HARYANAHOME

Haryana News: विवादों के साये में ‘चीफ फोटोग्राफर ऑफिसर’ की नियुक्ति—हरियाणा लोक संपर्क विभाग की साख दांव पर

Haryana News: विवादों के साये में ‘चीफ फोटोग्राफर ऑफिसर’ की नियुक्ति—हरियाणा लोक संपर्क विभाग की साख दांव पर

Haryana News: विवादों के साये में ‘चीफ फोटोग्राफर ऑफिसर’ की नियुक्ति—हरियाणा लोक संपर्क विभाग की साख दांव पर

*👇👇सोशल मीडिया पर वायरल👇👇*

*विवादों के साये में ‘चीफ फोटोग्राफर ऑफिसर’ की नियुक्ति—हरियाणा लोक संपर्क विभाग की साख दांव पर*

*आरटीआई, आरोप और संभावित पुनर्नियुक्ति ने बढ़ाई हलचल—कर्मचारियों में असंतोष, प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न*

*दिल्ली।* हरियाणा के जनसंपर्क विभाग में इन दिनों जो घटनाक्रम सामने आ रहा है, उसने न केवल विभागीय कार्यप्रणाली बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और निष्पक्षता की विश्वसनीयता को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। जिस विभाग का दायित्व सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को सकारात्मक ढंग से जनता तक पहुँचाना है, वही आज आंतरिक विवादों और आरोपों के कारण सुर्खियों में है। कर्मचारियों के बीच एक कहावत बार-बार सुनाई दे रही है—“आ बैल मुझे मार”—मानो विभाग स्वयं अपने लिए संकट खड़ा कर रहा हो।

*आरटीआई बना दबाव का औजार?*

विवाद के केंद्र में विभाग से जुड़े एक फोटोग्राफर कर्मचारी नीरज चोपड़ा का नाम चर्चा में है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि बड़ी संख्या में दायर की जा रही आरटीआई (सूचना का अधिकार) आवेदनों के कारण विभाग का प्रशासनिक समय और संसाधन लगातार प्रभावित हो रहे हैं। सामान्यतः आरटीआई कानून पारदर्शिता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने का सशक्त माध्यम है, किंतु यदि इसका उपयोग व्यक्तिगत प्रभाव स्थापित करने या प्रशासनिक दबाव बनाने के लिए किया जाए, तो यह इसकी मूल भावना के विपरीत माना जाएगा।

कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि आरटीआई के माध्यम से सेवा संबंधी विवरण, व्यक्तिगत जानकारी और संवेदनशील तथ्यों की मांग कर चुनिंदा अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है। यदि इन आरोपों में सत्यता है, तो यह न केवल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का मामला है, बल्कि कर्मचारियों की निजता और संस्थागत अनुशासन के लिए भी गंभीर चुनौती है। इससे विभाग के भीतर असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण बनना स्वाभाविक है।

*सेवानिवृत्ति के बाद संभावित नियुक्ति पर सवाल*

विवाद तब और गहरा गया जब यह चर्चा सामने आई कि सेवानिवृत्ति के उपरांत संबंधित कर्मचारी को विभाग की संबद्ध संवाद सोसायटी में “चीफ फोटोग्राफर ऑफिसर” के पद पर नियुक्त करने की तैयारी है। कर्मचारियों का एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि जब उनके कार्य व्यवहार को लेकर गंभीर शिकायतें चर्चा में हैं, तो जांच और स्पष्ट निष्कर्ष से पहले ऐसी नियुक्ति प्रशासनिक निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा सकती है।

यदि आरोपों के निस्तारण से पहले ही पुनर्नियुक्ति दी जाती है, तो इससे गलत संदेश जाने और कर्मचारियों के मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

*दिल्ली कार्यकाल और संपर्कों की चर्चा*

बताया जाता है कि उन्होंने अपने सेवा काल का बड़ा हिस्सा दिल्ली स्थित कार्यालयों में बिताया। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान उच्च अधिकारियों और राजनीतिक गलियारों में संपर्क स्थापित हुए। विभागीय चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि पूर्व में आई कुछ शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं है, परंतु यदि ऐसा हुआ है तो यह प्रशासनिक जवाबदेही के सिद्धांतों के विपरीत माना जाएगा।

पूर्व मुख्यमंत्री आवास से जुड़ा एक प्रकरण भी अनौपचारिक चर्चाओं में सामने आता रहा है। आरोप है कि ड्यूटी के दौरान कुछ तस्वीरों के लीक होने के बाद उन्हें वहां से हटाया गया था। यद्यपि इस संबंध में सार्वजनिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन यदि इस प्रकार की घटना हुई है तो यह सुरक्षा और गोपनीयता मानकों का गंभीर विषय है।

