मानंद नर्सिंग कॉलेज को इस साल शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के एक सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थी।
आरती सिंह राव ने बताया कि विभाग द्वारा आगामी शैक्षणिक सत्र में इस कॉलेज को सार्वजनिक निजी भागीदारी व्यवस्था पर चलाने की संभावना तलाश की जा रही है।
चंडीगढ़, 27 फरवरी— हरियाणा के लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदेश में रेलवे से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आमजन को बेहतर यातायात सुविधा देने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। राज्य में विभिन्न रेलवे क्रॉसिंगों पर अंडरपास और ओवरब्रिज निर्माण के माध्यम से जाम की समस्या कम करने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कच्चा बेरी सड़क पर अंडरपास निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री श्री रणबीर गंगवा आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक श्री भारत भूषण बत्तरा द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि कच्चा बेरी सड़क स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर अंडरपास बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इस संबंध में सामान्य व्यवस्था रेखाचित्र को रेलवे विभाग द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है। यह कार्य राज्य सरकार के जमा कार्य के रूप में रेलवे विभाग द्वारा किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अंडरपास निर्माण के लिए 1346.60 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इसके लिए हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) की 1 कनाल 17 मरला भूमि भी शामिल है। इस भूमि को पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) के नाम हस्तांतरित करने की प्रक्रिया जारी है। भूमि उपलब्ध होते ही टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
चंडीगढ़, 27 फरवरी— हरियाणा के लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि हरियाणा में सड़कों और बाईपास के विकास को गति देने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि किसी भी सड़क या बाईपास के निर्माण के लिए जमीन की आवश्यकता होती है, जिसे सरकार ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से खरीदती है।
लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री रणबीर गंगवा हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक श्री भारत भूषण बत्तरा द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि कोसली बाईपास के निर्माण के लिए सरकार ने उच्च स्तरीय भूमि क्रय समिति से 2024 में 23.09 एकड़ भूमि 60 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से खरीदने का निर्णय लिया है। अब तक शहादत नगर गांव के 67 प्रतिशत और धनियां गांव के 51 प्रतिशत भूमि मालिकों ने अपने शपथ पत्र जमा करवा दिए हैं। धनियां गांव की कुछ भूमि अभी भी शेष है। उन्होंने विधायक से आग्रह किया कि वे भूमि मालिकों से बातचीत कर जमीन उपलब्ध करवाने में सहयोग करें, ताकि बाईपास निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू किया जा सके।
चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि असंध विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई गांवों में उपस्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कार्य करवाया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के एक सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थी। राव ने बताया कि असंध उपमंडल अस्पताल के अंतर्गत उप स्वास्थ्य केंद्र राहड़ा के भवन के निर्माण के लिए निविदा 16 फरवरी 2026 को आवंटित की गई है , इसका निर्माण कार्य जल्द किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, गांव थल में स्थित एकमात्र उप-स्वास्थ्य केंद्र वर्तमान में निजी किराए के भवन में कार्यरत है। इस उप-स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है परन्तु अभी तक उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं हुई है। भूमि की उपलब्धता होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने आगे बताया कि इस विधानसभा क्षेत्र के गांव खेड़ी-सरफली और असंध-॥ में भी उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण किया जाएगा, लेकिन अभी तक भवन निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है। इन दोनों गांवों के मामले में भी भूमि की उपलब्धता होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने सदन के एक अन्य सदस्य द्वारा थानेसर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव अमीन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तौर पर अपग्रेड करने के प्रश्न का जवाब देते हुए बताया कि फिलहाल नियमों के अनुसार यहां सीएचसी नहीं बनाई जा सकती। फिर भी इस मामले में पुनः जांच करवा लेंगे , आवश्यकता हुई तो अपग्रेड करने पर विचार किया जा सकता है।
हरियाणा में विश्वविद्यालयों के संविदा व अंशकालिक शिक्षकों को सेवा सुरक्षा देने का है विचार : शिक्षा मंत्री
–उच्च शिक्षा विभाग ने समिति गठित कर शुरू कर दी है प्रक्रिया”
चंडीगढ़ , 27 फरवरी – हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने बताया कि प्रदेश सरकार राज्य विश्वविद्यालयों में संविदात्मक तौर पर कार्यरत प्राध्यापकों के लिए “सेवा सुरक्षा विधेयक” का प्रारूप तैयार करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में अन्य विभागों से विचार विमर्श किया जा रहा है।
श्री ढांडा आज हरियाणा विधानसभा के सत्र के दौरान सदन के दो सदस्यों सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि विभाग को हरियाणा यूनिवर्सिटीज कॉन्ट्रैक्चुअल टीचर्स एसोसिएशन (HUCTA) और हरियाणा यूनिवर्सिटीज पार्ट-टाइम टीचर्स एसोसिएशन (HUPTTA) से रिप्रजेंटेशन प्राप्त हुआ था। इन संगठनों ने वर्ष 2024 के सेवा सुरक्षा अध्यादेश की तर्ज पर कानून बनाने की मांग की है। इस प्रस्ताव में शिक्षकों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा प्रदान करने की बात कही गई।
श्री महिपाल ढांडा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति से समिति का गठन का गठन किया गया जिसमें महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति को अध्यक्ष, इसी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को , गुरुग्राम विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डीन अकादमिक अफेयर्स को सदस्य के तौर पर नामित किया गया।
उन्होंने बताया कि इस समिति को उक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का दायित्व दिया गया। रिपोर्ट मिलने के बाद मामला दोबारा मुख्यमंत्री के पास निर्णय हेतु भेजा गया। इसके बाद 29 जुलाई 2025 को इस विषय पर मुख्यमंत्री के ओएसडी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में गहन चर्चा हुई। इसके परिणामस्वरूप निर्णय लिया गया कि राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत पूरे शैक्षणिक स्टॉफ का विस्तृत डाटा एक निर्धारित प्रारूप में एकत्र किया जाए।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने 30 जुलाई 2025 को सभी राज्य विश्वविद्यालयों को पत्र जारी किया। इस पत्र के माध्यम से आवश्यक जानकारी मांगी गई। विश्वविद्यालयों से प्राप्त आंकड़ों को संकलित किया गया। इसके बाद यह संपूर्ण रिपोर्ट मुख्यमंत्री को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गई।
इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से यह सुझाव दिया गया कि समिति की सिफारिशों पर अन्य संबंधित विभागों की भी राय ली जाए जिसके तहत 9 दिसंबर 2025 को विभिन्न विभागों चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग, आयुष विभाग, युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, खेल विभाग से सुझाव और टिप्पणियां मांगी गईं ताकि एक समग्र नीति तैयार की जा सके।
उन्होंने बताया कि हालांकि, निर्धारित समय में सभी विभागों से जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इसलिए 29 जनवरी 2026 को संबंधित विभागों को रिमाइंडर भेजा गया। वर्तमान में सभी विभागों से आवश्यक सूचनाओं का इंतजार किया जा रहा है ,जैसे ही यह जानकारी प्राप्त होगी, मामले को पुनः मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री श्री राजेश नागर ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा हरियाणा के किसानों की सभी फसलों की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने हेतु पारदर्शी एवं ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। धान की खरीद सरकारी एजेंसियों के माध्यम से भारत सरकार द्वारा निर्धारित दिशा – निर्देशों के अनुसार की जाती है।
राज्यमंत्री श्री राजेश नागर आज हरियाणा विधानसभा में एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने बताया कि सरकार ने धान की खरीद प्रक्रिया पर सरकार आरम्भ से ही निगरानी बनाए हुए थी। राज्य के सभी जिलों में संयुक्त कमेटी बनाकर खरीद के दौरान ही माह अक्टूबर एवं नवंबर 2025 के दौरान राइस मिलों में भंडारित धान की भौतिकी जांच करवाई गई। भौतिकी जाँच के दौरान पाई गई धान की कमी की अनियमितताओं को गंभीरता से लिया गया। सम्बंधित जिलों में प्रार्थमिक जाँच करने उपरांत जहाँ – जहाँ प्रथम दृष्टा अनियमितताएं पाई गई, वहां तुरंत अधिकारियों/कर्मचारियों तथा आढ़तियों एवं राइस मिलरों के विरुद्ध कुल 12 एफआईआर दर्ज करवाई गई। इसके साथ – साथ राज्य में खाद्य विभाग, खरीद संस्था तथा मार्केटिंग बोर्ड द्वारा 75 अधिकारियों / कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जाँच भी शुरू की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किये प्रयासों में राइस मिलरों से लगभग 6.37 करोड़ राशि की रिकवरी करते हुए सरकारी खज़ाने में जमा करवाई जा चुकी है। श्री नागर ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। आगामी रबी सीजन 2026 – 27 के दौरान राज्य में खाद्यानों की खरीद कार्य को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है जैसे कि पैदावार पर संशोधन, मोबाइल ऐप के माध्यम से जिओ टैग / QR code, आधारित गेट पास, वाहनों का आटोमेटिक कैप्चर, मंडी/खरीद केंद्र, गोदाम एवं राइस मीलों की जिओ फेंसिंग, मंडियों के प्रवेश एवं निकास द्वार पर कैमरे लगाने, किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन इत्यादि। राज्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि आगामी खरीफ खरीद सीजन 2026 – 27 के दौरान उपरोक्त संशोधनों के अतिरिक्त खरीद प्रक्रिया को ओर सदृढ़ करने हेतु राइस मीलों / गोदाम की भौतिक जाँच, मोबाइल ऐप के माध्यम से की जाएगी।
