
Kartikeya Sharma: भारतीय महिलाओं के लिए वास्तविक आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाते हुए, राज्यसभा सांसद श्री कार्तिकेय शर्मा ने शक्ति सम्मान (महिलाओं के लिए वेतन समानता) विधेयक, 2026 राज्यसभा में प्रस्तुत किया है। यह विधेयक एक आधुनिक और तकनीक-आधारित ढांचा प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को “समान मूल्य के कार्य” के लिए समान वेतन सुनिश्चित करना है। यह मानक केवल पदनाम पर नहीं, बल्कि कौशल, प्रयास और ज़िम्मेदारी जैसे वास्तविक मापदंडों पर आधारित है।
शक्ति सम्मान विधेयक को भारत के मौजूदा श्रम कानूनों के एक दूरदर्शी और आवश्यक उन्नयन के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह महिला-नेतृत्व वाले विकास और विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को मज़बूती देता है। पारदर्शिता और विशेष निगरानी तंत्र के माध्यम से प्रणालीगत वेतन असमानताओं को दूर करते हुए, यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 39(d) में निहित समानता के सिद्धांतों को व्यवहार में उतारने का प्रयास करता है।

कार्यस्थल में परिवर्तन: विधेयक की प्रमुख विशेषताएँ
“समान मूल्य” मानक
यह विधेयक “समान कार्य” की सीमित परिभाषा से आगे बढ़ते हुए कौशल, प्रयास, ज़िम्मेदारी और कार्य परिस्थितियों के वैज्ञानिक मूल्यांकन पर आधारित वेतन निर्धारण को मान्यता देता है।
AI-संचालित समान वेतन डिजिटल अनुपालन पोर्टल
एक केंद्रीकृत डिजिटल पोर्टल की स्थापना का प्रस्ताव, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से वेतन डेटा का विश्लेषण कर प्रणालीगत वेतन असमानताओं की स्वतः पहचान की जा सकेगी।
अनिवार्य वेतन समानता ऑडिट
50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए वार्षिक वेतन ऑडिट अनिवार्य, जिसमें औसत और माध्यिका लिंग आधारित वेतन अंतर का खुलासा करना होगा।
पूर्व वेतन इतिहास पर प्रतिबंध
नियुक्ति प्रक्रिया में उम्मीदवार के पिछले वेतन को अनिवार्य शर्त बनाने पर रोक, ताकि भेदभाव का दुष्चक्र टूट सके।
जेंडर जस्टिस फंड
अनुपालन न करने वाले संस्थानों से वसूली गई धनराशि से महिलाओं के लिए कानूनी सहायता, शोध और जागरूकता कार्यक्रमों का वित्तपोषण किया जाएगा।
श्री कार्तिकेय शर्मा, सांसद ने कहा,
“वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब महिला के योगदान को उसी गरिमा और आर्थिक मूल्य के साथ आँका जाए, जैसा पुरुषों के साथ किया जाता है। शक्ति सम्मान विधेयक अतीत की आलोचना नहीं, बल्कि एक न्यायपूर्ण भविष्य की रूपरेखा है। AI और पारदर्शी ऑडिट के माध्यम से हम वेतन समानता को हर कामकाजी महिला के लिए एक वास्तविक अधिकार बना रहे हैं।”
एक विशेष राष्ट्रीय प्राधिकरण का गठन
यह विधेयक महिलाओं के लिए वेतन समानता राष्ट्रीय प्राधिकरण के गठन का प्रस्ताव करता है, जिसे सिविल कोर्ट के समान अधिकार प्राप्त होंगे। यह प्राधिकरण शिकायतों की जाँच करने के साथ-साथ उद्योग-स्तर पर वेतन असमानताओं पर स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकेगा।
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मानकों के अनुरूप यह विधेयक भारत को आधुनिक, तकनीक-आधारित श्रम सुधारों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में स्थापित करता है।