*हरियाणा भवन और मीडिया सेंटर से जुड़े आरोप*

दिल्ली स्थित हरियाणा भवन में कार्य व्यवहार को लेकर भी कई आरोप लगाए गए हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि आरटीआई की धमकी देकर दबाव बनाया जाता था। एक माली से आरटीआई के नाम पर पौधे और गमले लेने का आरोप भी चर्चा में है। इसके अतिरिक्त सीएम कटिंग सेल के एक कमरे पर निजी ताला लगाकर कब्जा करने तथा मीडिया सेंटर के कंप्यूटर पर निजी पासवर्ड लगाकर नियंत्रण स्थापित करने की बात भी कही जा रही है।

यदि ये आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह न केवल सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और सूचना के मुक्त प्रवाह के सिद्धांतों के भी विपरीत माना जाएगा।

*संगठित गुट की चर्चा*

कुछ सूत्रों का दावा है कि आरटीआई गतिविधियों के पीछे एक संगठित समूह सक्रिय है, जिसमें एक सेवानिवृत्त अधिकारी और कुछ नवनियुक्त कर्मचारी शामिल बताए जाते हैं। आरोप है कि यह समूह मामलों को प्रभावित करने और शिकायतों को दबाने में भूमिका निभाता रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है, परंतु ऐसी चर्चाएँ ही विभागीय संरचना पर अविश्वास का संकेत देती हैं।

*वित्तीय पारदर्शिता पर भी प्रश्न*

संवाद सोसायटी में संभावित नियुक्ति के साथ वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा भी जुड़ गया है। संवाद एजेंसी में फंड का उपयोग अपेक्षाकृत स्वायत्त ढंग से होता है। ऐसे में यदि विवादों से घिरे व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो वित्तीय अनुशासन पर अतिरिक्त निगरानी की आवश्यकता होगी। अन्यथा विभाग की साख को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है।

*विभाग की साख दांव पर*

जनसंपर्क विभाग केवल प्रेस नोट जारी करने का संस्थान नहीं है; यह सरकार और जनता के बीच विश्वास का सेतु है। यदि विभाग के भीतर ही गुटबंदी, भय और अविश्वास का माहौल बनता है, तो इसका असर सीधे शासन की छवि पर पड़ता है। पारदर्शिता और जवाबदेही का संदेश तभी प्रभावी होता है, जब उसे लागू करने वाला तंत्र स्वयं निष्पक्ष और अनुशासित दिखाई दे।

*आवश्यक है निष्पक्ष जांच*

इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण कदम एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच है। आरोपों की सत्यता या असत्यता का निर्धारण तथ्यों, दस्तावेजों और विधिसम्मत प्रक्रिया के आधार पर होना चाहिए। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो सेवा नियमों के अनुसार कार्रवाई अनिवार्य है; और यदि आरोप निराधार सिद्ध होते हैं, तो संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

प्रशासनिक संस्थानों की मजबूती इसी में है कि वे आलोचना से घबराएँ नहीं, बल्कि पारदर्शिता और न्यायपूर्ण निर्णय के माध्यम से विश्वास पुनर्स्थापित करें। हरियाणा लोक संपर्क विभाग के सामने यह अवसर है कि वह इस विवाद को आत्ममंथन और सुधार के रूप में ले, न कि अविश्वास के स्थायी दाग के रूप में।

यदि समय रहते स्पष्टता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित की गई, तो यह प्रकरण विभागीय सुधार का आधार बन सकता है; अन्यथा यह विवाद लंबे समय तक साख पर प्रश्नचिह्न बना रह सकता है।

विकास मलिक

विकास मलिक 18 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। विकास मलिक ने इंडिया न्यूज, इंडिया न्यूज़ हरियाणा, साधना न्यूज, एमएचवन न्यूज, खबरें अभी तक, न्यूज नेशन, लीविंग इंडिया न्यूज़ समेत कई बड़े चैनल्स में काम किया है। विकास मलिक अभी जिओ हॉटस्टार में हरियाणावी कमेंट्री में बतौर प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं और साथ में अपनी खुद की वेबसाइट चला रहे है। इनकी कंटेंट से लेकर खेल और राजनीति के साथ हरियाणा पर गहरी पकड़ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Ranbir Kapoor और Raha के बिना वैलेंटाइन डे पर दिखा Alia Bhatt का ग्लैमरस लुक Arbaz Khan की एक्स गर्लफ्रेंड ने पीली बिकिनी में समंदर में ढाया कहर Rakulpreet की तस्वीरें वायरल, फोटोशूट में ढाया कहर Arbaz Khan की एक्स ने सोशल मीडिया पर मचाई तबाही, Viral तस्वीरों से मची सनसनी Haryanvi छोरी ने Instagram पर तस्वीरें post कर पूछा- कै ज्ञान, हो गई वायरल