फर्जी एजेंटों पर वार, डंकी रूट पर प्रहार, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देगी सरकार : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
विदेश जाने के इच्छुक युवाओं के सहयोग के लिए सरकार का ‘विदेश सहयोग विभाग’ सक्रिय
मुख्यमंत्री ने सदन में विपक्ष पर साधा निशाना, कहा: ‘विदेश सहयोग विभाग’ की वेबसाइट पर विदेश में रोजगार, शिक्षा, व्यापार और निवेश से संबंधित जानकारी उपलब्ध
चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में ही युवाओं के कौशल और रोजगार के लिए अनेक कारगर कदम उठाए हैं। फिर भी कोई युवा विदेश जाना चाहता है तो उसकी मदद के लिए ‘विदेश सहयोग विभाग’ बनाया गया है। यह विभाग युवाओं को विदेश में रोजगार व शिक्षा प्राप्त करने में मदद करता है।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्षियों द्वारा रखी गई बातों पर जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘विदेश सहयोग विभाग’ की वेबसाइट पर विदेश में रोजगार, शिक्षा, व्यापार और निवेश से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। इसके अलावा, विदेश भेजने वाले अधिकृत एजेंटों की सूची भी उपलब्ध है। इस वेबसाइट के माध्यम से युवा विदेश जाने की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और सरकारी सहायता के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने सदन में प्रदेश के युवाओं से भी अपील करते हुए कहा कि वे गलत तरीके से विदेश भेजने वाले एजेंटों के झांसे में न आएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डंकी रूट से युवाओं को विदेश में भेजने वाले एजेंटों के खिलाफ सरकार कड़ी कार्रवाई कर रही है। विदेश भेजने के नाम पर धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए और ट्रैवल एजेंट्स को रेगुलेट करने के लिए कानून भी बनाया जा चुका है। सरकार एचकेआरएनएस के माध्यम से लीगल रूट से विदेशों में युवाओं को भेज रही है। उन्होंने कहा कि एचकेआरएनएल को मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स द्वारा रिक्रूटिंग एजेंट के लाइसेंस की सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है। इस विषय में समय-समय पर एचकेआरएनएल द्वारा विज्ञापन प्रकाशित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के विदेश सहयोग विभाग और हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड ने गत 3 जनवरी को पंचजन्य-2026 कार्यक्रम आयोजित किया था। इसके तहत प्रदेश के 210 युवाओं को दुबई जाने के लिए ऑफर लेटर दिए गए हैं। अब तक 2 चरणों में 390 युवाओं को इजराइल भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा कि हाल ही में, विदेश से 10 हजार लोगों की मांग आई है। हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से 7 हजार 600 पात्र लाभार्थियों को इजराइल तथा 100 लाभार्थियों को ओमान भेजने के लिए विज्ञापन जारी किए हुए हैं। इसकी चयन प्रक्रिया जारी है।
11 सालों में किसानों को मुआवजे और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्लेम के दिए 15 हजार 448 करोड़ : मुख्यमंत्री
चंडीगढ़, 27 फरवरी- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने प्रदेश में फसल खराब होने पर गत 11 सालों में किसानों को मुआवजे और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्लेम के रूप में अब तक 15 हजार 448 करोड़ रुपये की राशि दी है।
मुख्यमंत्री आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्षी सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों का ज़वाब दे रहे थे।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गत वर्ष अगस्त-सितंबर,2025 में हरियाणा में भारी बारिश के कारण कई जिलों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई थी जिसका उन्होंने दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। उन्होने बताया कि फसलों के नुकसान की भरपाई के लिए 15 सितम्बर तक ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला गया था। इस नुकसान की भरपाई के लिए 53 हजार 821 किसानों को 116 करोड़ 15 लाख 57 हजार रुपये की मुआवजा राशि जारी कर दी है। इसमें बाजरे की फसल के लिए 35 करोड़ 29 लाख रुपये, कपास के लिए 27 करोड़ 43 लाख रुपये, धान के लिए 22 करोड़ 91 लाख रुपये और गवार के लिए 14 करोड़ 10 लाख रुपये की राशि शामिल है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले भी सरकार ने बाढ़ के चलते पशु धन की हानि, मकान क्षति तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं के नुकसान की भरपाई के लिए 4 करोड़ 72 लाख रुपये की राशि जारी की है। उन्होंने विपक्षी सदस्यों द्वारा बड़ी संख्या में किसानों को मुआवजा नहीं मिलने की बात पर कहा कि इस बारे में हमने जांच करवाई थी। जांच के दौरान यह पाया गया कि पोर्टल पर पटवारियों द्वारा कुछ रकबे की डुप्लीकेट फोटो अपलोड की गई थी। इस तकनीकी विसंगति के कारण पटवारियों द्वारा डुप्लीकेट फोटो अपलोड करने का यह गंभीर मामला अभी सरकार के विचाराधीन है। इस पर अंतिम निर्णय होते ही शेष पात्र किसानों के संबंध में उचित कार्यवाही की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में फसल खराब होने पर गत 11 सालों में किसानों को मुआवजे और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत क्लेम के रूप में अब तक 15 हजार 448 करोड़ रुपये की राशि दी जबकि पहले कांग्रेस सरकार के 10 साल के शासनकाल में 1 हजार 138 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि जारी की गई थी। कांग्रेस सरकार तो किसानों की 269 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि बकाया छोड़कर चली गई थी। इसे हमने वर्ष 2014 में जनसेवा का दायित्व संभालने के बाद वर्ष 2015 में जारी किया।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष द्वारा फसलों के लिए एम.एस.पी से संबंधित उठाये गए मुद्दे पर कहा कि किसान हित हमारी नीतियों के केन्द्र में है। हमने अपने संकल्प पत्र 2024 में सभी 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने का संकल्प लिया था। जब 17 अक्तूबर, 2024 को विधिवत रूप से हमारी सरकार बनी तो हमने 19 दिसम्बर को ही किसानों की 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर करने की अधिसूचना जारी कर दी थी।
उन्होंने कहा कि आज हरियाणा देश का एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां किसानों की 24 फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जा रही है। इन्होने बताया कि पिछले 12 सीजन में अब तक 12 लाख किसानों के खातों में फसल खरीद के 1 लाख 64 हजार करोड़ रुपये डाले जा चुके हैं। इतना ही नहीं, हमने पिछले 11 सालों में किसानों को फसल खराबे के मुआवजे के रूप में 15 हजार 457 करोड़ रुपये दिये हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 7 हजार 233 करोड़ रुपये किसानों के खातों में डाले गए हैं।
श्री सैनी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे आबियाने को जड़ से खत्म किया है। हमने किसानों को नकली खाद, बीज और कीटनाशक बेचने व बनाने वालों से बचाने के लिए नया कानून बनाया है। इसके तहत ऐसे लोगों को 5 साल की सजा देने का प्रावधान किया है। खरीफ सीजन-2024 से किसानों की फसल खरीद का पैसा फसल का Exit Gate Pass कटने के 48 घंटे के अन्दर डी.बी.टी. के माध्यम से दे दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाया जाना कि यूरिया के बैग का वजन घटाकर किसानों को ठगा जा रहा है। यह बिल्कुल निराधार और तथ्यों से परे है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक नीम-कोटेड यूरिया, जिसमें 46 प्रतिशत नाइट्रोजन होती है, उसके 45 किलोग्राम के बैग का मूल्य 266.50 रुपये (जीएसटी सहित) पहले की तरह है। इसके वजन या मूल्य में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं किया गया है। किसान आज भी उसी मात्रा और उसी निर्धारित दर पर नीम-कोटेड यूरिया प्राप्त कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि गत 28 जून, 2023 को केंद्र सरकार ने सल्फर-कोटेड यूरिया, जिसे ‘यूरिया गोल्ड’ कहा जाता है, अधिसूचित किया। यह एक पृथक एवं उन्नत उर्वरक उत्पाद है, जिसमें 37 प्रतिशत नाइट्रोजन के साथ 17 प्रतिशत सल्फर शामिल है।
उन्होंने कहा कि देश की अधिकांश कृषि भूमि में सल्फर की कमी पाई जाती है, जिससे विशेष रूप से तिलहन और दलहनी फसलों की उत्पादकता प्रभावित होती है। यूरिया गोल्ड न केवल नाइट्रोजन उपयोग दक्षता को बढ़ाता है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता सुधारने में भी सहायक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने 5 जनवरी, 2024 को 40 किलोग्राम के यूरिया गोल्ड बैग का अधिकतम मूल्य 266.50 रुपये निर्धारित किया था, जिसे 23 जनवरी, 2026 से घटाकर 254 कर दिया गया है। अर्थात सरकार ने किसानों को राहत दी है, न कि कोई अतिरिक्त बोझ डाला है। उन्होंने बताया कि किसानों के लिए दोनों विकल्प, ‘नीम कोटेड यूरिया’ और ‘यूरिया गोल्ड’ उपलब्ध हैं, ताकि वे अपनी फसल और मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार किसी का चयन कर सकें। रबी सीजन 2025-26 में दिनांक 12 फरवरी, 2026 तक राज्य में 10 लाख 32 हजार 116 मीट्रिक टन नीम कोटेड यूरिया उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि किसानों को यूरिया के नाम पर ठगने की विपक्षी सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई दम नहीं है। ऐसे मुद्दे उठाकर ये बता रहे हैं कि किसानों के हितों को लेकर वे कितने गंभीर हैं।
खिलाड़ियों के सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है सरकार : श्री नायब सिंह सैनी
चंडीगढ़, 27 फरवरी- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्त्तमान सरकार खिलाड़ियों के सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर पूरी तरह संवेदनशील और प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्षी सदस्यों द्वारा खेल एवं खिलाडियों से संबंधित उठाए गए मुद्दों का ज़वाब दे रहे थे।
उन्होंने विपक्ष के सदस्यों द्वारा खिलाड़ियों का सम्मान नहीं, खेल सुविधाएं नदारद होने के सवाल पर कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व में पिछले 11 वर्षों में खेलों के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति हुई है। ओलंपिक हो या पैरालंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स हों या एशियन गेम्स, हर जगह हमारे खिलाड़ियों ने भारत का परचम लहराया है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसे अभियानों ने खेलों को जन-आंदोलन बनाया है और युवाओं को नई दिशा दी है।
हमने पूरे राज्य में खेल सुविधाओं के व्यापक विकास का बीड़ा उठाया है। पिछले 11 वर्षों में खेल अवसंरचना पर 989 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। खेल विभाग के बजट को हमने दोगुणे से भी अधिक बढ़ाया है। जहां वर्ष 2014-15 में यह 275 करोड़ रुपये था, वहीं इस वित्त वर्ष में 590 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। आज हरियाणा में 3 राज्य स्तरीय खेल परिसर, 21 जिला स्तरीय खेल स्टेडियम, 25 उपमंडल स्टेडियम, 163 राजीव गांधी ग्रामीण खेल परिसर, 245 ग्रामीण स्टेडियम और 382 इनडोर जिम गांव-गांव तक उपलब्ध हैं। इनके अतिरिक्त 10 स्विमिंग पूल, 11 सिंथेटिक एथलेटिक्स ट्रैक, 14 हॉकी एस्ट्रोटर्फ, 2 फुटबॉल सिंथेटिक सतह और 9 बहुउद्देशीय हॉल भी विकसित किए गए हैं। वर्ष 2022 में खेल विश्वविद्यालय की स्थापना भी हमारी सरकार की दूरदृष्टि का ही प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने केवल खेल सुविधाएं ही नहीं दीं, बल्कि खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का भी ठोस प्रबंध किया है। क्लास-वन से क्लास-फोर तक की सीधी भर्ती में खिलाड़ियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है। अब तक 231 खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। पदक विजेता खिलाड़ियों को 6 करोड़ रुपये तक का नकद पुरस्कार दिया जाता है। अब तक 641 करोड़ रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि खिलाड़ियों को प्रदान की जा चुकी है। ये केवल आंकड़े नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के प्रति हमारी सरकार की संवेदनशीलता, सम्मान और संकल्प का जीवंत प्रमाण हैं।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के सदस्यों द्वारा लगाए गए प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ने के आरोप पर जवाब दिया कि हर बार की तरह इस बार तो सी.एम.आई.ई. नामक संस्था की किसी रिपोर्ट का भी जिक्र नहीं किया। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की Hand Book of Statistics on Indian Stat स्पष्ट बताती है कि हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्र की बेरोजगारी दर अब केवल 3.1 प्रतिशत है। यह उत्तरी भारत के सभी राज्यों में सबसे कम है। हमारे पड़ोसी राज्यों जम्मू कश्मीर व हिमाचल में बेरोजगारी की दर 5 प्रतिशत, दिल्ली में 6 प्रतिशत, पंजाब में 5.4 प्रतिशत और राजस्थान में 3.2 प्रतिशत है। साल 2022-23 की तुलना में 2023-24 में स्पष्ट कहा गया है कि हरियाणा ने ग्रामीण बेरोजगारी कम करने में बहुत अच्छा काम किया है।
उन्होंने कहा कि इस दौरान हिमाचल में बेरोजगारी दर 1.5 प्रतिशत बढ़ी और जम्मू कश्मीर में भी 1.6 प्रतिशत बढी। वहीं राजस्थान में 0.2 प्रतिशत और पंजाब में सिर्फ 0.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।जबकि हरियाणा में यह गिरावट 2.7 प्रतिशत दर्ज की गई। इसी तरह, हरियाणा में शहरी बेरोजगारी दर केवल 4 प्रतिशत है। यह भी उत्तरी भारत के राज्यों की तुलना में बहुत कम है। हिमाचल में शहरी बेरोजगारी दर 10 प्रतिशत, जम्मू कश्मीर में 11.4 प्रतिशत, पंजाब में 5.6 प्रतिशत, राजस्थान 7.7 प्रतिशत और चण्डीगढ़ में 7.1 प्रतिशत दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी हटाने के ठोस प्रयास किए हैं। हमने वर्ष 2014 से अब तक 1 लाख 80 हजार युवाओं को योग्यता के आधार सरकारी नौकरियां दी हैं। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के 10 साल के शासनकाल में केवल 86 हजार सरकारी नौकरियां दी गई। उन्होंने कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम का गठन करके प्रदेश के युवाओं को प्राइवेट ठेकेदारों के शोषण से मुक्त किया है। यही नहीं, हमने तो इसी निगम के माध्यम से उन्हें 58 साल की आयु तक नौकरी करने का कानूनी अधिकार एक लाख से भी अधिक कच्चे कर्मचारियों को दिया। हमने 1 लाख 22 हजार युवाओं को इस निगम के माध्यम से नौकरी दी है।
चण्डीगढ, 27 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह ने राज्यपाल के अभिभाषण पर बजट सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस विधायक श्रीमती पूजा मुलाना द्वारा राज्यपाल के अभिभाषण में हरियाणा के “नागरिक” शब्द पर आपत्ति जताकर हरियाणा के “निवासी” शब्द प्रयोग करने का लिखित सुझाव देना केवल शब्दों का प्रश्न नहीं है, बल्कि इनकी सोच का अंतर दर्शाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विषय पर उनका स्पष्ट और तर्कसंगत मत है कि “नागरिक” शब्द हमारे संविधान, लोकतांत्रिक अधिकारों और कर्तव्यों की भावना से जुड़ा है, जबकि, “निवासी” शब्द मात्र भौगोलिक उपस्थिति का संकेत देता है। निवासी वह हो सकता है, जो किसी स्थान पर रहता हो, परंतु नागरिक वह है, जो उस प्रदेश की प्रगति, नीति-निर्माण, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सामाजिक उत्तरदायित्व में भागीदार हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की जनता केवल यहां रहने वाली आबादी नहीं, बल्कि इस राज्य की ताकत एवं पहचान है और भविष्य की निर्माता है।“नागरिक” शब्द प्रदेशवासियों को अधिकारों के साथ कर्तव्यों की भी याद दिलाता है जैसे मतदान का अधिकार, कानून के प्रति सम्मान, कर दायित्व और समाज के प्रति जिम्मेदारी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की धरती ने देश को वीर सैनिक, परिश्रमी किसान, विश्वस्तरीय खिलाड़ी और उद्यमी दिए हैं स ऐसे गौरवशाली लोगों को “निवासी” कहकर सीमित करना, उनके योगदान का संकुचन होगा। उन्होंन कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में हमारी डबल इंजन सरकार प्रत्येक नागरिक को सशक्त, सुरक्षित और सम्मानित बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। “हरियाणा के नागरिक” शब्द केवल संबोधन नहीं, बल्कि समान अधिकार, समान अवसर और साझा जिम्मेदारी का उद्घोष है और यही लोकतंत्र की वास्तविक आत्मा है। उन्होंने कहा कि अतः राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में संशोधन की आवश्यकता नहीं है। “नागरिक” शब्द का अर्थ और इसकी भावना स्वतः ही स्पष्ट है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण की चर्चा में सभी सदस्यों ने अपने-अपने क्षेत्र के विकास की जरूरतों को भी उठाया है। सभी सदस्यों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि उनकी मांगों को पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
रिसर्च और एआई पर बड़ा दांव: हरियाणा में स्टेट रिसर्च फंड और ‘हरियाणा ए.आई. मिशन’ की तैयारी: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
संसाधनों की कमी से अटके आइडियाज को मिलेगा सहारा, कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में शोध को बढ़ावा
विश्व बैंक से 474 करोड़ रुपये की सहायता का आश्वासन, एआई आधारित नीतियों पर जोर
गुरुग्राम और पंचकूला में स्थापित होंगे एआई हब, 50 हजार युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कई बेहतरीन आइडिया संसाधनों की कमी से पूरे नहीं हो पाते। ऐसे में इन आइडियाज को हकीकत में बदलने के लिए सरकार ने ‘हरियाणा स्टेट रिसर्च फंड’ स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शोध को बढ़ावा देने के लिए 20 करोड़ रुपये के शुरुआती कोष से स्थापित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्षियों द्वारा रखी गई बातों पर जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में एआई अनुसंधान और विकास को अपना रहा है। यह तकनीक अब सिर्फ भविष्य की कल्पना नहीं रही, बल्कि आज यह हमारे घरों, स्कूलों, अस्पतालों, उद्योगों और प्रशासनिक प्रणालियों में गहरी पैठ बना चुकी है।
उन्होंने कहा कि सरकार हरियाणा में ए.आई. के उपयोग को प्रोत्साहित कर रही है। इसमें सरकार नीतियों को तकनीकी नवाचार के साथ मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित कर रही है, ताकि ए.आई. का लाभ अत्यंत सुरक्षित, समावेशी तथा न्यायसंगत रूप से सभी तक पहुंचे। इसलिए ‘हरियाणा ए.आई. मिशन’ की स्थापना का प्रस्ताव है। इसके लिए विश्व बैंक ने प्रदेश सरकार को 474 करोड़ रुपये की सहायता देने का आश्वासन दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मिशन के तहत गुरुग्राम और पंचकूला में एक-एक ‘हब’ स्थापित किया जाएगा, जहां 50 हजार युवाओं को नई तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसका सीधा लाभ स्टार्टअप्स को कुशल कार्यबल के रूप में मिलेगा।
चण्डीगढ, 27 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने राज्यपाल के अभिभाषण पर बजट सत्र के दौरान विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस ने प्रदेश को कर्ज में डुबोने का आरोप लगाया है, जबकि हमारी सरकार का इरादा और दिशा एकदम साफ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शासन काल में वर्ष 2004-05 से 2014-15 तक दस साल की अवधि के दौरान, कर्ज देनदारियों में 458.30 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। जबकि, हमारे 10 साल के शासनकाल में 2014-15 से 2024-25 के बीच, कर्ज देनदारी में 227.49 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जोकि इनकी सरकार की तुलना में आधी से भी कम है।
उन्होंने कहा कि बजट अनुमान 2025-26 के अनुसार, राज्य का राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेल उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.67 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जोकि फिसकल रिस्पोंसिबिलिटी एण्ड बजट मैनेजमेंट एक्ट के तहत 15वें वित्त आयोग द्वारा निर्धारित 3 प्रतिशत की सीमा से कम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने पिछले 10 वर्षों में ऋण सेवा के लिए 3 लाख 66 हजार 16 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। इसमें 1 लाख 61 हजार 796 करोड़ रुपये ब्याज भुगतान और 2 लाख 4 हजार 220 करोड़ रुपये मूलधन शामिल हैं। राज्य द्वारा मूलधन और ब्याज का भुगतान नियमित रूप से किया जा रहा है और अब तक किसी भी अवसर पर ऋण किस्त और ब्याज के भुगतान में कोई डिफ़ॉल्ट नहीं हुआ है। इसका तात्पर्य है कि राज्य की ऋण स्थिति टिकाऊ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष द्वारा राशन कार्ड से संबंधित मुद्दा पिछले बजट अधिवेशन में भी उठाया गया था। सदन में मार्च, 2025 में बजट अधिवेशन के दौरान 27 मार्च को बी.पी.एल. कार्डों के विषय पर अपनी बात रखी थी। उन्होंने कहा कि उस समय विपक्ष ने 50 लाख से अधिक बी.पी.एल. राशन कार्ड बनाने पर आपत्ति जताई थी। ये रिकार्ड की बात है, रिकार्ड निकाल कर इसे चैक करवा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं की वजह से तो लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है और वे स्वतः ही गरीबी रेखा से बाहर आ गये हैं। सरकार ने किसी का राशन कार्ड नहीं काटा है बल्कि उनका जीवन स्तर ऊपर उठाकर उन्हंे गरीबी रेखा से बाहर निकालने में मदद की है। लेकिन, लगता है कि विपक्ष को गरीबों के जीवन स्तर में सुधार होने पर भी आपत्ति है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सदन की भावना के अनुरूप हरियाणा की जनता से अनुरोध किया था कि जिन लोगों ने जिस किसी भी कारण से, गलती से या गलत नीयत से पी.पी.पी. में अपनी इनकम कम दिखाई है, वे इसे ठीक करवा लें। वे स्वयं ही बीपीएल कैटेगरी से बाहर हो जाएंगें। इसके बाद, अनेक लोगों ने अपने नाम बी.पी.एल. सूची से कटवा लिए हैं। इनके अलावा, सरकार ने दोबारा इनकम वेरिफिकेशन भी करवाई। इस दौरान जिन लोगों की आय 1 लाख 80 हजार रुपये से अधिक थी, उनको बी.पी.एल. सूची से बाहर कर दिया गया है।
चण्डीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश में शांति, सुरक्षा और कानून के राज को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। आज इसके सकारात्मक परिणाम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह आज राज्यपाल के अभिभाषण के जवाब में विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों के दौरान बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि हरियाणा के लिए गर्व की बात है कि नए आपराधिक कानूनों को पूर्ण रूप से लागू करने में हरियाणा देश में दूसरे स्थान पर है। राज्य में बेहतर जांच और मॉडर्न पुलिसिंग के परिणास्वरूप 1 जुलाई, 2024 से अब तक पंजीकृत मामलों में सज़ा की दर बढ़कर 74.13 प्रतिशत हो गई है। वर्ष 2004 से 2014 तक मर्डर के मामलों में वार्षिक 3.81 प्रतिशत की वृद्धि थी। जबकि, वर्ष 2014 से 2025 तक यह वार्षिक दर घटकर 1.75 प्रतिशत रह गई है। इसी प्रकार, वर्ष 2004 से 2014 तक दंगों के मामलों में वार्षिक 9.74 प्रतिशत की वृद्धि थी। जबकि, वर्ष 2014 से 2025 तक यह वार्षिक दर घटकर 2.41 प्रतिषत रह गई है।
उन्होंने बताया कि पुलिस बल के आधुनिकीकरण पर 300 करोड़ रुपये की राशि खर्च की है। साथ ही, 5,500 नए पुलिस जवानों की भर्ती प्रक्रिया चल रही है। डायल-112 के ज़रिए 9 मिनट और 44 सेकंड का तेज़ रिस्पॉन्स टाइम जवाबदेह गवर्नेंस सिस्टम की निशानी है।
’नशा-मुक्त हरियाणा के संकल्प के साथ, हमारी सरकार एक्शन प्लान-2029 के साथ मज़बूती से आगे बढ़ रही है’
उन्होने बताया कि हरियाणा सरकार नशे के पदार्थों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। इसके लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है, नषे के सौदागरों पर षिकंजा कसा जा रहा है और नशा पीड़ितों की पहचान करके उनका इलाज किया जा रहा है। नशे के विरुद्ध लड़ाई में पड़ोसी राज्यों का सहयोग लेने के लिए हरियाणा के पंचकुला में अंतर्राज्यीय सचिवालय स्थापित किया है। इस सचिवालय में उत्तर भारत के 7 राज्य – हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, उत्तराखंड और राजस्थान के प्रतिनिधि आपस में नशे पर रोकथाम लगाने के लिए सूचनाओं को सांझा करते हैं।
ड्रग्स के खिलाफ राष्ट्रीय युद्ध के लिए गृह मंत्रालय ने मानस पोर्टल षुरू किया है। इसकी निगरानी स्वयं केन्द्रीय गृह मंत्री जी करते हैं। इस पर नशे के अवैध कारोबार की जानकारी देने वाले व्यक्ति का नाम गुप्त रखा जाता है। नशा-मुक्त हरियाणा के संकल्प के साथ, हमारी सरकार एक्शन प्लान-2029 के साथ मज़बूती से आगे बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में NDPS के 3,823 मामले दर्ज किए गए तथा इनमें 5,119 लोगों को गिरफ्तार किया गया। जबकि, वर्ष 2024 में 3,331 मामले दर्ज किए गए तथा 5,094 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसी प्रकार, NDPS के कॉमर्शियल मात्रा के मामलों में वर्ष 2024 में पिछले वर्ष की तुलना में 37 प्रतिशत तथा गिरफ्तारियों में 69 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में NDPS के 54 प्रतिशत केसों में सजा हुई है, जबकि पिछले वर्ष 48 प्रतिशत केसों में सजा हुई थी। नशा तस्करों की लगभग 53 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है तथा 111 संपत्तियों को गिराया गया है। नशा मुक्ति अभियान चलाकर 3,350 गांवों तथा 876 वार्डों को नशा मुक्त घोषित किया गया है। इसी प्रकार, नशा करने वाले 7,523 लोगों की पहचान कर उनका इलाज करवाया गया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘हरियाणा उदय’ अभियान के तहत 2,482 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 16 लाख 50 हजार लोगों ने भाग लिया। हरियाणा ने पिछले पांच सालों में नषीले पदार्थों की तस्करी में लगे करीब 26 हजार अपराधियों को जेल भेजा है। पिछले साल ऐसे करीब 5 हजार लोग गिरफ्तार हुए। इसमें से करीब एक हजार बड़े तस्कर थे, जिनसे कमर्शियल क्वांटिटी में ड्रग्स की रिकवरी हुई।
उन्होंने बताया कि अपराधियों को सजा दिलाने के कार्य में तेजी लाने में फास्ट ट्रैक कोर्ट, त्वरित एफ.एस.एल. रिपोर्ट एवं अंडर-ट्रायल मुकदमों की पैरवी बड़े कारगर साबित हुए हैं। हम अंडर ट्रायल मुकदमों में सजा की दर को 41 प्रतिषत से बढ़ाकर 54 प्रतिषत करने में सफल हुए हैं। नषे के खिलाफ दूसरा कदम नशे की आदत के शिकार लोगों का उपचार व उनका पुनर्वास करना है। इस दिषा में हमने हरियाणा में 161 नशा मुक्ति और परामर्ष एवं पुनर्वास केन्द्र खोले हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नशे के खिलाफ तीसरा कदम लोगों में जागरूकता फैलाना है। इसके लिए हम नशे के विरुद्ध जागरूकता पैदा करने के लिए संतों-महात्माओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और नागरिक संस्थाओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
वृद्धावस्था पेंशन पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का विपक्ष पर तीखा हमला
झूठ और भ्रम की राजनीति बेनकाब, पेंशन काटने का आरोप निराधार: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
काग्रेस कार्यकाल पर उठाये सवाल, कहा: अपात्रों को पेंशन, बड़ा घोटाला
चंडीगढ़, 27 फरवरी- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने वृद्धावस्था पेंशन को लेकर विपक्ष द्वारा रखी गई बातों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्षी बुजुर्गों की पेंशन काटने जैसे संवेदनशील विषय पर झूठ और भ्रम फैलाकर सस्ती राजनीति चमकाने में लगे हैं। सरकार किसी की पेंशन छीनने नहीं, बल्कि हर पात्र व्यक्ति तक उसका हक पहुंचाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि विपक्षियों का क्या झूठ बोलकर राजनीति करना ही एकमात्र एजेंडा रह गया है?
मुख्यमंत्री शुक्रवार को विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान राज्यपाल अभिभाषण पर विपक्षियों द्वारा रखी गई बात पर जवाब दे रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी सरकार पारदर्शी सिस्टम लेकर आई है। जो लूट कांग्रेस के समय चलती थी, उसे उनकी सरकार ने रोका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 1 लाख 30 हजार मामलों में कुछ गलतियां मिलीं, जो उम्र, आय इत्यादि से संबंधित थीं। इनकी पेंशन बंद नहीं की गई है। बल्कि, इन कमियों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इतिहास भी याद रखना चाहिए। 1992 में कांग्रेस सरकार ने पहली बार 10 हजार रुपये की आय सीमा रखी और उस समय पेंशन 100 रुपये थी। वर्षों तक उन्होंने सीमा नहीं बदली। वर्ष 1992 से लेकर वर्ष 2009 तक कांग्रेस व इनेलो की सरकारों ने ना तो आय सीमा हटाई और ना ही कभी बढ़ाई गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की बीजेपी सरकार ने वर्ष 2023 में आय सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये की और लाभार्थियों की संख्या 17 लाख 98 हजार तक पहुंचाई। आज 20 लाख से ज्यादा बुजुर्ग पेंशन ले रहे हैं। अगर पेंशन काटी गई होती, तो यह संख्या कैसे बढ़ती? इस सवाल का जवाब कौन देगा?
उन्होंने कहा कि आज हमारी सरकार ने 11 साल में पेंशन को 1,000 से बढ़ाकर 3,200 रुपये मासिक किया है। यह सबसे बड़ी 2,200 रुपये की बढ़ोतरी है। यह बुजुर्गों के सम्मान का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के समय में 50 हजार से अधिक अपात्र लोगों को पेंशन देने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय में वर्ष 2011 में वृद्धावस्था पेंशन घोटाला सामने आया था। उसके अनुसार 50 हजार से अधिक ऐसे लोगों की पेंशन जारी की गई, जो या तो अपात्र थे या स्वर्गवासी हो चुके थे। उन्होंने कहा कि उस समय 16 जिलों में 15 लाख 98 हजार 126 लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही थी। जब पेंशन लेने वालों को बैंक खाते खुलवाने के लिए कहा गया, तो केवल 11 लाख 44 हजार 98 लोगों ने ही खाते खुलवाए।
उन्होंने कहा कि विपक्षियों के समय में सिस्टम पूरी तरह जंग खा चुका था। अपात्रों को पेंशन मिल रही थी तथा पात्र लोग पेंशन बनवाने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे थे। बीजेपी सरकार ने सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश की डबल इंजन सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन सहित सभी सामाजिक सुरक्षा पेंशन को पारदर्शी ढंग से पात्र लोगों तक पहुंचाने का काम किया है। विपक्षी दलों के समय में तो अपात्र लोग लाभ ले जाते थे और पात्र लोग वंचित रह जाते थे। प्रदेश की वर्तमान सरकार सेवा, संवेदना और सत्य की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र बुजुर्ग पेंशन से वंचित नहीं रहेगा। लेकिन जो लोग झूठ की दुकान चलाकर जनता को भ्रमित कर रहे हैं, उन्हें जनता की अदालत में जवाब देना होगा।
मुद्दाविहीन विपक्ष झूठे आरोपों से सदन को कर रहा गुमराह – मुख्यमंत्री
विपक्ष द्वारा 5000 करोड़ धान घोटाले का दावा तथ्यहीन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार की नीतियां किसान केंद्रित हैं, सरकार किसान के एक एक दाने को एमएसपी पर खरीद रही — मुख्यमंत्री
चंडीगढ़ 27 फरवरी- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा में धान खरीद के 5000 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष बिना तथ्यों के सदन को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी के पास कोई प्रमाण है तो वह सदन के पटल पर रखे।
मुख्यमंत्री ने विधायक श्री अशोक अरोड़ा द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 5000 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा पूरी तरह तथ्यहीन है। धान की खरीद भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार अधिकृत सरकारी एजेंसियों के माध्यम से की जाती है और इसकी निगरानी सुदृढ़ तंत्र से सुनिश्चित की जाती है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के समय तो सब जानते हैं कि कितने बड़े—बड़े घोटाले होते थे। इनके समय में व्यवस्था सही नहीं थी, जिससे किसानों को नुकसान होता था। जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने व्यवस्था में बदलाव किया है, जिससे किसानों को भी अपनी आय का पता लगने लगा है। पहले तो किसानों को यही पता नहीं होता था कि उसकी आय कितनी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने धान खरीद प्रणाली में व्यापक सुधार किए हैं। खेत स्तर से गेट पास की डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय किसानों को भुगतान के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था, कई बार एक-एक वर्ष तक राशि लंबित रहती थी, जबकि आज किसानों को समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है और उन्हें अपनी आय की स्पष्ट जानकारी मिल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी स्तर पर फर्जी पर्ची, डुप्लीकेट प्रविष्टि या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता सामने आई है तो सरकार ने उसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से कहा कि इनके समय में जो फर्जीवाड़ा हुआ, उस पर तो कोई कार्रवाई की होगी, वही सदन को बताएं। उन्होंने कहा कि आज चिंता किसानों को नहीं हो रही है, बल्कि कांग्रेस को हो रही है। विपक्ष केवल आरोप लगाने के बजाय रचनात्मक सुझाव दें। सरकार हर सकारात्मक सुझाव पर विचार करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि यह विषय महत्वपूर्ण है और सभी को मिलकर व्यवस्था को और मजबूत करना चाहिए ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम कर रही है। जहां-जहां शिकायतें प्राप्त हुई हैं, वहां जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विपक्ष के समय में तो फर्जीवाड़े होते रहते थे, कोई पकड़ में नहीं आता था
मुख्यमंत्री ने कहा कि धान की खरीद सरकारी एजेंसियों के माध्यम से भारत सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाती है और इस प्रक्रिया की निगरानी बहु-स्तरीय तंत्र के माध्यम से सुनिश्चित की जाती है। सालों-साल यही व्यवस्था चलती रही है, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसमें बदलाव किया है। मंडी में धान की आवक से लेकर राइस मिलर्स से चावल की वापसी तक हर कदम पर चेक लगाया है। इस बदलाव को विपक्ष देखना ही नहीं चाहते। इनके समय में तो फर्जीवाड़े होते रहते थे, कोई पकड़ में नहीं आता था। लेकिन, वर्तमान राज्य सरकार ने नई व्यवस्था में कोई भी फर्जीवाड़ा होता है तो पकड़ में आ जाता है। उस पर कड़ी कार्रवाई भी होती है। सरकार सिस्टम में लगातार सुधार जारी रखे हुए हैं और इसे चाक-चौबंद बनाकर रहेंगे।
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसान अपने खेत में धान लगाता है तो उसका पंजीकरण मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर करता है। इसका सत्यापन करवाया जाता है। इससे यह पता चलता है कि कितने क्षेत्र में धान लगाया है और उपज का भी सही आकलन किया जाता है। इसलिए यह कहना सही नहीं है कि पोर्टल पर सत्यापन की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है। गत खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान राज्य की खरीद संस्थाओं द्वारा 3 लाख 1 हजार किसानों से 62 लाख 13 हजार मीट्रिक टन नान-बासमती धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई है। गत सीजन में, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के अनुसार, धान (गैर-बासमती) के लिए कुल 30 लाख 17 हजार 968 एकड़ क्षेत्र का सत्यापन किया गया। राज्य में अनुमानित उत्पादन 97 लाख 86 हजार मीट्रिक टन आंका गया। खरीद नीति पूरी तरह डेटा-आधारित है। मंडियों में जितनी फसल आई, उसी का वजन, सफाई और तुलाई के बाद वास्तविक खरीद दर्ज की गई।
धान खरीद में अनियमितताओं पर सख्ती, 12 एफआईआर दर्ज, 6.37 करोड़ की रिकवरी की
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल रजिस्ट्रेशन, ऑनलाइन गेट पास और बैंक खातों में सीधा भुगतान जैसे प्रावधान लागू किए गए। कुछ मंडियों में अनियमितताओं की शिकायतें भी प्राप्त हुईं। इन मामलों में गंभीरता से जांच की है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर एवं नवंबर 2025 के दौरान सभी जिलों में संयुक्त कमेटियां गठित कर राइस मिलों में भंडारित धान की भौतिक जांच करवाई है। जहां-जहां प्रथम दृष्टया अनियमितता पाई गई, वहां संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों, आढ़तियों एवं राइस मिलरों के विरुद्ध कुल 12 एफ.आई.आर. दर्ज करवाई गई हैं। इन मामलों की जांच निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ की जा रही है तथा संलिप्त व्यक्तियों की गिरफ्तारियां भी की गई हैं। इसके अतिरिक्त खाद्य आपूर्ति विभाग, खरीद एजेंसियों एवं मार्केटिंग बोर्ड द्वारा 75 अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच आरंभ की गई है। इनमें से 28 को निलंबित किया जा चुका है। इनके अलावा, राइस मिलरों से 6 करोड़ 37 लाख रुपये की राशि की रिकवरी कर सरकारी खजाने में जमा करवाई जा चुकी है। इससे स्पष्ट है कि वर्तमान सरकार किसी भी स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करती है। संदिग्ध धान के उठान से जुड़े श्रम, ढुलाई एवं परिवहन ठेकेदारों की अदायगी पर भी रोक लगा दी गई है और उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।
सरकार के आंकड़े वास्तविक स्थिति पर आधारित, किसी प्रकार की कृत्रिम वृद्धि या हेराफेरी नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ सदस्यों द्वारा फसल आवक और खरीद के आंकड़ों में अंतर का मुद्दा उठाया गया है। किसी भी मंडी में आवक का आंकड़ा अनुमानित होता है, जबकि खरीद का आंकड़ा तुलाई के बाद वास्तविक वजन के आधार पर दर्ज होता है। उदाहरण के तौर पर, जिला अंबाला, फतेहाबाद, कैथल, करनाल और सिरसा में आवक एवं खरीद के आंकड़ों में कोई असामान्य अंतर नहीं पाया गया है। 30 से 50 प्रतिशत अंतर होने का आरोप निराधार एवं तथ्यहीन है। जिला महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी में खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान धान की आवक एवं खरीद शून्य रही। यह दर्शाता है कि सरकार के आंकड़े वास्तविक स्थिति पर आधारित हैं और किसी प्रकार की कृत्रिम वृद्धि या हेराफेरी नहीं की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार द्वारा 10 प्रतिशत टूटे चावल की अनुमति के साथ सी.एम.आर. के लिए राज्य को 8 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था। यह लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया गया है और भारतीय खाद्य निगम को समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि दिसंबर, 2025 के सत्र में भी ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से यह विषय उठाया गया था। सरकार ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच और सुधारात्मक कदम उठाए। डबल इंजन सरकार प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सक्रिय शासन में विश्वास करती है।
ई-खरीद पोर्टल किया जा रहा अपग्रेड, जियो-टैगिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन और सीसीटीवी से पारदर्शिता होगी सुनिश्चित
श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ई-खरीद पोर्टल को अपग्रेड किया जा रहा है। आगामी रबी एवं खरीफ सीजन 2026-27 में जियो-टैगिंग आधारित गेट पास, वाहनों का ऑटोमैटिक नंबर प्लेट कैप्चर, मंडियों, गोदामों और राइस मिलों की जियो-फेंसिंग, प्रवेश एवं निकास द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। साथ ही, किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन, तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से भौतिक जांच जैसे प्रावधान भी लागू किए जाएंगे। भौतिक जांच अब पूरी तरह जियो-फेंसिंग के अंतर्गत होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि नियुक्त कर्मचारी स्थल पर पहुंचकर ही निरीक्षण करें। इससे किसी भी प्रकार की कागजी खानापूर्ति की संभावना समाप्त हो जाएगी। हमने 11 दिसंबर, 2025 को प्रति एकड़ उपज सीमा में संशोधन भी किया है। ताकि, वास्तविक उत्पादन और खरीद के आंकड़ों में सामंजस्य स्थापित हो सके।
उन्होंने कहा कि बाजरा किसानों के हित में भी सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है। भावांतर भरपाई योजना के अंतर्गत 575 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किसानों को लाभ देने का निर्णय लिया गया। लगभग 1 लाख 57 हजार किसानों से 6 लाख 23 हजार मीट्रिक टन बाजरे की खरीद की गई और 358 करोड़ 62 लाख रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में स्थानांतरित की जा रही है।
हरियाणा की पहल से खाद सब्सिडी में 700 करोड़ रुपये से ज़्यादा की हुई बचत
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल को खाद की बिक्री हेतु आईएफएमएस पोर्टल के साथ जोड़ा है। इससे डी.ए.पी. का उद्योगों में और यूरिया का प्रदेश से बाहर होने वाली बिक्री पर रोक लगी है। इससे पिछले 5 महीने से भी कम समय में देश की खाद सब्सिडी में 700 करोड़ रुपये से ज़्यादा की बचत हुई है। यह सिर्फ और सिर्फ़ एम.एफ़.एम.बी. पोर्टल के कारण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अन्य सभी प्रदेशों से आग्रह कर रही है कि वे भी इस प्रकार की प्रणाली अपनाएं, ताकि उर्वरक सब्सिडी का लाभ सिर्फ पात्र किसानों को ही मिले। हरियाणा के अलावा अभी तक कोई और प्रदेश इस प्रकार की व्यवस्था लागू नहीं कर पाया है।
उन्होंने कहा कि एम.एफ़.एम.बी. और ई-ख़रीद के माध्यम से गत 12 सीजन में हमने फसल खरीद की 1 लाख 64 हजार करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डाली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्पष्ट संदेश है—किसान का हक किसी भी सूरत में मारा नहीं जाएगा। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह किसी भी पद या स्तर पर क्यों न हो। उन्होंने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयासरत है। सरकार की नीतियां किसान-केंद्रित हैं, प्रक्रिया पारदर्शी है और नीयत साफ है।
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फसल खराबा मुआवजे के भुगतान से पहले पूर्ण सत्यापन आवश्यक : मुख्यमंत्री
विधायक सूची सरकार को दें, सत्यापन के बाद मुआवजा दे दिया जाएगा
चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि फसल खराबे के मुआवजे की राशि तीन या चार बार किसानों के खातों में भेजी गई, लेकिन वह वापस आ गई क्योंकि गलत खातों में पैसे नहीं डाले जा सकते।
मुख्यमंत्री शुक्रवार को हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान नूंह विधायक चौधरी आफताब अहमद द्वारा वर्ष 2022 से 2026 तक राज्य में फसल खराबा के लिए वितरित मुआवजे की वर्षवार एवं जिलावार जानकारी से संबंधित पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग तीन या चार बार फसल खराबे के पैसे किसानों के खातों में भेजे गए, लेकिन वे वापस आ गए क्योंकि गलत खातों में पैसे नहीं डाल सकते। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि विधायक भी अपने स्तर पर सत्यापन करवा लें और सरकार भी सत्यापन करवा रही है। इसके बाद दोबारा पटवारी से वेरीफाई करवा कर राशि जारी कर दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि पात्र किसानों को मुआवजा देने में सरकार पूरी पारदर्शिता बरत रही है तथा किसी भी प्रकार की त्रुटि की संभावना को दूर करने के लिए आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
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चण्डीगढ़,27 फरवरी – हरियाणा विधानसभा में बजट सत्र के दौरान आज हरियाणा विनियोग(संख्या 1) विधेयक,2026 चर्चा उपरांत पारित किया गया ।
हरियाणा विनियोग (संख्या 1) विधेयक, 2026
मार्च, 2026 के 31वें दिन को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सेवाओं के लिए हरियाणा राज्य की संचित निधि में से कुल 35,02,00,000 रुपये के भुगतान और विनियोग का प्राधिकार देने लिए हरियाणा विनियोग (संख्या 1) विधेयक, 2026 पारित किया गया है।
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चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि नीलोखेड़ी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव सग्गा एवं समाना बाहु में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य जल्द से जल्द करवाया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के एक सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थी।
आरती सिंह राव ने बताया कि गांव सग्गा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन का निर्माण कार्य लगभग 38 प्रतिशत पूरा होने के बाद एजेंसी द्वारा रोक दिया गया था। लोक निर्माण विभाग द्वारा उक्त एजेंसी का अनुबंध 5 जुलाई 2023 को समाप्त कर दिया गया था। संशोधित प्रशासकीय स्वीकृति के उपरांत, निविदा प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी होने की उम्मीद है और पीएचसी भवन का शेष निर्माण कार्य छह महीने के भीतर पुनः आरंभ होने की संभावना है।
स्वास्थ्य मंत्री ने आगे गांव समाना बाहु में पीएचसी के रुके हुए निर्माण कार्य से संबंधित सवाल का जवाब देते हुए बताया कि संविदा एजेंसी ने 70 प्रतिशत कार्य पूरा करने के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया था और लोक निर्माण विभाग के साथ विवाद को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दी थी। इस विभाग द्वारा एजेंसी का अनुबंध 20 जून 2024 को समाप्त कर दिया गया था। उन्होंने आश्वान दिया कि इस पीएचसी के भवन निर्माण कार्य पुनः आरंभ होने में लगभग छह महीने लगेंगे और उसके बाद इसे पूर्ण करने में लगभग 12 महीने का समय लगेगा।
उन्होंने एक अन्य सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में बताया कि वैसे तो फरीदाबाद के सेक्टर -56 में 50 बैड के अस्पताल को बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, फिर भी इस मामले में दोबारा जांच करवा लेंगे , आवश्यकता होगी तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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चंडीगढ़, 27 फरवरी— हरियाणा के लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश में सड़कों के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति हुई है। राज्यभर में सड़कों के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और फॉरलेन निर्माण के कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं, जिससे यातायात सुगम हुआ है और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिली है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले को बेहतर और सुरक्षित सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाए।
लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री श्री रणबीर गंगवा आज हरियाणा विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान विधायक मो. इलियास द्वारा पूछे गए एक प्रश्न का जवाब दे रहे थे।
श्री गंगवा ने बताया कि होडल से पटौदी को जोड़ने वाला मार्ग, जो दक्षिण हरियाणा का एक महत्वपूर्ण यातायात मार्ग है, उसे फॉरलेन बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इस परियोजना को दो भागों में क्रियान्वित किया जाएगा।
उन्होंने जानकारी दी कि पहले भाग में होडल से बिलासपुर चौक वाया नूंह 0.00 से 71.00 किलोमीटर तक सड़क को फॉरलेन बनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (एनसीआरपीबी) के तहत 616.01 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इस कार्य के लिए लगभग 80 हेक्टेयर (197.6 एकड़) भूमि की आवश्यकता है, जो वन विभाग के पास प्रक्रियाधीन है। वन विभाग से मंजूरी तथा एनसीआरपीबी से ऋण स्वीकृत होने के बाद टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
उन्होंने आगे बताया कि दूसरे भाग में बिलासपुर चौक से कुलाना वाया पटौदी 71.00 से 96.00 किलोमीटर तक फॉरलेन बनाने के लिए 476.07 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है। यह प्रस्ताव भी वर्तमान में स्थायी वित्त समिति के पास विचाराधीन है। इस खंड के लिए लगभग 27 हेक्टेयर (66 एकड़) भूमि की आवश्यकता है। वन मंजूरी एवं एनसीआरपीबी से ऋण स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत टेंडर प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र ही फॉरलेन निर्माण कार्य शुरु किया जाएगा।
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चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि राज्य में कपास उत्पादन प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत देशी कपास उगाने वाले किसानों को 3000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है।
श्री श्याम सिंह राणा आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के एक सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि खरीफ 2025 के दौरान कपास फसल के अंतर्गत 8 लाख 90 हजार एकड़ क्षेत्र का सत्यापन किया गया, जबकि “मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल” पर देशी कपास के अंतर्गत 16,801 एकड़ क्षेत्र का सत्यापन किया गया।
कृषि मंत्री ने जानकारी दी कि हरियाणा में पंजीकृत एवं सत्यापित किसानों से “मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल” के माध्यम से निर्धारित उचित औसत गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होने की शर्त पर भारतीय कपास निगम द्वारा देशी कपास तथा बीटी कपास की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाती है। उन्होंने बताया कि अधिकांश समय देशी कपास के बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक रहते है, जिसके फलस्वरूप किसान अपनी उपज निजी व्यापारियों को बेचना अधिक उपयुक्त समझते हैं।
श्री राणा ने बताया कि राज्य सरकार फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने हेतु निरंतर प्रयासरत है, ताकि अत्यधिक धान की खेती को कम किया जा सके। इस उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं एवं प्रोत्साहनों के माध्यम से कपास, मक्का, दलहन एवं अन्य कम जल-आवश्यक फसलों के लिए किसानों को 8000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त, कपास उत्पादन प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत देशी कपास उगाने वाले किसानों को 3000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है।
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चंडीगढ़, 27 फरवरी- राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री विपुल गोयल ने सदन में बताया कि वर्ष 2022 से लेकर वर्ष 2026 तक फसल के नुकसान के लिए सरकार द्वारा मुआवजा वितरित कर दिया गया है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री विपुल गोयल शुक्रवार को सदन में पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों को हुए नुकसान के लिए वर्ष 2022-23 में करीब 494.05 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि स्वीकृत की गई थी जो उपायुक्तों को वितरण के लिए मैनुअल तरीक़े से स्वीकृत की गई थी। राज्य में वर्ष 2023-24 में फसल खराबा के लिए 720.29 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। रबी 2023 से मुआवज़ा राशि क्षतिपूर्ति पोर्टल के माध्यम से डीबीटी द्वारा सीधे लाभार्थियों को वितरित की जा रही है। वर्ष 2024-25 में फसल खराबा के लिए 265.57 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे और वर्ष 2025-26 में फसल खराबा के लिए 168.74 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुछ किसानों को त्रुटि के कारण, बैंक खाता उपलब्ध न करवाने या अन्य किसी कारण की वजह से राशि का वितरण नहीं किया जा सका। परंतु विभाग की तरफ से पटवारियों को निर्देश है कि त्रुटियों को जल्द ठीक करवाए ताकि राशि आवंटन किया जा सके।
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डबवाली के स्टेडियम का किया जाएगा सुधारीकरण- खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम
चंडीगढ़, 27 फरवरी- हरियाणा के खेल राज्य मंत्री श्री गौरव गौतम ने कहा कि डबवाली शहर के स्टेडियम के सुधारीकरण के लिए जिला खेल अधिकारी ने एक करोड़ रुपये का अनुमान (estimate) बनाकर भेजा है, जिसे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) को भेज दिया है और जल्द ही स्टेडियम का सुधारीकरण करवाया जाएगा।
खेल मंत्री श्री गौरव गौतम शुक्रवार को बजट सत्र के दौरान सदन के एक सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिला सिरसा में शहीद भगत सिंह खेल परिसर और चौधरी दलबीर सिह इंडोर स्टेडियम हैं। डबवाली में श्री गुरु गोबिन्द सिंह खेल परिसर और चौटाला में चौधरी साहिब राम स्टेडियम उप मंडल स्तरीय खेल स्टेडियम हैं।
उन्होंने कहा कि जिला सिरसा में एक रिहायशी व 50 खेल नर्सिरयां हैं। सिरसा में 21 प्रशिक्षक और कनिष्ठ प्रशिक्षक हैं। सिरसा के शहीद भगत सिंह स्टेडियम में एक सुविधा केंद्र भी है।
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चण्डीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी ने बताया कि भारत सरकार द्वारा 08 सितम्बर, 1993 को अन्य पिछड़े वर्गों (ओ०बी०सी०) को क्रीमी लेयर से बाहर करने के लिए मानदंड तय किए थे। आय और संपत्ति की सीमा में समय-समय पर बदलाव किए गए हैं, जबकि दूसरे मानदंडों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आदमपुर के विधायक श्री चन्द्र प्रकाश द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
श्री बेदी ने कहा कि वर्ष 2017 में, भारत सरकार ने क्रीमी लेयर की आय सीमा को बदलकर 8 लाख रूपये प्रति वर्ष कर दिया। इसके अनुसार, हरियाणा सरकार द्वारा भी 16 जुलाई,2024 की अधिसूचना के माध्यम से आय सीमा 8 लाख रूपये प्रतिवर्ष तय कर दी गई है।
उन्होंने सदन को अवगत करवाया कि केन्द्र सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश सरकार द्वारा अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को सभी प्रकार के लाभ दिए जा रहे हैं।
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चंडीगढ़, 27 फरवरी- हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रीमती श्रुति चौधरी ने विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया कि प्रदेश में प्रत्येक मानसून सत्र से पूर्व नदियों की वार्षिक डी-सिल्टिंग की कोई निर्धारित परंपरा नहीं है।
उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में लगातार भारी वर्षा और बाढ़ की स्थिति के कारण नदियों में बड़े पैमाने पर गाद जमा हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए टांगरी और मारकंडा नदियों की जलधारण क्षमता बढ़ाने तथा बाढ़ के खतरे को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2025 के दौरान विशेष विकासात्मक गतिविधि के रूप में डी-सिल्टिंग का कार्य किया गया। 30 जून 2025 से पहले टांगरी नदी से लगभग 5.50 लाख घन मीटर तथा मारकंडा नदी से लगभग 37,500 घन मीटर मिट्टी निकाली गई।
इसके अतिरिक्त, मानसून 2026 से पूर्व टांगरी, मारकंडा और बेगना नदियों से क्रमशः लगभग 53.85 लाख घन मीटर, 10.94 लाख घन मीटर और 0.60 लाख घन मीटर गाद निकालने का प्रस्ताव है। इन कार्यों के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
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चंडीगढ़ , 27 फरवरी – हरियाणा की चिकित्सा शिक्षा एंव अनुसंधान मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि पुण्डरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव धेरड़ू में गुरु ब्रह्मानंद नर्सिंग कॉलेज को इस साल शुरू करने का प्रयास किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के एक सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थी।
आरती सिंह राव ने बताया कि विभाग द्वारा आगामी शैक्षणिक सत्र में इस कॉलेज को सार्वजनिक निजी भागीदारी व्यवस्था पर चलाने की संभावना तलाश की जा रही है।
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चंडीगढ़, 27 फरवरी— हरियाणा के लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने कहा कि हरियाणा सरकार प्रदेश में रेलवे से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और आमजन को बेहतर यातायात सुविधा देने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। राज्य में विभिन्न रेलवे क्रॉसिंगों पर अंडरपास और ओवरब्रिज निर्माण के माध्यम से जाम की समस्या कम करने और सड़क सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कच्चा बेरी सड़क पर अंडरपास निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री श्री रणबीर गंगवा आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक श्री भारत भूषण बत्तरा द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि कच्चा बेरी सड़क स्थित रेलवे क्रॉसिंग पर अंडरपास बनाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। इस संबंध में सामान्य व्यवस्था रेखाचित्र को रेलवे विभाग द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है। यह कार्य राज्य सरकार के जमा कार्य के रूप में रेलवे विभाग द्वारा किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अंडरपास निर्माण के लिए 1346.60 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इसके लिए हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) की 1 कनाल 17 मरला भूमि भी शामिल है। इस भूमि को पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) के नाम हस्तांतरित करने की प्रक्रिया जारी है। भूमि उपलब्ध होते ही टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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चंडीगढ़, 27 फरवरी— हरियाणा के लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि हरियाणा में सड़कों और बाईपास के विकास को गति देने के लिए राज्य सरकार लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि किसी भी सड़क या बाईपास के निर्माण के लिए जमीन की आवश्यकता होती है, जिसे सरकार ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से खरीदती है।
लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) मंत्री रणबीर गंगवा हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक श्री भारत भूषण बत्तरा द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
उन्होंने बताया कि कोसली बाईपास के निर्माण के लिए सरकार ने उच्च स्तरीय भूमि क्रय समिति से 2024 में 23.09 एकड़ भूमि 60 लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से खरीदने का निर्णय लिया है। अब तक शहादत नगर गांव के 67 प्रतिशत और धनियां गांव के 51 प्रतिशत भूमि मालिकों ने अपने शपथ पत्र जमा करवा दिए हैं। धनियां गांव की कुछ भूमि अभी भी शेष है। उन्होंने विधायक से आग्रह किया कि वे भूमि मालिकों से बातचीत कर जमीन उपलब्ध करवाने में सहयोग करें, ताकि बाईपास निर्माण कार्य जल्द से जल्द शुरू किया जा सके।
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चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि असंध विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई गांवों में उपस्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण कार्य करवाया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्री आज हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के एक सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थी।
आरती सिंह राव ने बताया कि असंध उपमंडल अस्पताल के अंतर्गत उप स्वास्थ्य केंद्र राहड़ा के भवन के निर्माण के लिए निविदा 16 फरवरी 2026 को आवंटित की गई है , इसका निर्माण कार्य जल्द किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, गांव थल में स्थित एकमात्र उप-स्वास्थ्य केंद्र वर्तमान में निजी किराए के भवन में कार्यरत है। इस उप-स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण के लिए प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जा चुकी है परन्तु अभी तक उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं हुई है। भूमि की उपलब्धता होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने आगे बताया कि इस विधानसभा क्षेत्र के गांव खेड़ी-सरफली और असंध-॥ में भी उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण किया जाएगा, लेकिन अभी तक भवन निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं हो पाई है। इन दोनों गांवों के मामले में भी भूमि की उपलब्धता होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने सदन के एक अन्य सदस्य द्वारा थानेसर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव अमीन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तौर पर अपग्रेड करने के प्रश्न का जवाब देते हुए बताया कि फिलहाल नियमों के अनुसार यहां सीएचसी नहीं बनाई जा सकती। फिर भी इस मामले में पुनः जांच करवा लेंगे , आवश्यकता हुई तो अपग्रेड करने पर विचार किया जा सकता है।
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हरियाणा में विश्वविद्यालयों के संविदा व अंशकालिक शिक्षकों को सेवा सुरक्षा देने का है विचार : शिक्षा मंत्री
–उच्च शिक्षा विभाग ने समिति गठित कर शुरू कर दी है प्रक्रिया”
चंडीगढ़ , 27 फरवरी – हरियाणा के शिक्षा मंत्री श्री महीपाल ढांडा ने बताया कि प्रदेश सरकार राज्य विश्वविद्यालयों में संविदात्मक तौर पर कार्यरत प्राध्यापकों के लिए “सेवा सुरक्षा विधेयक” का प्रारूप तैयार करने पर विचार कर रही है। इस संबंध में अन्य विभागों से विचार विमर्श किया जा रहा है।
श्री ढांडा आज हरियाणा विधानसभा के सत्र के दौरान सदन के दो सदस्यों सदस्य द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि विभाग को हरियाणा यूनिवर्सिटीज कॉन्ट्रैक्चुअल टीचर्स एसोसिएशन (HUCTA) और हरियाणा यूनिवर्सिटीज पार्ट-टाइम टीचर्स एसोसिएशन (HUPTTA) से रिप्रजेंटेशन प्राप्त हुआ था। इन संगठनों ने वर्ष 2024 के सेवा सुरक्षा अध्यादेश की तर्ज पर कानून बनाने की मांग की है। इस प्रस्ताव में शिक्षकों को 60 वर्ष की आयु तक सेवा सुरक्षा प्रदान करने की बात कही गई।
श्री महिपाल ढांडा ने बताया कि प्रदेश सरकार ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति से समिति का गठन का गठन किया गया जिसमें महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के कुलपति को अध्यक्ष, इसी विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को , गुरुग्राम विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डीन अकादमिक अफेयर्स को सदस्य के तौर पर नामित किया गया।
उन्होंने बताया कि इस समिति को उक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का दायित्व दिया गया। रिपोर्ट मिलने के बाद मामला दोबारा मुख्यमंत्री के पास निर्णय हेतु भेजा गया। इसके बाद 29 जुलाई 2025 को इस विषय पर मुख्यमंत्री के ओएसडी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में गहन चर्चा हुई। इसके परिणामस्वरूप निर्णय लिया गया कि राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत पूरे शैक्षणिक स्टॉफ का विस्तृत डाटा एक निर्धारित प्रारूप में एकत्र किया जाए।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने 30 जुलाई 2025 को सभी राज्य विश्वविद्यालयों को पत्र जारी किया। इस पत्र के माध्यम से आवश्यक जानकारी मांगी गई। विश्वविद्यालयों से प्राप्त आंकड़ों को संकलित किया गया। इसके बाद यह संपूर्ण रिपोर्ट मुख्यमंत्री को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गई।
इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से यह सुझाव दिया गया कि समिति की सिफारिशों पर अन्य संबंधित विभागों की भी राय ली जाए जिसके तहत 9 दिसंबर 2025 को विभिन्न विभागों चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग, आयुष विभाग, युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, खेल विभाग से सुझाव और टिप्पणियां मांगी गईं ताकि एक समग्र नीति तैयार की जा सके।
उन्होंने बताया कि हालांकि, निर्धारित समय में सभी विभागों से जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इसलिए 29 जनवरी 2026 को संबंधित विभागों को रिमाइंडर भेजा गया। वर्तमान में सभी विभागों से आवश्यक सूचनाओं का इंतजार किया जा रहा है ,जैसे ही यह जानकारी प्राप्त होगी, मामले को पुनः मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।
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चंडीगढ़, 27 फरवरी – हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री श्री राजेश नागर ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा हरियाणा के किसानों की सभी फसलों की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने हेतु पारदर्शी एवं ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। धान की खरीद सरकारी एजेंसियों के माध्यम से भारत सरकार द्वारा निर्धारित दिशा – निर्देशों के अनुसार की जाती है।
राज्यमंत्री श्री राजेश नागर आज हरियाणा विधानसभा में एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने बताया कि सरकार ने धान की खरीद प्रक्रिया पर सरकार आरम्भ से ही निगरानी बनाए हुए थी। राज्य के सभी जिलों में संयुक्त कमेटी बनाकर खरीद के दौरान ही माह अक्टूबर एवं नवंबर 2025 के दौरान राइस मिलों में भंडारित धान की भौतिकी जांच करवाई गई। भौतिकी जाँच के दौरान पाई गई धान की कमी की अनियमितताओं को गंभीरता से लिया गया। सम्बंधित जिलों में प्रार्थमिक जाँच करने उपरांत जहाँ – जहाँ प्रथम दृष्टा अनियमितताएं पाई गई, वहां तुरंत अधिकारियों/कर्मचारियों तथा आढ़तियों एवं राइस मिलरों के विरुद्ध कुल 12 एफआईआर दर्ज करवाई गई। इसके साथ – साथ राज्य में खाद्य विभाग, खरीद संस्था तथा मार्केटिंग बोर्ड द्वारा 75 अधिकारियों / कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जाँच भी शुरू की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा किये प्रयासों में राइस मिलरों से लगभग 6.37 करोड़ राशि की रिकवरी करते हुए सरकारी खज़ाने में जमा करवाई जा चुकी है। श्री नागर ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। आगामी रबी सीजन 2026 – 27 के दौरान राज्य में खाद्यानों की खरीद कार्य को और अधिक सुदृढ़ किया जा रहा है जैसे कि पैदावार पर संशोधन, मोबाइल ऐप के माध्यम से जिओ टैग / QR code, आधारित गेट पास, वाहनों का आटोमेटिक कैप्चर, मंडी/खरीद केंद्र, गोदाम एवं राइस मीलों की जिओ फेंसिंग, मंडियों के प्रवेश एवं निकास द्वार पर कैमरे लगाने, किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन इत्यादि। राज्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि आगामी खरीफ खरीद सीजन 2026 – 27 के दौरान उपरोक्त संशोधनों के अतिरिक्त खरीद प्रक्रिया को ओर सदृढ़ करने हेतु राइस मीलों / गोदाम की भौतिक जाँच, मोबाइल ऐप के माध्यम से की जाएगी।
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हरियाणा विधानसभा में पर्यटन मंत्री का आमंत्रण — 22 टूरिस्ट कॉम्प्लेक्सों में 28 फरवरी से ‘रंगोत्सव 2026’
चंडीगढ़, 27 फरवरी-हरियाणा के पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के सदस्यों को प्रदेश में पहली बार आयोजित किए जा रहे पांच दिवसीय रंगोत्सव 2026 में सहभागी बनने के लिए आमंत्रित किया।
उन्होंने बताया कि 28 फरवरी से 4 मार्च तक हरियाणा पर्यटन निगम द्वारा प्रदेश के 22 टूरिस्ट कॉम्प्लेक्सों में रंगोत्सव का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में पर्यटन विभाग निरंतर ऐसे आयोजनों के माध्यम से आमजन को जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि पर्यटन विभाग द्वारा सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला, दीवाली मेला और पिंजौर मैंगो मेले के सफल आयोजन के बाद अब होली पर भी विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार की गई है। रंगोत्सव के दौरान डीजे, हरियाणवी कलाकारों की प्रस्तुतियां, रेन डांस जोन, ऑर्गेनिक कलर जोन, किड्स प्ले जोन तथा पारंपरिक फाग और रागनी जैसे लोक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
क्रमांक 2026
सुमित चावला
पंचकूला जोन की उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच की कार्यवाही 02, 09, 16 और 24 मार्च को पंचकूला में की जाएगी
चंडीगढ़, 27 फरवरी – उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम उपभोक्ताओं को विश्वसनीय, अच्छी वोल्टेज और निर्बाध बिजली की आपूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है। ‘पूर्ण उपभोक्ता संतुष्टि’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बिजली निगम द्वारा अनेक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम प्रारंभ किये गए हैं ताकि उपभोक्ताओं की समस्याओं को त्वरित रूप में सुलझाया जा सके।
बिजली निगम के प्रवक्ता ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि जोनल उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच रेगुलेशन 2.8.2 के अनुसार प्रत्येक मामले में 1 लाख रुपये से अधिक और 3 लाख रुपये तक की राशि के वित्तीय विवादों से संबंधित शिकायतों की सुनवाई करेगा। पंचकूला जोन के अंतर्गत आने वाले जिलों नामतः कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला, कैथल और यमुनानगर के उपभोक्ताओं की शिकायतों का निवारण 02, 09, 16 और 24 मार्च को जोनल उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच, पंचकूला में उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पंचकूला जोन के अंतर्गत आने वाले जिलों के उपभोक्ताओं के गलत बिलों, बिजली की दरों से सम्बंधित मामलों, मीटर सिक्योरिटी से जुड़े मामलों, ख़राब हुए मीटरों से सम्बंधित मामलों, वोल्टेज से जुड़े हुए मामलों का निपटान किया जाएगा। इस दौरान बिजली चोरी, बिजली के दुरूप्योग और घातक गैर-घातक दुर्घटना आदि मामलों पर विचार नहीं किया जाएगा। उपभोक्ता और निगम के बीच किसी भी विवाद के निपटान के लिए फोरम में वित्तिय विवादों से संबंधित शिकायत प्रस्तुत करने से पहले पिछले छह महीनों के दौरान उपभोक्ता द्वारा भुगतान किए गए बिजली के औसत शुल्क के आधार पर गणना की गई प्रत्येक माह के लिए दावा की गई राशि या उसके द्वारा देय बिजली शुल्क के बराबर राशि, जो कम है, उपभोक्ता को जमा करवानी होगी। इस दौरान उपभोक्ता को प्रमाणित करना होगा कि यह मामला अदालत, प्राधिकरण या फोरम के समक्ष लंबित नहीं है क्योंकि इस न्यायालय या फोरम में विचाराधीन मामलों पर बैठक के दौरान विचार नहीं किया जाएगा।
क्रमांक – 2026
प्रॉपर्टी आईडी मामले में हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन के निर्देश, शिकायतकर्ता को मुआवज़ा देने का निर्णय
चंडीगढ़, 27 फरवरी — हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने अंबाला निवासी श्रीमती सुरजीत कौर के नए प्रॉपर्टी आईडी जारी करने संबंधी प्रकरण में सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने मामले की समीक्षा के दौरान प्रशासनिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने पर बल दिया।
आयोग के संज्ञान में आया कि शिकायतकर्ता की अपीलें प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (एफजीआरए) स्तर पर निरस्त कर दी गई थीं। तत्पश्चात आयोग द्वारा 09.02.2026 को पारित अंतरिम आदेश के बाद संबंधित संपत्ति को अधिकृत श्रेणी में दर्शाया गया।
पूर्व में 04.02.2026 को नगर निगम द्वारा प्रस्तुत उत्तर में प्लॉट को अधिकृत नहीं बताया गया था। हालांकि, आयोग द्वारा विस्तृत तथ्यों की मांग किए जाने के उपरांत यह स्पष्ट किया गया कि संपत्ति गांव की सीमा एवं अधिकृत क्षेत्र की सीमा पर स्थित है।
आयोग ने अपने अवलोकन में यह भी उल्लेख किया कि हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के अंतर्गत एफजीआरए एवं एसजीआरए को अपीलों के निस्तारण हेतु 30 कार्य दिवस का समय निर्धारित है। आयोग ने सुझाव दिया कि नागरिकों की शिकायतों का समाधान यथासंभव प्रारंभिक स्तर पर ही सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें उच्च स्तर तक जाने की आवश्यकता न पड़े।
आयोग ने 09.10.2025 को अपील निरस्त करने वाले तत्कालीन एफजीआरए तथा 01.12.2025 को अपील निरस्त करने वाले अधिकारी को हरियाणा सेवा का अधिकार (प्रबंधन) विनियम, 2015 के विनियम 10 के अंतर्गत कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
दोनों अधिकारियों से अधिनियम की धारा 17(1)(डी) के तहत स्पष्टीकरण मांगा गया है कि राज्य सरकार को विभागीय कार्रवाई की संस्तुति क्यों न की जाए।
आयोग ने शिकायतकर्ता को हुई असुविधा को ध्यान में रखते हुए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार 5,000 रुपये का मुआवज़ा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। यह राशि प्रारंभिक रूप से नगर निगम अंबाला के कोष से अदा की जाएगी, जिसे नियमानुसार संबंधित अधिकारियों से वसूल किया जा सकेगा।
आयोग ने निर्देश दिया है कि यदि 13.03.2026 तक मुआवज़ा अदा नहीं किया जाता है, तो अधिनियम की धारा 17(2) के तहत आगे की कार्यवाही की जाएगी तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त दंड एवं मुआवज़ा भी निर्धारित किया जा सकता है।
साथ ही, आयुक्त, नगर निगम अंबाला को 16.03.2026 तक अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित तत्कालीन एफजीआरए को भी आदेश की प्रति प्रेषित कर 09.03.2026 तक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि नागरिक सेवाओं में लापरवाही या अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्यवाही की जा रही है और भविष्य में भी की जाती रहेगी।
आयोग ने दोहराया कि राज्य सरकार की मंशा नागरिक सेवाओं को समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने की है, और सभी अधिकारी उसी भावना के अनुरूप कार्य करें।







